कानपुर के मोतीझील में पार्किंग के नाम पर हो रही कथित वसूली, नगर निगम की निगरानी पर उठे सवाल

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: शहर के प्रमुख और व्यस्त इलाकों में शामिल मोतीझील से पार्किंग के नाम पर कथित वसूली का मामला सामने आया है। तुलसी उपवन के बाहर वाहनों से पार्किंग शुल्क लिए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नगर निगम की पार्किंग व्यवस्था और निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

बताया जा रहा है कि बाबूपुरवा निवासी राजा खुद को पार्किंग स्टैंड का ठेकेदार बता रहा है। आरोप है कि तुलसी उपवन के बाहर आने-जाने वाले वाहन चालकों से पार्किंग के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है। मामले का वीडियो सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि संबंधित स्थान पर पार्किंग शुल्क वसूलने का अधिकार किसके पास है और यदि किसी व्यक्ति या संस्था को इसकी अनुमति दी गई है तो उसके दस्तावेज और निर्धारित शुल्क क्या हैं।

वायरल वीडियो के बाद बढ़ी चर्चा

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो ने मोतीझील की पार्किंग व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। वीडियो में कथित तौर पर पार्किंग के नाम पर शुल्क लिया जाता दिखाई दे रहा है। हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि किस तारीख की है, शुल्क किस आधार पर लिया जा रहा है और संबंधित व्यक्ति के पास वैध अनुमति है या नहीं, इन सभी सवालों का जवाब आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आएगा।

दरअसल, किसी भी पार्किंग स्थल पर शुल्क वसूली के लिए अधिकृत व्यवस्था और निर्धारित नियमों का होना जरूरी है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति या ठेकेदार को नगर निगम की ओर से पार्किंग संचालन की अनुमति मिली है, तो शुल्क की दर, ठेके की अवधि और संबंधित स्थान की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। इससे वाहन चालकों को भी यह स्पष्ट रहता है कि उनसे लिया जा रहा शुल्क अधिकृत है या नहीं।

नगर निगम के सामने कई सवाल

इस मामले में नगर निगम की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि यदि तुलसी उपवन के बाहर नियमित रूप से पार्किंग शुल्क लिया जा रहा था, तो संबंधित अधिकारियों की नजर इस गतिविधि पर क्यों नहीं पड़ी? वहीं, यदि वसूली अधिकृत थी तो उसके संबंध में सार्वजनिक स्तर पर स्पष्ट जानकारी क्यों दिखाई नहीं देती?

हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि केवल वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति या अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। इसके लिए पार्किंग ठेके से संबंधित दस्तावेज, अनुमति पत्र, शुल्क की दर और मौके पर मौजूद व्यवस्था की जांच आवश्यक होगी।

नगर निगम की ओर से जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित व्यक्ति को पार्किंग संचालन की अनुमति मिली थी या नहीं। यदि अनुमति नहीं थी और शुल्क वसूला जा रहा था, तो नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

मोतीझील में पार्किंग व्यवस्था पहले भी रही है चर्चा में

मोतीझील क्षेत्र में पार्किंग व्यवस्था कोई नया विषय नहीं है। उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों में कानपुर में पार्किंग सुविधाओं के विकास और मोतीझील क्षेत्र में पार्किंग व्यवस्था से जुड़े प्रस्तावों का उल्लेख मिलता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत कानपुर एक्शन प्लान में मोतीझील में पार्किंग सुविधा के लिए डीपीआर तैयार किए जाने की जानकारी भी दर्ज है।

इसके अलावा, वर्ष 2025 में कानपुर शहर के लिए चिन्हित पार्किंग स्थलों की सूची में मोतीझील परिसर, राजीव वाटिका के आसपास, कारगिल पार्क के आसपास और तुलसी उपवन के बाहर जैसे स्थानों का भी उल्लेख किया गया था।

यानी क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक स्तर पर पहले से काम होता रहा है। ऐसे में वर्तमान आरोप सामने आने के बाद संबंधित पार्किंग स्थल की वास्तविक स्थिति और अधिकृत संचालन की जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण हो जाता है।

पार्किंग शुल्क की पारदर्शिता जरूरी

पार्किंग शुल्क लेने की व्यवस्था में पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण होती है। वाहन चालक को यह जानकारी होनी चाहिए कि वह किस संस्था या ठेकेदार को शुल्क दे रहा है, शुल्क की निर्धारित दर क्या है और उसे भुगतान की रसीद मिल रही है या नहीं। इससे किसी भी तरह के विवाद की स्थिति में रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है।

कानपुर नगर निगम द्वारा अलग-अलग जोन में पार्किंग शुल्क या यूजर चार्ज की दैनिक वसूली के लिए टेंडर जारी किए जाते रहे हैं। उदाहरण के तौर पर नगर निगम के जोन-1 से संबंधित टेंडर में पार्किंग शुल्क/यूजर चार्ज की दैनिक वसूली के लिए पांच वर्ष की अवधि का उल्लेख किया गया है।

इसलिए मोतीझील के तुलसी उपवन क्षेत्र में वायरल वीडियो के आधार पर उठे सवालों का जवाब भी संबंधित ठेका दस्तावेजों और मौके की जांच से ही स्पष्ट होगा।

जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

फिलहाल यह मामला आरोपों और वायरल वीडियो तक सीमित है। न तो वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि हुई है और न ही यह आधिकारिक रूप से सामने आया है कि वीडियो में दिखाई दे रही वसूली वैध पार्किंग शुल्क के तहत थी या कथित तौर पर बिना अनुमति की जा रही थी।

ऐसे में संबंधित अधिकारियों के लिए जरूरी होगा कि वे मौके का निरीक्षण करें और पार्किंग संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच करें। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति को अधिकृत रूप से पार्किंग संचालन की जिम्मेदारी दी गई है तो उसका नाम, ठेका अवधि, स्थान और शुल्क दर जैसी जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है।

दूसरी ओर, यदि जांच में अनधिकृत वसूली की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे वाहन चालकों में भी यह भरोसा कायम होगा कि सार्वजनिक स्थानों पर पार्किंग शुल्क की व्यवस्था स्पष्ट और पारदर्शी है।

अब नगर निगम की कार्रवाई पर नजर

मोतीझील में पार्किंग के नाम पर कथित वसूली का मामला सामने आने के बाद अब नगर निगम की कार्रवाई पर लोगों की नजर है। सबसे अहम सवाल यही है कि तुलसी उपवन के बाहर पार्किंग शुल्क वसूली के लिए कोई वैध अनुमति या ठेका मौजूद है या नहीं।

यदि अनुमति है तो उसका विवरण और निर्धारित शुल्क सार्वजनिक होना चाहिए। वहीं, यदि वसूली अनधिकृत पाई जाती है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल वायरल वीडियो की सत्यता और पार्किंग संचालन से जुड़े दस्तावेजों की आधिकारिक जांच का इंतजार है।

इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मोतीझील में पार्किंग शुल्क किस नियम के तहत लिया जा रहा था और संबंधित व्यवस्था के लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है। तब तक वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों को जांच का विषय मानना ही उचित होगा।

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