मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की मांग पर संग्राम, सीएम से मिलने जा रहे वकीलों की बस पुलिस ने रोकी

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रिपोर्ट- मनीष पाराशर 

मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय से चली आ रही हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर सोमवार को मेरठ में अधिवक्ताओं और पुलिस-प्रशासन के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मेरठ दौरे के दौरान उनसे मुलाकात कर मांग पत्र सौंपने जा रहे अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। इसके बाद अधिवक्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस हुई। बाद में नाराज अधिवक्ता बस से उतरकर जुलूस के रूप में कमिश्नरी की ओर रवाना हो गए।

मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए जा रहे थे अधिवक्ता

दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर मेरठ के अधिवक्ता लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। इसी क्रम में सोमवार को अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने और उन्हें हाईकोर्ट बेंच की मांग से संबंधित ज्ञापन सौंपने के लिए सुभारती विश्वविद्यालय जाने की तैयारी में था।

अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल बस में सवार होकर आगे बढ़ने लगा। इसी दौरान पुलिस ने बस को चारों ओर से घेर लिया और उसे आगे जाने से रोक दिया। पुलिस की ओर से बस को रोके जाने के बाद अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ गई।

बस रोकने पर पुलिस और वकीलों में नोकझोंक

बस को आगे बढ़ने से रोकने को लेकर अधिवक्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच काफी देर तक बहस हुई। इस दौरान बस में चढ़ने और आगे जाने को लेकर दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक भी हुई। अधिवक्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई और इसे उनके शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री से मिलने के अधिकार में बाधा बताया।

स्थिति बिगड़ती देख अधिवक्ता बस से उतर आए। इसके बाद उन्होंने सड़क पर नारेबाजी शुरू कर दी और जुलूस के रूप में कमिश्नरी की ओर कूच कर दिया। अचानक बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के कमिश्नरी की तरफ बढ़ने से पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों में हलचल बढ़ गई।

कमिश्नरी के पास अधिकारियों ने संभाला मोर्चा

अधिवक्ताओं के कमिश्नरी की ओर बढ़ने की सूचना पर एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले और एडीएम सिटी बृजेश कुमार सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने अधिवक्ताओं को रोककर उनसे बातचीत की और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया।

इस दौरान अधिवक्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि वे किसी प्रकार का उपद्रव करने के लिए नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लंबे समय से चली आ रही मांग को मुख्यमंत्री के सामने रखने के लिए जा रहे थे।

काफी देर तक चली बातचीत और मान-मनौव्वल के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया कि दोपहर दो बजे उनके प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कराई जाएगी। प्रशासन की ओर से मिले इस आश्वासन के बाद अधिवक्ताओं ने तत्काल अपना आंदोलन स्थगित कर दिया और वापस लौट गए।

अध्यक्ष अनुज शर्मा ने पुलिस कार्रवाई पर जताई नाराजगी

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज शर्मा ने कहा कि अधिवक्ता शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे थे। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की वर्षों पुरानी मांग को मुख्यमंत्री के सामने रखना था।

अनुज शर्मा ने कहा कि पुलिस ने जिस तरह अधिवक्ताओं की बस को घेरकर उन्हें आगे बढ़ने से रोका, उससे अधिवक्ताओं में नाराजगी पैदा हुई। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए हाईकोर्ट की दूरी लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रही है।

अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रयागराज स्थित हाईकोर्ट तक पहुंचने में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे मुकदमों की पैरवी करने वाले वादकारियों को समय के साथ-साथ यात्रा और ठहरने पर अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है।

कई दशकों से जारी है हाईकोर्ट बेंच की मांग

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग कोई नई नहीं है। मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 से अधिक जिलों के अधिवक्ता कई दशकों से इस मांग को लेकर अलग-अलग स्तर पर आंदोलन करते रहे हैं।

अधिवक्ताओं का तर्क है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी आबादी रहती है और यहां से बड़ी संख्या में मुकदमे हाईकोर्ट तक पहुंचते हैं। इसके बावजूद क्षेत्र में हाईकोर्ट की स्थायी या खंडपीठ नहीं होने के कारण लोगों को प्रयागराज जाना पड़ता है।

अधिवक्ताओं के अनुसार, मेरठ या पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच स्थापित होने से क्षेत्र के वादकारियों को न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है। साथ ही उनका कहना है कि इससे यात्रा में लगने वाला समय और खर्च भी कम हो सकता है।

आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात और मांग पत्र सौंपने के बाद भी हाईकोर्ट बेंच का मुद्दा समाप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि यदि उनकी मांग पर ठोस पहल नहीं होती है तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

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