चंद्रशेखर आजाद ने उठाई मुफ्त शिक्षा की मांग, कक्षा 1 से 12 तक पढ़ाई-गरीब बच्चों के लिए IIT शिक्षा पर जोर
Digital UP News Desk
बस्ती: आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। उन्होंने कहा कि देश में कक्षा 1 से 12वीं तक की शिक्षा पूरी तरह मुफ्त होनी चाहिए। इसके साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी बच्चों को आईआईटी जैसी उच्च और महंगी शिक्षा भी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि आर्थिक स्थिति किसी बच्चे की पढ़ाई में बाधा न बने।
सांसद चंद्रशेखर आजाद ने यह बात बस्ती जिले के रुधौली विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान कही। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने के लिए बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलना जरूरी है। उनके मुताबिक, जब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी, तभी वे अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल कर आगे बढ़ सकेंगे।
कक्षा 1 से 12वीं तक मुफ्त शिक्षा की मांग
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि कक्षा 1 से 12वीं तक की पढ़ाई सभी बच्चों के लिए मुफ्त होनी चाहिए। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए शिक्षा का खर्च कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में यदि स्कूली शिक्षा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाए तो अधिक से अधिक बच्चे अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
उन्होंने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को शिक्षा के समान अवसर देने पर जोर दिया। उनका कहना है कि बच्चे की प्रतिभा और मेहनत उसके भविष्य का आधार होनी चाहिए, न कि परिवार की आर्थिक स्थिति।
दरअसल, शिक्षा तक समान पहुंच का मुद्दा लंबे समय से सार्वजनिक नीति की चर्चा का हिस्सा रहा है। केंद्र सरकार की समग्र शिक्षा योजना भी पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक की स्कूली शिक्षा को कवर करती है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने का उद्देश्य रखती है।
गरीब बच्चों को IIT जैसी उच्च शिक्षा भी मिले मुफ्त
सांसद ने केवल स्कूली शिक्षा तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने कहा कि गरीब बच्चों को आईआईटी जैसी उच्च शिक्षा भी नि:शुल्क मिलनी चाहिए। उनका तर्क है कि देश के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में भी बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली बच्चे होते हैं, लेकिन महंगी उच्च शिक्षा उनके सामने आर्थिक चुनौती पैदा कर सकती है।
इसलिए, ऐसे विद्यार्थियों के लिए फीस, छात्रवृत्ति और अन्य आर्थिक सहायता की व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया। मौजूदा समय में भी कई उच्च शिक्षण संस्थानों में जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता की व्यवस्थाएं मौजूद हैं। उदाहरण के तौर पर आईआईटी हैदराबाद की छात्रवृत्ति व्यवस्था में मेरिट-कम-मीन्स तथा कुछ श्रेणियों के विद्यार्थियों के लिए संस्थागत सहायता का प्रावधान है।
हालांकि, चंद्रशेखर आजाद की मांग इससे व्यापक है। वह गरीब बच्चों के लिए उच्च शिक्षा को भी आर्थिक रूप से अधिक सुलभ बनाने की बात कर रहे हैं, ताकि प्रतिभाशाली विद्यार्थी संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रह जाएं।
शिक्षा को सामाजिक बदलाव से जोड़ने पर जोर
कार्यकर्ता सम्मेलन में सांसद ने गरीब, पिछड़े और जरूरतमंद वर्गों के बच्चों की शिक्षा को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों के बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करने की जरूरत है। उनके अनुसार, शिक्षा केवल रोजगार हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और आत्मनिर्भरता का आधार भी है।
इसके अलावा, उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें बेहतर भविष्य के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन न करना पड़े।
शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर भी चर्चा
उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर भी सरकारी स्तर पर अलग-अलग योजनाएं संचालित हैं। उदाहरण के तौर पर मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को यूपीएससी, नीट, सीडीएस सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क तैयारी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
इसी तरह केंद्र की राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित है। शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए इसके आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है।
ऐसे में चंद्रशेखर आजाद की मांग को शिक्षा के क्षेत्र में आर्थिक बाधाओं को कम करने की व्यापक बहस के संदर्भ में देखा जा सकता है। उनकी ओर से कक्षा 1 से 12 तक मुफ्त शिक्षा के साथ-साथ उच्च शिक्षा को भी गरीब विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने की बात कही गई है।
शिक्षा के खर्च को लेकर उठता रहा है सवाल
देश में शिक्षा की बढ़ती लागत को लेकर समय-समय पर अभिभावकों और विद्यार्थियों की चिंताएं सामने आती रही हैं। खासकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ट्यूशन फीस, हॉस्टल, किताबों और अन्य शैक्षणिक खर्चों का भार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए चुनौती बन सकता है।
ऐसे में छात्रवृत्ति, फीस में छूट और वित्तीय सहायता जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दूसरी ओर, मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था लागू करने के लिए सरकारों को पर्याप्त बजट, शिक्षकों की उपलब्धता, स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा।
चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी बेहतर शिक्षा हासिल करके आगे बढ़ सकें।
शिक्षा और रोजगार को साथ जोड़ने की बात
सांसद ने अपने संबोधन में शिक्षा के साथ रोजगार को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उनका कहना है कि युवाओं को पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था को रोजगारपरक बनाने और युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने और उनके लिए काम करने की अपील भी की।
कुल मिलाकर, चंद्रशेखर आजाद की ताजा मांग में दो प्रमुख बिंदु सामने आते हैं—पहला, कक्षा 1 से 12वीं तक सभी बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा और दूसरा, गरीब तथा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए आईआईटी जैसी उच्च शिक्षा को नि:शुल्क या आर्थिक रूप से सुलभ बनाना। अब इस तरह के प्रस्तावों को लागू करने के लिए वित्तीय संसाधन, पात्रता, संस्थागत क्षमता और शिक्षा की गुणवत्ता जैसे पहलुओं पर नीति स्तर पर चर्चा महत्वपूर्ण होगी।

