गोला गोकर्णनाथ: हैदराबाद गौशाला से गोवंश ले जाने का आरोप, 5 पर मुकदमा; बजरंग दल ने उठाए सवाल

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रिपोर्ट- शरद अवस्थी

लखीमपुर खीरी/गोला गोकर्णनाथ: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में गोला गोकर्णनाथ क्षेत्र के हैदराबाद थाना अंतर्गत एक गौशाला से गोवंश को पिकअप वाहन में ले जाने के मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में हैदराबाद थाने में एडीओ सर्वेश कुमार की तहरीर के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।

घटना के बाद भारतीय बजरंग दल के जिलाध्यक्ष अनूप गुप्ता भी बारिश के बीच हैदराबाद थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही उन्होंने जिले की अन्य गौशालाओं की व्यवस्थाओं की भी जांच कराने की मांग उठाई है।

पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस के अनुसार, इस मामले में मैलानी थाना क्षेत्र के कुकरा निवासी शीबू, मोहम्मद एजाज और शमीम के अलावा हैदराबाद थाना क्षेत्र के मूड़ा सरकटा निवासी गौशाला कर्मचारी अंकुल तिवारी और अंकुल कुमार को आरोपी बनाया गया है। मंगलवार को सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे गोवंश खरीदने के लिए आए थे। हालांकि, वे किसके कहने पर गौशाला पहुंचे थे और उन्हें किस व्यक्ति ने भेजा था, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस ने आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की है। थानाध्यक्ष महेश पाठक के मुताबिक, अब तक आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास सामने नहीं आया है।

पिकअप में गोवंश लादने के दौरान पकड़े गए

बताया गया कि मामला सोमवार सुबह का है। हैदराबाद स्थित गौशाला में एक पिकअप वाहन खड़ा था, जिसमें गोवंश को लादे जाने की जानकारी सामने आई। इसी दौरान पंचायत सहायक अंकुर और गांव के गौरव श्रीवास्तव, अरविंद शुक्ला व रमन सोनी सहित अन्य लोगों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को देखा और संबंधित लोगों को पकड़ लिया।

इसके बाद सभी को हैदराबाद थाने ले जाया गया। सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी मामले की जांच शुरू की गई। इसी क्रम में खंड विकास अधिकारी श्रीश वर्मा की जांच के दौरान गौशाला परिसर में दो गोवंश मृत पाए गए। इसके बाद गौशाला की व्यवस्था और वहां मौजूद कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे।

चार दिन पहले सीडीओ ने किया था निरीक्षण

इस मामले को लेकर भारतीय बजरंग दल के जिलाध्यक्ष अनूप गुप्ता ने प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल रखे हैं। उनका कहना है कि जिस गौशाला में सोमवार को यह मामला सामने आया, उसका करीब चार दिन पहले मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक कुमार ने निरीक्षण किया था।

निरीक्षण के दौरान मिली कमियों के आधार पर संबंधित सचिव को निलंबित किए जाने की बात भी सामने आई थी। ऐसे में कुछ ही दिनों बाद उसी गौशाला से गोवंश को बाहर ले जाने का मामला सामने आने पर व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अनूप गुप्ता ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा गौशाला के गोवंश को खरीदकर आगे ले जाने का प्रयास किया जा रहा था और इसमें गौशाला से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

अन्य गौशालाओं की जांच की मांग

भारतीय बजरंग दल के जिलाध्यक्ष ने कहा कि यदि किसी गौशाला में इस तरह की अनियमितता सामने आती है तो प्रशासन को जिले की दूसरी गौशालाओं की व्यवस्थाओं की भी जांच करनी चाहिए। उन्होंने प्रत्येक गौशाला में गोवंश की संख्या, चारे की उपलब्धता, कर्मचारियों की भूमिका, रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि गौशालाओं में सरकारी स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं, इसलिए यह भी देखा जाना चाहिए कि गोवंश के लिए उपलब्ध संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। इसके अलावा उन्होंने गौशालाओं में नियमित निरीक्षण और निगरानी को मजबूत करने की मांग की।

चारे और व्यवस्थाओं को लेकर भी उठे सवाल

बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने गौशाला में चारे की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। अनूप गुप्ता का आरोप है कि गौशाला में उपलब्ध चारे और अन्य संसाधनों के प्रबंधन की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि गोवंश को पर्याप्त चारा और देखभाल नहीं मिल रही है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

हालांकि, चारे के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गौशाला में चारा और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था में वास्तव में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं।

पुलिस कर रही पूरे मामले की जांच

हैदराबाद थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों से पूछताछ शुरू की है। पुलिस का मुख्य फोकस इस बात पर है कि गोवंश को गौशाला से बाहर ले जाने के पीछे किसकी भूमिका थी और आरोपियों को वहां किसने भेजा था।

थानाध्यक्ष महेश पाठक के अनुसार, पकड़े गए लोगों से पूछताछ की गई है। उन्होंने गोवंश खरीदने के लिए आने की बात कही है। अब पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है कि गोवंश खरीदने का उद्देश्य क्या था और इस पूरी प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति या समूह की भूमिका तो नहीं थी।

इसके अलावा पुलिस गौशाला से जुड़े रिकॉर्ड, वहां मौजूद कर्मचारियों की भूमिका और मौके की परिस्थितियों की भी जांच कर रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गौशालाओं की निगरानी पर बढ़ा ध्यान

हैदराबाद गौशाला का मामला सामने आने के बाद जिले की गौशालाओं में निगरानी और व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। गौशालाओं में गोवंश की देखभाल, चारे की उपलब्धता, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है।

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि गौशालाओं में नियमित निरीक्षण के साथ-साथ रिकॉर्ड की पारदर्शी व्यवस्था भी जरूरी है। इससे गोवंश की वास्तविक संख्या और उनकी स्थिति की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकती है। साथ ही, यदि कहीं अनियमितता होती है तो उसकी पहचान भी समय रहते की जा सकती है।

फिलहाल हैदराबाद पुलिस की जांच जारी है। पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गौशाला से गोवंश को ले जाने के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं।

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