कानपुर में किसानों ने नहरों में पानी, खाद और छुट्टा पशुओं की समस्या पर उठाई आवाज, डीएम को सौंपा 5 सूत्रीय मांग पत्र
रिपोर्ट – हनुमंत सिंह
कानपुर: भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारियों ने किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर कानपुर नगर के जिलाधिकारी को पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। यह मांग पत्र संगठन के जिलाध्यक्ष राधेश्याम मौर्य के नेतृत्व में दिया गया। इस दौरान किसानों ने सिंचाई व्यवस्था, उर्वरक की उपलब्धता, छुट्टा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी सहित कई मुद्दे प्रशासन के सामने रखे।
संगठन की मासिक पंचायत के दौरान किसानों की स्थानीय समस्याओं पर चर्चा की गई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को मांग पत्र सौंपकर संबंधित समस्याओं के जल्द समाधान की मांग की। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को खेती से जुड़ी कई व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन को इन समस्याओं पर प्राथमिकता के आधार पर ध्यान देना चाहिए।
नहरों की सफाई और टेल तक पानी पहुंचाने की मांग
किसानों ने सबसे प्रमुख रूप से सिंचाई व्यवस्था का मुद्दा उठाया। मांग पत्र में हलुआखेड़ा से आने वाली बौसर माइनर, नरेका माइनर, सवाईजापुर माइनर, पाले माइनर और सुभौली माइनर की समुचित सफाई कराने की मांग की गई है।
यूनियन के अनुसार, नहरों और माइनरों की उचित सफाई नहीं होने से पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसानों ने प्रशासन से संबंधित माइनरों की सफाई कराकर तत्काल टेल तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। किसानों का कहना है कि पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध रहने से फसलों की जरूरत के अनुसार सिंचाई की जा सकेगी।
इसके साथ ही संगठन ने सिंचाई विभाग और प्रशासन से नहरों की स्थिति पर नियमित निगरानी रखने की भी मांग की है, ताकि किसानों को खेती के समय पानी की समस्या का सामना न करना पड़े।
छुट्टा पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में संरक्षित करने की मांग
मांग पत्र में छुट्टा और अन्ना मवेशियों की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया गया। किसानों का कहना है कि खेतों में घूमने वाले छुट्टा पशुओं से फसलों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए भारतीय किसान यूनियन ने सभी खंड विकास अधिकारियों (BDO) को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।
यूनियन ने कहा कि छुट्टा पशुओं को पकड़वाकर तत्काल गौशालाओं में संरक्षित किया जाए। इससे किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा करने में मदद मिलेगी। संगठन ने प्रशासन से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की समस्या को लेकर प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
यूरिया और DAP की पर्याप्त उपलब्धता की मांग
किसानों ने सहकारी समितियों में उर्वरक की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया। मांग पत्र में क्षेत्र की सहकारी समितियों पर यूरिया और DAP खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की गई है।
यूनियन का कहना है कि खेती के मौसम में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होना जरूरी है। खाद की पर्याप्त उपलब्धता रहने पर किसान अपनी जरूरत के अनुसार कृषि कार्य पूरा कर सकेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए संगठन ने प्रशासन से सहकारी समितियों में यूरिया और DAP की उपलब्धता सुनिश्चित कराने को कहा है, ताकि किसानों को खाद के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकना न पड़े।
सभी फसलों के लिए MSP की कानूनी गारंटी की मांग
भारतीय किसान यूनियन ने किसानों की सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करने की मांग भी रखी। संगठन ने कहा कि किसानों की आय और कृषि व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन एवं सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
MSP को लेकर यूनियन ने मांग पत्र के माध्यम से किसानों के हित में ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही। इसके अलावा किसानों ने स्थानीय स्तर पर खेती से जुड़ी अन्य समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
दूल गांव में छुट्टा पशुओं को पकड़ने की मांग
मांग पत्र में विकास खंड कल्याणपुर के दूल गांव का मुद्दा भी विशेष रूप से शामिल किया गया। यूनियन ने बताया कि गांव में छुट्टा पशुओं के कारण किसानों की फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में संगठन ने प्रशासन से दूल गांव में अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को पकड़वाने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर भेजने की मांग की।
किसानों का कहना है कि गांव में इस समस्या का समाधान होने से खेती करने वाले लोगों को राहत मिल सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों से जल्द कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है।
प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग
जिलाधिकारी को मांग पत्र सौंपते समय भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष राधेश्याम मौर्य, सचिव मूलप्रसाद समेत संगठन के कई पदाधिकारी और किसान मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग पत्र में शामिल सभी बिंदुओं पर शीघ्र संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।
किसानों ने विशेष रूप से सिंचाई व्यवस्था, उर्वरक की उपलब्धता और छुट्टा पशुओं की समस्या को प्राथमिकता देने की बात कही। वहीं, यूनियन ने उम्मीद जताई कि प्रशासन किसानों की समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
इस प्रकार, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की मासिक पंचायत के माध्यम से किसानों की स्थानीय समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा गया। अब किसानों की नजर संबंधित विभागों की कार्रवाई पर है।

