सोनभद्र में रोस्टिंग के नाम पर बिजली कटौती के विरोध में प्रदर्शन, संदीप मिश्र ने दी आंदोलन की चेतावनी

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रिपोर्ट – ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी 

सोनभद्र: ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टिंग के नाम पर हो रही बिजली कटौती को लेकर किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पहुंचकर बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विभागीय व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की और ग्रामीण इलाकों में नियमित एवं पर्याप्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।

मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्र ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बिजली कटौती के कारण किसान, नौजवान और आम उपभोक्ता परेशान हैं। उनका कहना है कि बिजली आपूर्ति में बार-बार व्यवधान से ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने विभाग से रोस्टिंग के नाम पर होने वाली कटौती की व्यवस्था की समीक्षा कर समस्या का समाधान करने की मांग की।

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती का मुद्दा उठा

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में निर्धारित समय के अलावा भी बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि बिजली कटौती कब और कितनी देर के लिए होगी। किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ने इस व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की मांग की है।

संदीप मिश्र ने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली समस्या को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। उनके मुताबिक, लंबे समय तक बिजली उपलब्ध नहीं होने से किसानों को सिंचाई समेत कई जरूरी कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं, विद्यार्थियों, छोटे कारोबारियों और घरेलू उपभोक्ताओं की दिनचर्या भी बिजली आपूर्ति पर निर्भर रहती है।

उन्होंने कहा कि बिजली विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन करते हुए आपूर्ति व्यवस्था में आवश्यक बदलाव करने चाहिए। साथ ही, जहां तकनीकी या अन्य कारणों से बिजली कटौती जरूरी हो, वहां उपभोक्ताओं को पहले से जानकारी देने की व्यवस्था होनी चाहिए।

ऊर्जा उत्पादन के बावजूद पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिलने का सवाल

प्रदर्शन के दौरान सोनभद्र में बिजली उत्पादन और स्थानीय आपूर्ति के बीच संतुलन का मुद्दा भी उठाया गया। संदीप मिश्र ने कहा कि सोनभद्र ऊर्जा उत्पादन के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। इसके बावजूद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पर्याप्त बिजली नहीं मिलना चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि जिले से उत्पादित ऊर्जा प्रदेश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचती है, लेकिन स्थानीय ग्रामीण आबादी को यदि नियमित बिजली आपूर्ति के लिए संघर्ष करना पड़े तो इस व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने मांग की कि ग्रामीण उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बिजली आपूर्ति का प्रभावी प्रबंधन किया जाए।

हालांकि, बिजली कटौती के कारणों और रोस्टिंग की वास्तविक स्थिति को लेकर विभागीय पक्ष इस प्रदर्शन के दौरान सामने नहीं आया। इसलिए प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों के संबंध में बिजली विभाग का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

एक सप्ताह में व्यवस्था सुधारने की मांग

किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ने बिजली विभाग को व्यवस्था में सुधार के लिए एक सप्ताह का समय देने की बात कही है। संदीप मिश्र ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन को और व्यापक करेगा।

उन्होंने कहा कि बिजली कटौती की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाने की तैयारी की जाएगी। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य ग्रामीण उपभोक्ताओं को नियमित बिजली आपूर्ति दिलाना और उनकी समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध खेती, शिक्षा, छोटे व्यवसाय और रोजमर्रा के कामकाज से भी है। इसलिए बिजली आपूर्ति में सुधार ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जनजीवन के लिए महत्वपूर्ण है।

बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद

अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर हुए प्रदर्शन में किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा से जुड़े बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नौजवान शामिल हुए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने बिजली विभाग से ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित विद्युत आपूर्ति बहाल करने और रोस्टिंग के नाम पर होने वाली कटौती को कम करने की मांग की।

प्रदर्शन में आकाश चौहान, शत्रुघ्न बिंद, संजय बियार, भोलू गुप्ता, विजय चौहान, दिनेश चेरो, बिंदू खरवार, विनय पासवान, सुमंत बिंद, हरिवंत बियार, रोहित मौर्य और अजय पटेल समेत सैकड़ों नौजवान मौजूद रहे।

प्रदर्शन के अंत में संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आगे भी आंदोलन जारी रखा जाएगा। अब देखने वाली बात होगी कि बिजली विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाता है और संगठन की मांगों पर किस तरह कार्रवाई होती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती का मुद्दा स्थानीय स्तर पर लंबे समय से उपभोक्ताओं की प्राथमिक समस्याओं में शामिल रहा है। ऐसे में प्रदर्शन के बाद विभागीय स्तर पर होने वाली कार्रवाई और बिजली आपूर्ति में होने वाला सुधार इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण रहेगा।

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