भारत में कमजोर पड़ा मानसून? 90% हिस्से से गायब हुए बादल, बिहार में 27 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियों को लेकर मौसम विभाग के ताजा आंकड़े और सैटेलाइट तस्वीरें चिंता बढ़ा रही हैं। मौसम विभाग (IMD) की नई सैटेलाइट तस्वीरों में भारत के करीब 90 प्रतिशत हिस्से में बादलों की मौजूदगी काफी कम दिखाई दे रही है। खासतौर पर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में आसमान अपेक्षाकृत साफ नजर आ रहा है। मौसम विशेषज्ञ इसे मानसूनी गतिविधियों में कमी का संकेत मान रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर मानसून की वापसी की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है।

मौसम की इस बदलती तस्वीर के बीच देश के अलग-अलग राज्यों में परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। जहां उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां कमजोर होती नजर आ रही हैं, वहीं बिहार में कई नदियों के उफान के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। दूसरी ओर, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी बारिश से जुड़ी अलग-अलग परिस्थितियां सामने आ रही हैं।

सैटेलाइट तस्वीरों में कम हुए बादल

IMD की सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, देश के बड़े हिस्से में बादलों की मात्रा में कमी देखी जा रही है। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में यह बदलाव ज्यादा स्पष्ट है। सामान्य तौर पर मानसून के सक्रिय चरण में इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बादल दिखाई देते हैं, लेकिन वर्तमान तस्वीरों में कई इलाकों में आसमान अपेक्षाकृत साफ नजर आ रहा है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बादलों की कमी को मानसून की गतिविधि में संभावित कमजोरी के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, केवल सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर मानसून की वापसी की अंतिम घोषणा नहीं की जा सकती। इसके लिए तापमान, हवाओं की दिशा, बारिश के पैटर्न और वातावरण में नमी समेत कई मौसमी संकेतकों का अध्ययन किया जाता है।

अल नीनो से जोड़कर देखा जा रहा बदलाव

मौसम में हो रहे इस बदलाव को विशेषज्ञ अल नीनो जैसी वैश्विक मौसमी परिस्थितियों से भी जोड़कर देख रहे हैं। समुद्र की सतह के तापमान में होने वाले बदलाव का असर वैश्विक मौसम प्रणाली पर पड़ सकता है। इसका प्रभाव मानसून की तीव्रता और उसके वितरण पर भी दिखाई दे सकता है।

हालांकि, किसी एक मौसम घटना को सीधे अल नीनो का परिणाम मानना उचित नहीं होगा। मानसून पर समुद्र के तापमान, वायुमंडलीय परिसंचरण, स्थानीय मौसम प्रणालियों और अन्य वैश्विक कारकों का संयुक्त प्रभाव पड़ता है। इसलिए आने वाले दिनों के मौसम रुझानों को समझना महत्वपूर्ण होगा।

बिहार में बाढ़ से 27 लाख लोग प्रभावित

एक तरफ देश के कुछ हिस्सों में बारिश कमजोर पड़ रही है, वहीं बिहार में कई नदियों के बढ़े जलस्तर ने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती नदियों के उफान के कारण राज्य के कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के 13 जिलों में करीब 27 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ के कारण अब तक 20 से अधिक लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। प्रभावित इलाकों में प्रशासन और राहत एजेंसियों की ओर से राहत एवं बचाव कार्य किए जा रहे हैं।

सरकार की ओर से राहत शिविरों, भोजन, पेयजल और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, प्रभावित क्षेत्रों से सामने आ रही तस्वीरों के बीच राहत व्यवस्था और वास्तविक जरूरतों के बीच अंतर को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

राहत शिविरों पर बढ़ा दबाव

बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापित होने से राहत शिविरों पर दबाव बढ़ गया है। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ भोजन, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।

इसके अलावा, बाढ़ का असर स्थानीय परिवहन और रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी पड़ा है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी है।

महाराष्ट्र के अंबोली में रिकॉर्ड बारिश

महाराष्ट्र के अंबोली में भी मानसून का अलग रूप देखने को मिला है। यहां अगस्त तक 250 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज होने की जानकारी दी गई है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, सितंबर तक कुल बारिश 400 इंच तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

अंबोली लंबे समय से भारी बारिश के लिए जाना जाता है। पश्चिमी घाट की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां मानसून के दौरान काफी वर्षा होती है। इस वर्ष भी क्षेत्र में भारी बारिश का सिलसिला चर्चा में है।

हालांकि, अत्यधिक बारिश वाले क्षेत्रों में भूस्खलन, जलभराव और परिवहन संबंधी समस्याओं की आशंका बनी रहती है। इसलिए स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत होती है।

मध्य प्रदेश में 83.5 प्रतिशत बारिश का कोटा पूरा

मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 31.1 इंच बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य बारिश के आंकड़े का करीब 83.5 प्रतिशत बताया जा रहा है। भोपाल समेत राज्य के 12 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हो चुकी है।

वहीं, इतने ही जिले ऐसे हैं जहां बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। इसके बावजूद राज्य के 31 जिलों में अभी भी बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है। इससे साफ है कि मध्य प्रदेश में मानसून का वितरण समान नहीं रहा है।

एक ही राज्य के अलग-अलग जिलों में बारिश के आंकड़ों में बड़ा अंतर होने से किसानों और जल संसाधन प्रबंधन के सामने अलग-अलग चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। जहां अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में जल निकासी महत्वपूर्ण है, वहीं कम बारिश वाले जिलों में आगे की वर्षा पर निर्भरता बनी हुई है।

उत्तराखंड में बारिश के बीच हादसा

उत्तराखंड में पिछले एक सप्ताह से रुक-रुककर बारिश जारी है। इसी दौरान हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र में सोमवार देर शाम नाले का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इस दौरान दो बच्चे तेज बहाव की चपेट में आ गए।

स्थानीय लोगों की मदद से एक बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि दूसरा बच्चा बहाव के बाद लापता हो गया। उसकी तलाश के लिए अभियान जारी है। बारिश के मौसम में अचानक जलस्तर बढ़ने की घटनाएं विशेष रूप से नालों और निचले इलाकों में जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसलिए स्थानीय प्रशासन की ओर से लोगों को ऐसे स्थानों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

शिमला-किन्नौर हाईवे पर लैंडस्लाइड

हिमाचल प्रदेश में भी बारिश का असर यातायात पर दिखाई दे रहा है। शिमला-किन्नौर नेशनल हाईवे-5 पर सुबह करीब पांच बजे भारी लैंडस्लाइड हुआ। इसके साथ ही देवदार के दो से तीन बड़े पेड़ भी सड़क पर गिर गए।

लैंडस्लाइड के कारण ठियोग के जनोगघाट में हाईवे सभी वाहनों के लिए बंद हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इनमें सेब ढुलाई में लगे कई वाहन भी शामिल हैं। हाईवे बंद होने से जरूरी सेवाओं और इमरजेंसी वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

प्रशासन और संबंधित विभाग सड़क को जल्द से जल्द बहाल करने के प्रयास में जुटे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए यात्रियों को मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी जाती है।

मानसून की तस्वीर अब भी मिश्रित

देशभर के मौजूदा हालात बताते हैं कि मानसून की तस्वीर फिलहाल एक जैसी नहीं है। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में बादलों की कमी मानसून गतिविधि के कमजोर होने की ओर संकेत कर रही है, जबकि बिहार में नदियों का बढ़ा जलस्तर बाढ़ की चुनौती पैदा कर रहा है। महाराष्ट्र के अंबोली में अत्यधिक बारिश जारी है और हिमालयी राज्यों में बारिश के कारण सड़क एवं यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है।

इसलिए आने वाले दिनों में IMD के पूर्वानुमान और बारिश के आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण होंगे। मानसून की आधिकारिक वापसी कब और कहां से शुरू होती है, यह मौसमी परिस्थितियों के अगले चरण पर निर्भर करेगा। फिलहाल देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का असमान वितरण मानसून की जटिल तस्वीर को सामने रख रहा है।

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