बहराइच में नहीं थम रहा तेंदुए का खौफ – हमले से 9 वर्षीय राजवीर की हुई मौत, सुजौली क्षेत्र में बढ़ी चिंता
रिपोर्ट – महेश मिश्रा
बहराइच: जिले के कतर्नियाघाट वन्यजीव क्षेत्र से सटे सुजौली इलाके में तेंदुए के हमले की एक और घटना सामने आई है। बड़खड़िया आनंद नगर गांव में सोमवार रात नल पर पानी पीने गए नौ वर्षीय बालक राजवीर पर तेंदुए ने हमला कर दिया। हमले में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन और ग्रामीण उसे उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुजौली लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है और ग्रामीणों में तेंदुए की गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रात में नल पर पानी पीने गया था राजवीर
मिली जानकारी के अनुसार, सुजौली थाना क्षेत्र के बड़खड़िया आनंद नगर गांव निवासी नौ वर्षीय राजवीर सोमवार रात करीब साढ़े दस बजे नल पर पानी पीने गया था। इसी दौरान आसपास मौजूद तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से बच्चा घायल हो गया और उसकी आवाज सुनकर आसपास के लोग तथा परिजन मौके की ओर दौड़े।
ग्रामीणों के पहुंचने के बाद तेंदुआ वहां से चला गया। इसके बाद लोगों ने घायल राजवीर को तत्काल इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुजौली पहुंचाने की कोशिश की। स्थानीय चिकित्सकों ने बच्चे की जांच करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को भी सूचना दी गई।
घटना के बाद गांव में बढ़ी चिंता
राजवीर की मौत की खबर सामने आने के बाद बड़खड़िया आनंद नगर और आसपास के गांवों में लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कतर्नियाघाट क्षेत्र में जंगली जानवरों की गतिविधियां लगातार आबादी वाले इलाकों के आसपास देखी जा रही हैं। ऐसे में रात के समय ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत महसूस हो रही है।
दरअसल, कतर्नियाघाट वन्यजीव क्षेत्र से लगे गांवों में तेंदुओं की मौजूदगी पहले भी सामने आती रही है। पिछले कुछ समय में बहराइच के अलग-अलग इलाकों में तेंदुए के हमले और उनकी गतिविधियों से जुड़ी घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। इससे वन विभाग के सामने मानव और वन्यजीव के बीच बढ़ते संपर्क को नियंत्रित करने की चुनौती भी बनी हुई है।
घायल बच्चे को अस्पताल ले जाने में हुई परेशानी
घटना के बाद राजवीर को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, परिजनों और ग्रामीणों ने एंबुलेंस से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन तत्काल संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वाहन से बच्चे को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुजौली ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में आपात स्थिति के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और त्वरित सहायता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इन व्यवस्थागत पहलुओं पर संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
वन विभाग ने घटना का लिया संज्ञान
घटना की सूचना वन विभाग को दी गई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित ने घटना की जानकारी मिलने की पुष्टि की और टीम को मौके पर भेजे जाने की बात कही। वहीं, पुलिस ने भी मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
अब वन विभाग की प्राथमिकता तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने और ग्रामीण क्षेत्र में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की होगी। इसके साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि हमला करने वाला तेंदुआ कौन सा है और उसकी लगातार मौजूदगी किन क्षेत्रों में देखी जा रही है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं तेंदुए की घटनाएं
बहराइच के कतर्नियाघाट क्षेत्र में हाल के दिनों में तेंदुए से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं। कुछ मामलों में वन विभाग ने पिंजरे लगाकर तेंदुओं को पकड़ने में सफलता भी हासिल की है। सितंबर की शुरुआत में सुजौली बाजार टोला में भी वन विभाग ने एक तेंदुए को पिंजरे में कैद किया था। इसके अलावा जिले के अन्य इलाकों में भी तेंदुए की गतिविधियों को देखते हुए निगरानी और पिंजरे लगाने की कार्रवाई की गई है।
हालांकि, बड़खड़िया आनंद नगर की घटना के बाद ग्रामीणों की चिंता फिर बढ़ गई है। स्थानीय लोगों की मांग है कि आबादी वाले क्षेत्रों में वन विभाग की गश्त बढ़ाई जाए और तेंदुए की गतिविधियों पर प्रभावी नजर रखी जाए।
ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील जरूरी
ऐसी घटनाओं को देखते हुए वन्यजीव विशेषज्ञों और प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को सामान्य सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। विशेषकर रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचना, बच्चों को बिना निगरानी के बाहर न जाने देना और घर के आसपास पर्याप्त रोशनी रखना उपयोगी हो सकता है।
इसके अलावा, यदि किसी क्षेत्र में तेंदुआ दिखाई देता है तो ग्रामीणों को स्वयं उसे पकड़ने या उसके करीब जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसकी सूचना तत्काल वन विभाग या पुलिस को देना अधिक सुरक्षित विकल्प है।
राजवीर की मौत से परिवार में शोक
राजवीर की मौत से परिवार में शोक का माहौल है। जिस बच्चे के लिए परिजन सामान्य रात की उम्मीद कर रहे थे, वह तेंदुए के हमले के बाद वापस नहीं लौट सका। वहीं, घटना ने आसपास के ग्रामीणों को भी चिंता में डाल दिया है।
अब सभी की नजर वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर है। ग्रामीण चाहते हैं कि क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधियों की निगरानी बढ़ाई जाए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। प्रशासन और वन विभाग के समन्वित प्रयासों से ही आबादी वाले क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सकता है।

