कानपुर में कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग को लेकर शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का पैदल मार्च
रिपोर्ट- हनुमन्त सिंह पिन्टू
कानपुर: माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी एसोसिएशन (उत्तर प्रदेश) के बैनर तले सोमवार को कानपुर में कर्मचारियों ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग को लेकर पैदल मार्च निकाला। एसोसिएशन की ओर से यह आंदोलन चरणबद्ध संघर्ष कार्यक्रम के तहत किया गया। कर्मचारियों ने फूलबाग स्थित गांधी प्रतिमा से मार्च शुरू किया और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए शासनादेश में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ देने की मांग उठाई।
एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री शिव बहादुर यादव ने कहा कि माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत लिपिक और चतुर्थ श्रेणी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी शिक्षकों की तरह चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलना चाहिए। उनका कहना है कि कर्मचारियों को शासन की ओर से जारी व्यवस्था में शामिल नहीं किए जाने से शिक्षणेत्तर संवर्ग में असंतोष है। इसी मांग को लेकर संगठन की ओर से चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा है।
गांधी प्रतिमा से शुरू हुआ पैदल मार्च
माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी एसोसिएशन के संघर्ष कार्यक्रम के चौथे और अंतिम चरण के तहत फूलबाग स्थित गांधी प्रतिमा से पैदल मार्च निकाला गया। मार्च को एसोसिएशन के संरक्षक मंडल के सदस्यों हरिश्चंद्र दीक्षित, सुरेश शर्मा, राजकुमार श्रीवास्तव और देवेंद्र सारस्वत ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इसके बाद 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मचारी निर्धारित रूट के अनुसार पैदल मार्च करते हुए आगे बढ़े। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांग को शासन तक पहुंचाने और शिक्षणेत्तर संवर्ग को कैशलेस चिकित्सा सुविधा में शामिल किए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
मार्च के समापन पर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रस्तुत किया। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने शासन से मामले पर गंभीरता से विचार करने और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की मांग की।
शिक्षक दिवस पर हुई थी घोषणा का हवाला
एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री शिव बहादुर यादव के अनुसार, 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री की ओर से कैशलेस चिकित्सा सुविधा दिए जाने की घोषणा की गई थी। संगठन का कहना है कि इसके बाद 4 फरवरी 2026 को जारी शासनादेश संख्या 1728/15-8-2026-3091 के माध्यम से शिक्षकों को इस सुविधा के दायरे में शामिल किया गया।
हालांकि, एसोसिएशन के अनुसार, माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत लिपिक एवं चतुर्थ श्रेणी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इस व्यवस्था में शामिल नहीं किया गया। संगठन इसी अंतर को दूर करने की मांग कर रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि विद्यालयों में शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी एक साथ कार्य करते हैं, इसलिए चिकित्सा सुविधा के मामले में भी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को समान लाभ दिया जाना चाहिए।
शासनादेश में शिक्षणेत्तर संवर्ग को शामिल करने की मांग
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में शासनादेश में आवश्यक संशोधन किए जाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा से बाहर रखने के कारण कर्मचारियों में निराशा है।
संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक, चिकित्सा संबंधी खर्च आज के समय में कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलने से कर्मचारियों और उनके परिवारों को उपचार के दौरान आर्थिक प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिल सकती है। इसी कारण एसोसिएशन लंबे समय से इस मांग को शासन के सामने रख रहा है।
इसके अलावा, संगठन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान पैदल मार्च उसके घोषित संघर्ष कार्यक्रम का अंतिम चरण था। अब प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से मुख्यमंत्री तक कर्मचारियों की मांग पहुंचाई गई है। संगठन को उम्मीद है कि शासन स्तर पर इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
बड़ी संख्या में कर्मचारी रहे मौजूद
पैदल मार्च में एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री शिव बहादुर यादव के साथ सुहैल सिद्दीकी, शिव कुमार शाक्य, प्रमोद कठेरिया, सोमपाल सिंह, मुनीश मिश्रा, जयराम यादव, घनश्याम केसरवानी, अवधेश शुक्ला, अजय शुक्ला, अशोक मिश्रा और पंकज शर्मा समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल रहे।
इसके अलावा शिव पुजारी, विजय यादव, राम किशन यादव, शिव कुमार गुप्ता, अशोक यादव, सुनील कुमार सिंह, पंकज कुमार वर्मा, रितेश सचान, मुरलीधर त्रिपाठी, उमेश चंद्र, बाबू लाल कुशवाहा, राजीव सिंह राठौर, जितेंद्र वाल्मीकि, पवन कुमार त्रिपाठी, अखिलेश कुमार, अनिल सिंह, भूपेश राणा, संजय कुमार और शिव कुमार गौतम सहित अन्य कर्मचारी भी मार्च में मौजूद रहे।
संगठन से जुड़े राम मोहन सविता, ओम प्रकाश यादव, नरसिंह यादव, सुबोध शर्मा, राजेश चावला, अक्षत कुमार, राहुल कश्यप, शीशपाल सिंह, ऋषिपाल सिंह, अनूप सिंह, शिवमोहन, विवेक सिंह, राजीव शुक्ला, शशिकांत शर्मा और राजीव कुमार सहित अन्य कर्मचारियों ने भी आंदोलन में भाग लिया।
मांग पूरी होने तक जारी रह सकता है प्रयास
माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी एसोसिएशन का कहना है कि उसका उद्देश्य शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिलाना है। संगठन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर शासनादेश में आवश्यक संशोधन की मांग की है।

