हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश: स्कूलों में बच्चों की परिवहन सुरक्षा पर निगरानी बढ़ेगी, समितियों की नियमित बैठक जरूरी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की परिवहन सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने प्रदेश के स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने और संबंधित सुरक्षा समितियों को प्रभावी ढंग से सक्रिय करने पर जोर दिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समिति (डीएसवीएससी) की नियमित बैठकें सुनिश्चित कराने के साथ-साथ स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों (एसटीएससी) के प्रदर्शन की निगरानी करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय के निर्देशों के बाद अब जिलों में स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े नियमों के पालन की निगरानी को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित समितियों का गठन केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें नियमों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा।
मुख्य सचिव को एक सप्ताह में निर्देश जारी करने का आदेश
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। इन निर्देशों के माध्यम से जिला स्तर पर गठित स्कूल वाहन सुरक्षा समितियों की कार्यप्रणाली को सक्रिय और प्रभावी बनाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी है।
इसके साथ ही मुख्य सचिव को जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समितियों की नियमित बैठकों और स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों के प्रदर्शन की निगरानी के लिए आवश्यक व्यवस्था करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य स्कूलों में बच्चों के आवागमन से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा करना है।
जिलाधिकारियों को मिली अहम जिम्मेदारी
न्यायालय ने जिलाधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। कोर्ट के निर्देश के अनुसार जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि धारा 222जी के तहत गठित विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का विधिवत गठन हो। इसके अलावा समितियां निर्धारित नियमों और जिम्मेदारियों के अनुरूप कार्य कर रही हैं या नहीं, इसकी निगरानी भी आवश्यक होगी।
दरअसल, स्कूलों में बच्चों के आवागमन के लिए बड़ी संख्या में बस, वैन और अन्य वाहन संचालित होते हैं। ऐसे में इन वाहनों से संबंधित सुरक्षा मानकों, संचालन व्यवस्था और निगरानी को लेकर जिला स्तर पर प्रभावी तंत्र की आवश्यकता होती है। इसी संदर्भ में न्यायालय ने समितियों को सक्रिय रूप से काम करने पर जोर दिया है।
समितियों की भूमिका केवल कागजों तक सीमित न रहे
कोर्ट के निर्देशों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विद्यालय परिवहन सुरक्षा समितियों की भूमिका केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहे। समितियों को अपने निर्धारित दायित्वों का वास्तविक रूप से निर्वहन करना होगा।
इसके लिए स्कूलों में बच्चों के परिवहन से जुड़े सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा, संबंधित नियमों के अनुपालन और आवश्यक सुधारों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, जिला स्तर पर होने वाली बैठकों के माध्यम से सामने आने वाले विषयों पर कार्रवाई की स्थिति की भी निगरानी की जा सकेगी।
इस व्यवस्था से प्रशासन, स्कूल प्रबंधन और परिवहन से जुड़े संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिल सकती है। वहीं, नियमित समीक्षा से सुरक्षा व्यवस्था में सामने आने वाली कमियों को समय रहते चिन्हित किया जा सकेगा।
सीबीएसई और आईसीएसई भी मामले में पक्षकार
हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (ICSE) को भी पक्षकार बनाया है। इससे मामले में प्रदेश के विभिन्न बोर्डों से संबद्ध स्कूलों में परिवहन सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी व्यापक विचार-विमर्श की संभावना बनी है।
सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध स्कूल बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करते हैं। ऐसे स्कूलों में विद्यार्थियों के आवागमन के लिए स्कूल बसों और अन्य परिवहन साधनों का उपयोग किया जाता है। इसलिए परिवहन सुरक्षा से संबंधित न्यायालय के निर्देशों का दायरा व्यापक माना जा रहा है।
एक महीने में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने जिलाधिकारियों को न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा है। जिलाधिकारियों को एक महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी। इस रिपोर्ट के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाना होगा कि विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का गठन और उससे संबंधित आवश्यक कार्रवाई किस स्तर तक पूरी की गई है।
इसके अलावा जिला स्तर पर सुरक्षा समितियों की सक्रियता और उनके निर्धारित दायित्वों के निर्वहन की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। इस व्यवस्था के जरिए न्यायालय प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की निगरानी कर सकेगा।
28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
इस मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अगली सुनवाई के लिए 28 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। अगली सुनवाई में न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन और संबंधित पक्षों की स्थिति पर आगे विचार किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, हाईकोर्ट के निर्देशों से उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की परिवहन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला स्तर पर निगरानी तंत्र को सक्रिय करने की दिशा में कदम उठाया गया है। मुख्य सचिव से लेकर जिलाधिकारियों और स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों तक जिम्मेदारियां तय किए जाने से अब प्रशासनिक स्तर पर अनुपालन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
स्कूल परिवहन व्यवस्था बच्चों की दैनिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में सुरक्षा मानकों की नियमित समीक्षा और संबंधित समितियों की सक्रियता से व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने में मदद मिल सकती है। अब सभी की नजर 28 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां इस मामले में आगे की कार्रवाई और अनुपालन की स्थिति पर चर्चा हो सकती है।

