कानपुर देहात में फाइलेरिया मुक्ति अभियान को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने आयोजित की कार्यशाला – दिए गे यह निर्देश

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रिपोर्ट – विशाल मिश्रा 

कानपुर देहात: जनपद में फाइलेरिया मुक्ति अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने और स्वास्थ्य सेवाओं को समुदाय तक बेहतर तरीके से पहुंचाने के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अकबरपुर और राजपुर में विभिन्न प्रशिक्षण एवं समीक्षा कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान सीएचओ-पीएसपी समीक्षा बैठक, एमएमडीपी यानी रोग प्रबंधन एवं दिव्यांगता रोकथाम प्रशिक्षण, फाइलेरिया के अपडेट दिशा-निर्देश और एमएमडीपी डेमोंस्ट्रेशन कार्यक्रम आयोजित किए गए।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों, एएनएम, संगिनी, डीसीजी सदस्यों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रतिभाग किया। इसके साथ ही सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पीएसपी के गठन को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि अभियान की सफलता के लिए मरीजों की पहचान, उनका फॉलोअप और उन्हें उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना बेहद जरूरी है।

फाइलेरिया प्रबंधन पर दिया गया प्रशिक्षण

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को फाइलेरिया रोग और उसके प्रबंधन से संबंधित जानकारी दी गई। इसके अलावा आगामी एमडीए अभियान, एमएमडीपी, पेशेंट सेल्फ केयर तथा संचारी रोगों के बचाव, नियंत्रण और प्रबंधन के संबंध में भी प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा को सुरक्षित, सटीक और अद्यतन रखने पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को यूडीएसपी, आईएचआईपी, ई-कवच और सीएस प्रो पोर्टल पर आवश्यक जानकारी दर्ज करने और उसे अपडेट रखने की प्रक्रिया से भी अवगत कराया गया।

अधिकारियों ने कहा कि किसी भी स्वास्थ्य अभियान की प्रभावशीलता के लिए सही डेटा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए मरीजों से संबंधित जानकारी को समय पर दर्ज करना और आवश्यकतानुसार अपडेट करना स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी में मददगार साबित होता है।

पीएसपी गतिविधियों की हुई समीक्षा

कार्यक्रम के दौरान पेशेंट सपोर्ट प्लेटफॉर्म यानी पीएसपी से जुड़ी गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। चिकित्सा अधीक्षक ने निर्देश दिया कि सभी चिन्हित फाइलेरिया मरीजों को संशोधित एमएमडीपी और फाइलेरिया दिशा-निर्देशों के अनुसार आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।

साथ ही, सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर पर फाइलेरिया मरीजों की लाइन लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए एक सप्ताह की समयसीमा निर्धारित की गई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चिन्हित मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा सके और पात्र मरीजों के दिव्यांगता कार्ड बनाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा सके।

इसके अलावा जिन आठ आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में अभी पीएसपी का गठन नहीं हुआ है, वहां भी पीएसपी गठन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

स्वास्थ्य विभाग की ओर से पीएसपी को प्रभावी बनाने के लिए समुदाय के विभिन्न वर्गों को जोड़ने पर भी जोर दिया गया। इसके तहत आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम प्रधान, पंचायत सहायक, कोटेदार, नोडल अध्यापक, फाइलेरिया मरीज और अन्य समुदाय के सदस्यों को प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना बनाई गई।

अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर समुदाय की भागीदारी बढ़ने से मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में सुविधा होगी। साथ ही, फाइलेरिया के अलावा क्षय रोग और गैर संचारी रोगों से प्रभावित लोगों तक भी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाई जा सकेगी।

इस दिशा में पीएसपी गठन को लेकर कार्ययोजना भी तैयार की गई। इसके तहत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, डीसीजी सदस्य, चिकित्सा अधिकारी, एमओ, हेल्थ एजुकेशन ऑफिसर, बीपीएम, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक और अन्य संबंधित स्वास्थ्यकर्मी सहयोग एवं समीक्षा की भूमिका निभाएंगे।

टीबी, मधुमेह और डेंगू पर भी चर्चा

कार्यशाला केवल फाइलेरिया तक सीमित नहीं रही। कार्यक्रम में क्षय रोग, गैर संचारी रोग, उच्च रक्तचाप और मधुमेह के साथ-साथ डेंगू, मलेरिया, पोषण और स्वच्छता से संबंधित विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

इसके अलावा आयुष एवं योग आधारित स्वास्थ्य गतिविधियों को भी लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई गई। स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिया गया कि समुदाय में लोगों को रोगों की रोकथाम, समय पर जांच और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जागरूक किया जाए।

इससे एक ओर जहां फाइलेरिया मुक्ति अभियान को गति देने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर अन्य संचारी और गैर संचारी रोगों की रोकथाम के लिए भी समुदाय की भागीदारी मजबूत हो सकेगी।

48 प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण

अकबरपुर में आयोजित कार्यक्रम में कुल 48 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें 13 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, 18 एएनएम, 7 संगिनी और 3 डीसीजी सदस्यों सहित अन्य संबंधित स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे। वहीं, राजपुर में आयोजित कार्यक्रम में 32 प्रतिभागियों के साथ 18 मरीजों की उपस्थिति दर्ज की गई।

कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी मारुति दीक्षित, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आईएच खान, डब्ल्यूएचओ जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. राहुल, जिला समन्वयक प्रेम सिंह कटियार, सीएफएआर प्रतिनिधि, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी, जिला समन्वयक संतोषी, एचएस नरेंद्र और एआरओ गरिमा सहित संबंधित स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।

मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की पहल

चिकित्सा अधीक्षक और जिला मलेरिया अधिकारी ने स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देशित किया कि फाइलेरिया से प्रभावित सभी चिन्हित मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जाए। इसके लिए मरीजों की लाइन लिस्ट तैयार करने और उनका नियमित फॉलोअप करने पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने एमएमडीपी के तहत रोग प्रबंधन और दिव्यांगता रोकथाम से संबंधित जानकारी भी साझा की। साथ ही, मरीजों को स्वयं की देखभाल से जुड़े आवश्यक उपायों के बारे में प्रशिक्षित करने की बात कही गई।

कार्यक्रम के दौरान एमएमडीपी का डेमोंस्ट्रेशन भी किया गया, ताकि स्वास्थ्यकर्मी व्यावहारिक रूप से संबंधित प्रक्रियाओं को समझ सकें और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकें।

फाइलेरिया मुक्ति अभियान को मजबूत करने की दिशा में कदम

कानपुर देहात में आयोजित इन प्रशिक्षण एवं समीक्षा कार्यक्रमों का उद्देश्य स्वास्थ्य तंत्र को अधिक प्रभावी बनाना और फाइलेरिया प्रभावित मरीजों को आवश्यक सेवाओं से जोड़ना है। इसके साथ ही पीएसपी के माध्यम से समुदाय की भागीदारी बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

अंततः, फाइलेरिया मुक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, स्वास्थ्यकर्मियों और समुदाय के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना गया। यदि चिन्हित मरीजों का समय पर फॉलोअप, आवश्यक प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ाव सुनिश्चित किया जाता है, तो अभियान के उद्देश्यों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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