कोल इंडिया का CSR खर्च बढ़कर करीब 1,000 करोड़ रुपये सालाना, 12 वर्षों में 7,276 करोड़ का व्यय

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रिपोर्ट- अमित सिंह यादव

नई दिल्ली। कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के क्षेत्र में पिछले एक दशक से अधिक समय में व्यापक स्तर पर काम किया है। कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच निर्धारित 5,795 करोड़ रुपये की सांविधिक CSR आवश्यकता के मुकाबले 7,276 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस अवधि में कंपनी का वार्षिक CSR व्यय लगभग 500 करोड़ रुपये के स्तर से बढ़कर करीब 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

कोल इंडिया का CSR कार्यक्रम खास तौर पर उन क्षेत्रों पर केंद्रित है जहां कंपनी की खनन गतिविधियां संचालित होती हैं। देश के कई कोयला उत्पादक क्षेत्र आदिवासी आबादी और अपेक्षाकृत सीमित संसाधनों वाले जिलों में आते हैं। इसलिए कंपनी ने सामुदायिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, आजीविका और आधारभूत सुविधाओं को अपने CSR कार्यक्रम में प्रमुखता दी है।

वैधानिक CSR से पहले भी चल रहा था सामुदायिक विकास

कोल इंडिया में सामुदायिक कल्याण की पहल नई नहीं है। कंपनी और उसकी सहायक कंपनियां कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत CSR व्यवस्था लागू होने से पहले ही सामुदायिक विकास नीति-2005 के तहत खनन क्षेत्रों के आसपास सामाजिक विकास के कार्य करती रही हैं।

पहले की व्यवस्था के अंतर्गत खनन गतिविधियों वाले क्षेत्रों के लगभग 8 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों में पेयजल, स्वास्थ्य शिविर और छोटे बुनियादी ढांचा कार्य किए जाते थे। वित्त वर्ष 2011-12 से 2013-14 के बीच सामुदायिक विकास पर कंपनी का वार्षिक खर्च 82 करोड़ रुपये से बढ़कर 409 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।

हालांकि, कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 135 लागू होने के बाद CSR के लिए एक औपचारिक और संस्थागत व्यवस्था विकसित हुई। इसके तहत पात्र कंपनियों को अपने औसत शुद्ध लाभ का निर्धारित हिस्सा CSR गतिविधियों पर खर्च करना होता है।

स्थानीय क्षेत्रों को दी गई प्राथमिकता

कोल इंडिया ने अपनी CSR नीति में स्थानीय क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी है। कंपनी के अनुसार, वार्षिक CSR बजट का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा खदानों और प्रतिष्ठानों के 25 किलोमीटर के दायरे में खर्च किया जाता है। परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों को इसमें प्राथमिकता दी जाती है।

इसके परिणामस्वरूप कंपनी का 90 प्रतिशत से अधिक CSR व्यय कोयला उत्पादक राज्यों में होता है। इससे उन समुदायों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जाता है जो खनन गतिविधियों से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हैं।

स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष जोर

कोल इंडिया के CSR कार्यक्रम में स्वास्थ्य और शिक्षा प्रमुख क्षेत्र हैं। कंपनी ने स्वच्छ विद्यालय अभियान में योगदान देते हुए सरकारी स्कूलों में 50,000 से अधिक शौचालयों के निर्माण में सहयोग किया।

इसके अलावा कोविड-19 महामारी के दौरान भी कंपनी ने राहत एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में योगदान दिया। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में समर्पित अस्पतालों से लेकर ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों की स्थापना तक विभिन्न पहल की गईं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में थैलेसीमिया बाल सेवा योजना के माध्यम से अस्थि-मज्जा प्रत्यारोपण में सहायता दी गई। वहीं नन्हा सा दिल कार्यक्रम के तहत दो लाख से अधिक बच्चों की जांच और जन्मजात हृदय रोग से प्रभावित 1,700 से ज्यादा बच्चों के उपचार का दावा किया गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल विद्या पहल के तहत सरकारी विद्यालयों में 2,300 से अधिक स्मार्ट क्लासरूम और 500 ICT/STEM लैब स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही रांची में 5,000 लोगों की क्षमता वाले राज्य पुस्तकालय के निर्माण की पहल भी चल रही है।

रोजगार, कौशल और आजीविका को बढ़ावा

CSR गतिविधियों का दायरा केवल स्वास्थ्य और शिक्षा तक सीमित नहीं है। कंपनी के कौशल विकास और आजीविका कार्यक्रमों के तहत पिछले चार वित्तीय वर्षों में 48,000 से अधिक लोगों को लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।

इनमें प्रगति परियोजना, आदिवासी महिलाओं के लिए पोल्ट्री सहायता, प्लास्टिक इंजीनियरिंग और बहु-कौशल प्रशिक्षण जैसी पहल शामिल हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर कौशल बढ़ाने के साथ रोजगार और आय के अवसरों को मजबूत करना है।

इसी तरह, झारखंड सरकार के साथ साझेदारी में संचालित खेलगांव स्पोर्ट्स एकेडमी से जुड़े खिलाड़ियों ने 1,800 से अधिक पदक हासिल किए हैं, जिनमें 15 अंतरराष्ट्रीय पदक भी शामिल बताए गए हैं।

बड़े सामाजिक और संस्थागत प्रोजेक्ट

कोल इंडिया ने CSR के तहत बड़े सामाजिक और सार्वजनिक महत्व के प्रोजेक्ट भी संचालित किए हैं। अंगुल में 500 बिस्तरों वाले मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और झारसुगुडा में कार्डियक केयर सेंटर जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं पर कुल 596 करोड़ रुपये की लागत का उल्लेख किया गया है।

इसके अलावा IIT (ISM) धनबाद में शताब्दी भवन और कोलकाता के हावड़ा पुल की लाइटिंग जैसी परियोजनाएं भी कंपनी की CSR गतिविधियों में शामिल रही हैं।

कंपनी के अनुसार, इन विभिन्न पहलों का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव लगभग 3.56 करोड़ लोगों तक पहुंचा है। इनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाएं और दिव्यांगजन जैसे समुदाय भी शामिल हैं।

निगरानी और प्रभाव मूल्यांकन पर जोर

CSR कार्यक्रमों में पारदर्शिता और प्रभाव को बढ़ाने के लिए कोल इंडिया वार्षिक कार्य योजनाओं, समयबद्ध समझौता ज्ञापनों और उपयोगिता प्रमाणपत्रों के आधार पर चरणबद्ध फंड जारी करने की व्यवस्था अपनाती है। बड़ी परियोजनाओं के लिए स्वतंत्र तृतीय-पक्ष प्रभाव मूल्यांकन की व्यवस्था भी रखी गई है।

इसके अलावा आंतरिक निगरानी, वैधानिक ऑडिट और CAG की लेखा परीक्षा जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से CSR व्यय की निगरानी की जाती है।

हाल ही में कोयला मंत्रालय की ओर से पूरे कोयला क्षेत्र के लिए CSR नियमों, प्राथमिकताओं और रूपरेखा को अधिक समन्वित बनाने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य कोयला क्षेत्र की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के CSR कार्यों में एकरूपता, समन्वय और जवाबदेही को मजबूत करना है।