कान्हा माखन पब्लिक स्कूल में ‘बोधि पथ कार्यशाला’ का समापन, बच्चों ने सिंगल-यूज प्लास्टिक छोड़ने का लिया संकल्प
रिपोर्ट – योगेश भटद्वाज
मथुरा: पर्यावरण संरक्षण, नैतिक शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्थानीय कान्हा माखन पब्लिक स्कूल में आयोजित ‘बोधि पथ कार्यशाला’ का भव्य समापन हुआ।
कार्यशाला के अंतिम दिन विद्यार्थियों को सिंगल-यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों, पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता तथा प्रकृति के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए यह संकल्प लिया कि वे अपने दैनिक जीवन में सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।
यह कार्यशाला केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें महात्मा बुद्ध के जीवन-दर्शन, प्रकृति के प्रति उनके विचार और नैतिक मूल्यों को भी विद्यार्थियों के समक्ष सरल एवं प्रेरणादायक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
वक्ताओं ने बच्चों को समझाया कि यदि छोटी-छोटी आदतों में सकारात्मक बदलाव लाया जाए, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़े परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण का दिया गया व्यावहारिक संदेश
कार्यशाला के अंतिम सत्र में मुख्य वक्ता सीमा शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया प्लास्टिक प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक, विशेषकर बच्चों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।
यदि विद्यार्थी अभी से पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे अपने घरों, विद्यालय और आसपास के लोगों को भी प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करें और पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करें।
महात्मा बुद्ध के जीवन-दर्शन से मिली प्रेरणा
कार्यक्रम के दौरान सीमा शर्मा ने महात्मा बुद्ध के जीवन और उनके विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि बुद्ध का दर्शन केवल आध्यात्मिक उन्नति तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने का भी स्पष्ट संदेश मिलता है।
उन्होंने कहा कि महात्मा बुद्ध ने अपने जीवन में करुणा, अहिंसा, सादगी और प्रकृति के प्रति सम्मान का मार्ग अपनाया।
यही कारण है कि आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट का सामना कर रही है, तब बुद्ध के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक दिखाई देते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि प्रकृति की रक्षा करना केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सिंगल-यूज प्लास्टिक के नुकसान से कराया गया अवगत
कार्यशाला में विद्यार्थियों को सिंगल-यूज प्लास्टिक के कारण पर्यावरण, जल स्रोतों, वन्यजीवों और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई।
उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया कि प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, जल निकासी को बाधित करता है और लंबे समय तक नष्ट नहीं होता।
इसके साथ ही यह भी बताया गया कि प्लास्टिक कचरे के कारण नदियां, तालाब और समुद्री जीव भी प्रभावित होते हैं। इसलिए प्लास्टिक का उपयोग कम करना समय की आवश्यकता है।
विद्यार्थियों ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक क्षण वह रहा, जब सभी छात्र-छात्राओं ने सामूहिक रूप से पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे—
- दैनिक जीवन में सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे।
- बाजार जाते समय हमेशा कपड़े या जूट का थैला साथ लेकर जाएंगे।
- प्लास्टिक की बोतलों और टिफिन के स्थान पर स्टील की बोतल एवं स्टील के टिफिन का उपयोग करेंगे।
- स्वयं भी प्लास्टिक से दूरी बनाए रखेंगे और परिवार तथा मित्रों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।
- स्वच्छ और हरित वातावरण बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
इस सामूहिक संकल्प ने कार्यक्रम को और अधिक प्रेरणादायक बना दिया।
छोटी आदतों से बड़े बदलाव संभव
वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हमेशा बड़े अभियानों की आवश्यकता नहीं होती। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी दैनिक आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करे, तो समाज में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है।
उदाहरण के लिए कपड़े के थैले का उपयोग, पुनः उपयोग योग्य बोतलों और टिफिन का प्रयोग तथा प्लास्टिक कचरे का उचित प्रबंधन जैसे कदम पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
विद्यार्थियों में दिखा उत्साह
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं भी साझा कीं और भविष्य में ऐसे अभियानों का हिस्सा बनने की इच्छा व्यक्त की।
शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे विद्यालय के साथ-साथ अपने घर और समाज में भी पर्यावरण जागरूकता फैलाने का प्रयास करें।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के समापन अवसर पर कार्यशाला के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तथा सक्रिय सहभागिता निभाने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद बच्चों के चेहरे पर उत्साह और आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि इस प्रकार के सम्मान से विद्यार्थियों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है और वे सामाजिक विषयों में अधिक रुचि लेते हैं।
पर्यावरण शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय स्तर पर पर्यावरण शिक्षा को व्यवहारिक गतिविधियों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
इससे विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वास्तविक जीवन में भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाते हैं।
‘बोधि पथ कार्यशाला’ जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिक मूल्यों और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझाने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।
कान्हा माखन पब्लिक स्कूल में आयोजित ‘बोधि पथ कार्यशाला’ का समापन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की सार्थक पहल साबित हुआ।
महात्मा बुद्ध के जीवन-दर्शन से प्रेरणा लेते हुए बच्चों ने सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने और समाज को जागरूक बनाने का संकल्प लिया।
ऐसे कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक होते हैं, बल्कि एक स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

