चीन की ड्यूटी चोरी पर भारत का शिकंजा, मलेशिया के रास्ते आयात पर भी होगी सख्ती

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DigitalUPNews

दिल्ली। भारत सरकार ने चीन और दक्षिण कोरिया से आयात होने वाले हाइड्रोलिक रॉक ब्रेकर और अलॉय स्टील टूल पर लागू एंटी-डंपिंग ड्यूटी से बचने की कथित कोशिशों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। अब मलेशिया के रास्ते इन उत्पादों का आयात करके शुल्क से बचना आसान नहीं होगा। केंद्र सरकार ने इस मामले में जांच का दायरा बढ़ाते हुए मलेशिया से आने वाले संबंधित उत्पादों पर भी निगरानी कड़ी कर दी है।

दरअसल, चीन और दक्षिण कोरिया से आने वाले हाइड्रोलिक रॉक ब्रेकर तथा अलॉय स्टील टूल पर पहले से ही एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू है। इस शुल्क का उद्देश्य घरेलू उद्योगों को विदेशी कंपनियों द्वारा कम कीमत पर उत्पाद बेचकर बाजार को प्रभावित करने से बचाना है। हालांकि, ऐसी आशंका सामने आई कि कुछ आयातक मलेशिया के रास्ते इन उत्पादों को भारत में मंगाकर पहले से लागू शुल्क से बचने की कोशिश कर सकते हैं।

इसी आशंका को देखते हुए सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है।

DGTR ने शुरू की एंटी-सर्कमवेंशन जांच

मामले में शुरुआती जांच के दौरान डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) को कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे यह आशंका मजबूत हुई है कि एंटी-डंपिंग ड्यूटी से बचने के लिए आयात के रास्ते या उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है।

इसके बाद DGTR ने एंटी-सर्कमवेंशन यानी शुल्क से बचने के कथित प्रयासों की जांच शुरू कर दी है। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या चीन और दक्षिण कोरिया से आने वाले उत्पादों पर लागू एंटी-डंपिंग ड्यूटी से बचने के लिए मलेशिया को तीसरे देश के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

गौरतलब है कि एंटी-सर्कमवेंशन जांच उन परिस्थितियों में की जाती है, जब किसी देश पर लगाए गए व्यापारिक शुल्क से बचने के लिए उत्पादों के आयात मार्ग, निर्माण प्रक्रिया या आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव किए जाने की आशंका होती है।

मलेशिया से आने वाले उत्पादों पर प्रोविजनल असेसमेंट अनिवार्य

सरकार ने जांच को प्रभावी बनाने के लिए मलेशिया से आयात होने वाले संबंधित उत्पादों के लिए प्रोविजनल असेसमेंट अनिवार्य कर दिया है। इसका मतलब है कि अब ऐसे उत्पादों के आयात के दौरान सीमा शुल्क विभाग अतिरिक्त सतर्कता बरतेगा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनका मूल्यांकन करेगा।

इसके साथ ही आयातकों को संभावित एंटी-डंपिंग ड्यूटी के बराबर देनदारी के लिए कस्टम विभाग के पास गारंटी जमा करनी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि जांच के बाद शुल्क से बचने की पुष्टि होती है, तो सरकार के पास संभावित शुल्क की वसूली के लिए आवश्यक वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध रहे।

इस कदम से उन आयातकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आएगी, जो मलेशिया से संबंधित उत्पादों को भारत में लाते हैं। उन्हें अब आयात प्रक्रिया के दौरान आवश्यक दस्तावेज और वित्तीय गारंटी संबंधी औपचारिकताओं का पालन करना होगा।

तैयार रॉक ब्रेकर के साथ सात प्रमुख पार्ट्स भी जांच के दायरे में

इस मामले में जांच का दायरा केवल तैयार हाइड्रोलिक रॉक ब्रेकर तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके साथ ही रॉक ब्रेकर के सात प्रमुख पार्ट्स को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है।

इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं तैयार मशीन के बजाय उसके अलग-अलग हिस्सों का आयात करके भारत में उन्हें जोड़ने या असेंबल करने के माध्यम से एंटी-डंपिंग ड्यूटी से बचने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है।

यदि जांच में इस तरह की गतिविधियों की पुष्टि होती है, तो संबंधित उत्पादों और उनके आयात से जुड़ी व्यवस्था पर व्यापारिक नियमों के तहत आगे कार्रवाई की जा सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी उत्पाद पर शुल्क लागू होने के बाद उसके अलग-अलग हिस्सों के माध्यम से आयात की व्यवस्था में बदलाव करना व्यापारिक निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण विषय बन जाता है। इसलिए तैयार उत्पादों के साथ उनके प्रमुख घटकों की जांच भी जरूरी मानी जाती है।

फिलहाल नई ड्यूटी नहीं लगी, जांच के बाद होगा फैसला

हालांकि, इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि मलेशिया से आने वाले संबंधित उत्पादों पर फिलहाल कोई नई एंटी-डंपिंग ड्यूटी नहीं लगाई गई है। सरकार ने अभी केवल जांच के दौरान संभावित शुल्क की वसूली को सुरक्षित रखने के लिए प्रोविजनल असेसमेंट और गारंटी की व्यवस्था लागू की है।

अर्थात, अभी यह अंतिम रूप से साबित नहीं हुआ है कि मलेशिया के रास्ते आयात करके एंटी-डंपिंग ड्यूटी से बचने की कोशिश की गई है। इसके लिए DGTR की जांच पूरी होना जरूरी है।

जांच के दौरान आयात के दस्तावेजों, उत्पादों की उत्पत्ति, निर्माण प्रक्रिया, आपूर्ति श्रृंखला और संबंधित व्यापारिक गतिविधियों का परीक्षण किया जा सकता है। इसके आधार पर यह तय होगा कि क्या मलेशिया से आने वाले उत्पादों पर भी एंटी-डंपिंग ड्यूटी से संबंधित कार्रवाई की आवश्यकता है।

घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने की कोशिश

भारत सरकार का यह कदम घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को अनुचित व्यापारिक प्रतिस्पर्धा से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एंटी-डंपिंग ड्यूटी का उद्देश्य विदेशी उत्पादों के अनुचित मूल्य निर्धारण से भारतीय कंपनियों और निर्माताओं को होने वाले नुकसान को रोकना है।

वहीं, यदि कोई आयातक निर्धारित शुल्क से बचने के लिए तीसरे देश का इस्तेमाल करता है, तो इससे सरकार की व्यापारिक नीति और घरेलू उद्योगों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

ऐसे में मलेशिया से होने वाले संबंधित आयात पर निगरानी बढ़ाना सरकार की व्यापारिक नीति को प्रभावी बनाने का प्रयास है। अब सभी की नजर DGTR की जांच रिपोर्ट पर रहेगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई और संभावित शुल्क को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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