एस.एन.सेन पीजी कॉलेज कानपुर में ‘एक पुस्तक पढ़ें’ अभियान: छात्राओं में पठन संस्कृति को बढ़ावा देने पर दिया जोर

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी

कानपुर: विद्यार्थियों में पुस्तक पढ़ने की आदत विकसित करने, ज्ञान के दायरे को विस्तृत करने और अध्ययन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सोमवार, 6 जुलाई 2026 को एस.एन. सेन बालिका विद्यालय पी.जी. कॉलेज, कानपुर में ‘एक पुस्तक पढ़ें’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम महाविद्यालय की पुस्तकालय समिति के तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को पुस्तकों के प्रति आकर्षित करना, उनमें अध्ययन की निरंतरता बनाए रखना तथा ज्ञान और चिंतन की संस्कृति को मजबूत करना था।

यह आयोजन माननीय कुलाधिपति एवं राज्यपाल की प्रेरणा तथा माननीय कुलपति के मार्गदर्शन में संचालित पठन संस्कृति संवर्धन अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या, विभिन्न विभागों की विभागाध्यक्षों, प्रवक्ताओं तथा छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि बदलते डिजिटल दौर में भी पुस्तकें ज्ञान का सबसे विश्वसनीय और स्थायी स्रोत हैं।

छात्राओं में पठन संस्कृति विकसित करने का प्रयास

कार्यक्रम की शुरुआत पुस्तक पठन के महत्व पर चर्चा के साथ हुई। वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकें केवल परीक्षा की तैयारी का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे व्यक्तित्व विकास, तार्किक सोच, रचनात्मकता और सामाजिक समझ को भी मजबूत बनाती हैं। इसी उद्देश्य से ‘एक पुस्तक पढ़ें’ अभियान को छात्राओं के बीच लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि नियमित पुस्तक पठन से भाषा कौशल में सुधार होता है, अभिव्यक्ति बेहतर बनती है और नई-नई जानकारियों से परिचित होने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और विश्लेषणात्मक क्षमता का भी विकास होता है।

प्राचार्या प्रो. सुमन ने पुस्तकों के महत्व पर दिया जोर

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुमन ने अपने संबोधन में कहा कि “ज्ञान का जो बढ़ता ग्राफ है, उसमें किताबों का ही हाथ है।” उन्होंने कहा कि पुस्तकें केवल जानकारी का स्रोत नहीं होतीं, बल्कि वे जीवन को नई दिशा देने का माध्यम भी बनती हैं।

अच्छी पुस्तकों का अध्ययन व्यक्ति के विचारों को परिपक्व बनाता है और उसे समाज के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है।

उन्होंने छात्राओं से साहित्य, विज्ञान, कला, इतिहास, दर्शन और समकालीन विषयों से संबंधित पुस्तकों का नियमित अध्ययन करने का आग्रह किया।

इसके अलावा उन्होंने भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की प्रेरणादायक पुस्तकों तथा रामायण के विभिन्न अनुवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी पुस्तकें जीवन मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक सोच को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्राचार्या ने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संदर्भ पुस्तकों और शोधपरक साहित्य का भी अध्ययन करना चाहिए, ताकि उनका बौद्धिक विकास व्यापक रूप से हो सके।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी उपयोगी हैं पुस्तकें

पुस्तकालय समिति की प्रभारी एवं दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष श्रीमती किरण ने छात्राओं को पुस्तक पठन की नियमित आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में उपलब्ध विभिन्न विषयों की पुस्तकें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

उन्होंने बताया कि यदि विद्यार्थी नियमित रूप से पुस्तकालय का उपयोग करें और विषय से संबंधित पुस्तकों का अध्ययन करें, तो उनकी सामान्य ज्ञान, विषय ज्ञान और विश्लेषण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

साथ ही उन्होंने छात्राओं से पुस्तकालय की सुविधाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।

पुस्तकें होती हैं जीवन की सच्ची मित्र

समाजशास्त्र विभाग की प्रवक्ता डॉ. रेनू कुरिल ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि पुस्तकें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं।

उन्होंने कहा कि पुस्तकें कठिन परिस्थितियों में भी सही मार्गदर्शन देती हैं और व्यक्ति को सकारात्मक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतिदिन कुछ समय पुस्तक पढ़ने की आदत विकसित करने का आग्रह किया।

उनके अनुसार नियमित अध्ययन से न केवल ज्ञान में वृद्धि होती है, बल्कि व्यक्तित्व भी अधिक संतुलित और प्रभावशाली बनता है।

मनोविज्ञान और साहित्य से जोड़ा गया पुस्तक पठन

मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका सहाय ने पुस्तक पठन को मानसिक विकास और मनोवैज्ञानिक समझ से जोड़ते हुए कहा कि अच्छी पुस्तकों का अध्ययन तनाव को कम करने और सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायक होता है।

उन्होंने बताया कि पढ़ने की आदत एकाग्रता, स्मरण शक्ति और निर्णय क्षमता को भी मजबूत बनाती है।

वहीं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. कोमल सरोज ने साहित्य की विभिन्न विधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्यिक पुस्तकें समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को समझने का प्रभावी माध्यम हैं।

उन्होंने छात्राओं को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं के साहित्य का अध्ययन करने की सलाह दी।

शिक्षकों ने निभाई सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम के सफल संचालन में महाविद्यालय के शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. रोली मिश्रा ने किया। वहीं डॉ. पूजा गुप्ता, डॉ. रेशमा तथा डॉ. श्वेता रानी ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया।

इसके अतिरिक्त महाविद्यालय की कुलानुशासक कैप्टन ममता अग्रवाल, प्रो. निशा वर्मा, प्रो. प्रीति पाण्डेय, प्रो. मीनाक्षी व्यास, डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. शुभा बाजपेयी सहित सभी शिक्षिकाओं ने कार्यक्रम में सहभागिता कर छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।

डिजिटल युग में पुस्तकों का महत्व बना हुआ है

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि आज इंटरनेट और डिजिटल संसाधनों के विस्तार के बावजूद पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है।

डिजिटल माध्यम जानकारी तक त्वरित पहुंच उपलब्ध कराते हैं, लेकिन पुस्तकें किसी विषय की गहराई से समझ विकसित करने में अधिक सहायक होती हैं।

उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी डिजिटल संसाधनों और पुस्तकों दोनों का संतुलित उपयोग करें, तो उनकी शिक्षा अधिक प्रभावी और समृद्ध बन सकती है।

पठन संस्कृति से होगा समग्र विकास

विशेषज्ञों का मानना है कि पढ़ने की आदत केवल शैक्षणिक सफलता तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह व्यक्ति के बौद्धिक, सामाजिक और नैतिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नियमित अध्ययन से भाषा कौशल बेहतर होता है, विचारों में स्पष्टता आती है और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित होती है।

इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ‘एक पुस्तक पढ़ें’ जैसे अभियान विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

एस.एन. सेन बालिका विद्यालय पी.जी. कॉलेज, कानपुर में आयोजित ‘एक पुस्तक पढ़ें’ कार्यक्रम ने छात्राओं को पुस्तकों के महत्व से अवगत कराने के साथ-साथ पठन संस्कृति को मजबूत करने का सार्थक संदेश दिया।

कार्यक्रम में शिक्षकों ने ज्ञान, साहित्य, विज्ञान, मनोविज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से पुस्तक पठन के महत्व को विस्तार से समझाया। ऐसे आयोजन न केवल विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं, बल्कि उन्हें आजीवन सीखने की संस्कृति अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित करते हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं, तो विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि और ज्ञानार्जन की भावना को और अधिक बल मिलेगा।

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