जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में जांच समिति को नहीं मिलीं शिकायतें, सुप्रीम कोर्ट ने तय की एक महीने की समयसीमा

WhatsApp Image 2026-11-06 at 5.50.11 PM

Digital UP News

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 13 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और कथित लाठीचार्ज का मामला अब जांच के नए चरण में पहुंच गया है। इस घटना की निष्पक्ष जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के सामने अब तक बेहद कम शिकायतें पहुंची हैं। हैरानी की बात यह है कि शिकायतें आमंत्रित करने के लिए देशभर में व्यापक स्तर पर प्रचार किया गया था, इसके बावजूद लोगों की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया था। समिति को प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, कथित लाठीचार्ज और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

देशभर के 149 अखबारों में प्रकाशित हुआ था नोटिस

जांच प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यापक बनाने के उद्देश्य से समिति ने 17 अक्टूबर 2026 को देशभर के 149 समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कराया था। इसके माध्यम से आम नागरिकों, प्रदर्शनकारियों और घटना से प्रभावित लोगों से अपनी शिकायतें तथा संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने की अपील की गई थी।

इसके अलावा शिकायत दर्ज कराने के लिए कई माध्यम उपलब्ध कराए गए थे। इनमें ऑनलाइन पोर्टल, ईमेल, डाक और समिति के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से शिकायत प्रस्तुत करने की सुविधा शामिल थी। समिति का उद्देश्य था कि घटना से संबंधित किसी भी व्यक्ति को अपनी बात रखने का अवसर मिले और जांच के दौरान सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल किया जा सके।

हालांकि, इतने व्यापक प्रचार और विभिन्न माध्यमों की उपलब्धता के बावजूद समिति को बहुत कम शिकायतें प्राप्त हुईं। जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन पोर्टल पर केवल एक-दो शिकायतें ही दर्ज हुईं। वहीं, ईमेल, डाक और कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से शिकायत मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है।

29 अक्टूबर को केवल एक शिकायतकर्ता पहुंचा

समिति के समक्ष 29 अक्टूबर 2026 को सुनवाई और जांच की प्रक्रिया के दौरान केवल एक शिकायतकर्ता हलफनामा लेकर पहुंचा। इसके अलावा कुछ पुलिसकर्मी भी समिति के सामने पेश हुए। उन्होंने घटना और पुलिस कार्रवाई से जुड़े तथ्यों के संबंध में अपना पक्ष रखा।

इस स्थिति ने जांच प्रक्रिया के सामने एक अलग चुनौती खड़ी कर दी है। दरअसल, समिति ने शिकायतें आमंत्रित करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराया था, लेकिन लोगों की ओर से सीमित प्रतिक्रिया मिलने के कारण शिकायत आधारित जांच का दायरा अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ पाया।

हालांकि, शिकायतों की संख्या कम होने का अर्थ यह नहीं है कि घटना की जांच की आवश्यकता समाप्त हो गई है। समिति को उपलब्ध दस्तावेजों, पुलिसकर्मियों के बयान, शिकायतकर्ता के हलफनामे और अन्य संबंधित तथ्यों के आधार पर मामले की पड़ताल करनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने में रिपोर्ट देने का दिया निर्देश

इस मामले में 5 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया। शीर्ष अदालत ने उच्चस्तरीय समिति को एक महीने के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया केवल शिकायतों का इंतजार करते हुए अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रह सकती। अदालत के इस निर्देश से समिति के सामने अब निर्धारित समयसीमा में जांच पूरी करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

इस निर्देश का उद्देश्य जांच को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना है, ताकि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और पुलिस की भूमिका से जुड़े सवालों पर निष्कर्ष तक पहुंचा जा सके।

अब जांच के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि समिति उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर क्या निष्कर्ष निकालती है। शिकायतों की संख्या कम होने के बावजूद जांच को निष्पक्ष और तथ्य आधारित रखना समिति के लिए महत्वपूर्ण होगा।

इसके साथ ही पुलिसकर्मियों के बयान, शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत हलफनामा और घटना से संबंधित अन्य उपलब्ध सामग्री जांच के अहम आधार बन सकते हैं।

कुल मिलाकर, जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक महीने की समयसीमा तय किए जाने के बाद अब सभी की निगाहें समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। इस रिपोर्ट से घटना के विभिन्न पहलुओं और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे सवालों पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

You may have missed