चार मेडिकल कॉलेजों में 70% SC/ST आरक्षण विवाद, कानपुर में सामाजिक संगठनों ने CM को भेजा 6 सूत्रीय ज्ञापन

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रिपोर्ट- हनुमन्त सिंह पिन्टू 

कानपुर: उत्तर प्रदेश के चार राजकीय मेडिकल कॉलेजों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए लागू 70 प्रतिशत विशेष सीट व्यवस्था को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। इस मामले में कानपुर के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आवाज उठाते हुए कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों को छह सूत्रीय ज्ञापन भेजा। संगठनों ने मांग की है कि NEET-UG काउंसलिंग और सीट मैट्रिक्स को लेकर जल्द स्पष्ट स्थिति जारी की जाए, ताकि अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों के बीच बनी असमंजस की स्थिति दूर हो सके।

यह मामला अम्बेडकर नगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर स्थित चार राजकीय मेडिकल कॉलेजों से जुड़ा है। सामाजिक संगठनों के मुताबिक इन संस्थानों की स्थापना और विकास में Special Component Plan (SCP) तथा Tribal Sub-Plan (TSP) के तहत किए गए विशेष वित्तीय प्रावधानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संगठनों का कहना है कि इन्हीं प्रावधानों के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इन संस्थानों में वंचित और अनुसूचित वर्ग के विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा में प्रतिनिधित्व देने के लिए 70 प्रतिशत विशेष सीट व्यवस्था लागू की गई थी।

70 प्रतिशत सीट व्यवस्था को लेकर विवाद

भारतीय दलित पैंथर के प्रदेश अध्यक्ष पैंथर धनीराम बौद्ध के नेतृत्व में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य सरकार के प्रमुख अधिकारियों को संबोधित ज्ञापन सौंपा।

संगठनों का कहना है कि 70 प्रतिशत सीट व्यवस्था से संबंधित मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में NEET-UG काउंसलिंग की प्रक्रिया और सीट मैट्रिक्स को लेकर अभ्यर्थियों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि जब तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक सरकार को ऐसी अंतरिम व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

इसके अलावा, संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह इस मामले में न्यायालय के समक्ष सभी संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों के साथ अपना पक्ष प्रभावी तरीके से रखे।

सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी की मांग

ज्ञापन में सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी करने की मांग की है। उनका कहना है कि SCP और TSP से संबंधित दिशानिर्देश, फंडिंग पैटर्न और संबंधित मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के मूल उद्देश्यों से जुड़े दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने चाहिए।

संगठनों के अनुसार, मामले से जुड़े सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को स्पष्ट रूप से सामने रखना जरूरी है, ताकि न्यायालय के समक्ष पूरी स्थिति उपलब्ध हो सके। साथ ही, सरकार से यह भी कहा गया है कि वह छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आवश्यक अंतरिम व्यवस्था सुनिश्चित करे।

काउंसलिंग और सीट मैट्रिक्स पर स्पष्ट निर्देश की मांग

NEET-UG काउंसलिंग को लेकर भी ज्ञापन में विशेष रूप से मांग रखी गई है। सामाजिक संगठनों ने कहा कि काउंसलिंग शुरू होने से पहले चारों मेडिकल कॉलेजों के लिए सीट मैट्रिक्स और आरक्षण व्यवस्था को लेकर आधिकारिक निर्देश जारी किए जाएं।

उनका कहना है कि स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं होने की स्थिति में अभ्यर्थियों को कॉलेज और सीट चयन के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले सरकार और संबंधित विभागों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

पहले से प्रवेश ले चुके छात्रों की सुरक्षा की मांग

ज्ञापन में उन छात्र-छात्राओं के भविष्य को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है, जिन्होंने पूर्व में सरकारी काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से इन संस्थानों में प्रवेश लिया है। संगठनों ने कहा कि न्यायिक या नीतिगत बदलाव की स्थिति में पहले से प्रवेश पा चुके विद्यार्थियों के शैक्षणिक अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए।

इसके लिए सरकार से आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने की मांग की गई है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य पर किसी प्रकार की अनिश्चितता न रहे।

जरूरत पड़ने पर वैधानिक समाधान की मांग

सामाजिक संगठनों ने कहा कि यदि मौजूदा विवाद के समाधान के लिए आवश्यकता महसूस होती है तो राज्य सरकार संविधान और प्रचलित कानूनों के दायरे में रहते हुए नीतिगत, विधायी या वैधानिक कदम उठाए। उनका कहना है कि पूरे मामले का ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए, जिससे कानूनी प्रक्रिया का सम्मान भी हो और विद्यार्थियों के हित भी सुरक्षित रहें।

इसके साथ ही ज्ञापन में मुख्यमंत्री स्तर से चिकित्सा शिक्षा और समाज कल्याण विभाग को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की गई है।

कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने वालों में वरिष्ठ अधिवक्ता राम बहल विद्यार्थी, पास्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पास्टर जितेन्द्र सिंह, श्री गुरूसिंह महासभा के अध्यक्ष सरदार हरविन्दर सिंह लार्ड, आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष इंजीनियर ओपी सिंह, भीम आर्मी मंडल अध्यक्ष वीरेन्द्र बहुजन, यादव महासभा जिलाध्यक्ष अजीत यादव, पीडीए एसोसिएशन अध्यक्ष अशोक यादव, सेंट्रल रविदास कमेटी के संरक्षक अशोक कुमार, सुदर्शन सेवा समिति अध्यक्ष डब्लू बाल्मीकि, लक्ष्य अध्यक्ष तारा चन्द्र, अधिवक्ता विजय सागर, श्रीराम गौतम, नवीन गौतम और कमल कुमार सहित कई सामाजिक प्रतिनिधि शामिल रहे।

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