कानपुर के प्रेम मंदिर परिवार ने किया साप्ताहिक सुंदरकांड पाठ: बाल सेना की भक्ति में गूंजा हनुमान चालीसा

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Digital UP News Desk 

कानपुर: प्रेम मंदिर परिवार द्वारा प्रत्येक शनिवार सायंकाल आयोजित होने वाले भक्ति कार्यक्रम ने इस बार भी श्रद्धा और आस्था का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर बालाजी महाराज के अनन्य भक्तों एवं बाल सेना के सक्रिय सदस्यों द्वारा संगीतमय सुंदरकांड पाठ, श्री हनुमान चालीसा और आरती का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह भक्ति रस में डूबा हुआ था, जहां भजनों की मधुर ध्वनि और हनुमान चालीसा के उच्चारण से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। जैसे-जैसे सुंदरकांड का पाठ आगे बढ़ा, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की भक्ति भी और अधिक गहरी होती चली गई।

मुख्य अतिथि का भव्य स्वागत

इस अवसर पर प्रेम मंदिर परिवार के संरक्षक एवं कोऑपरेटिव स्टेट दादानगर के चेयरमैन आदरणीय विजय कपूर जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके आगमन पर आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम समिति की ओर से पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए उन्हें पगड़ी और पटका पहनाकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल एक औपचारिकता थी, बल्कि सनातन संस्कृति और परंपराओं के प्रति आस्था का प्रतीक भी था।

सुंदरकांड पाठ को निरंतर जारी रखने का अनुरोध

मुख्य अतिथि विजय कपूर जी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयोजकों और भक्तों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संदेश देते हैं।

उन्होंने विशेष रूप से यह अनुरोध किया कि जो सुंदरकांड पाठ की परंपरा आरंभ की गई है, उसे निरंतर जारी रखा जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इससे प्रेरणा ले सकें। इसके साथ ही उन्होंने हर आयोजन में अपनी सहभागिता का आश्वासन दिया और सभी भक्तों को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

उन्होंने आगे कहा कि सनातन धर्म की संस्कृति और परंपराएं केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह जीवन जीने की एक प्रेरणादायक शैली भी हैं, जो समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं।

बाल सेना और भक्तों की सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम में बालाजी जागरण मंडल और बाल सेना के सदस्यों की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया और भक्ति भाव को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मंच संचालन से लेकर भजन प्रस्तुति तक सभी गतिविधियां अनुशासन और समर्पण के साथ संपन्न हुईं। बाल सेना के सदस्यों ने यह साबित किया कि युवा पीढ़ी भी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में पूरी तरह सक्षम है।

प्रमुख उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस भव्य आयोजन में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे जिन्होंने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इनमें प्रमुख रूप से मनीष शर्मा, लव दुबे, विजय सिंह (बालाजी जागरण मंडल), अजय श्रीवास्तव, इशांत साहू, योगेश शुक्ला, मुकेश बाजपेयी, प्रहलाद दुबे, आलोक मिश्रा, ओम गुप्ता, अंश, सुरजीत, कृष्ण गोपाल गुप्ता, अभिषेक, सत्येंद्र अवस्थी, पीयूष सिंह, राघव झा, किरमानी तिवारी, वंश तिवारी, डॉ. हरिशंकर गुप्ता, अनिल गुप्ता, शैलजा भटनागर, सांत्वना शर्मा, प्रीति शुक्ला, लक्ष्मी, रश्मि दुबे, किरण सिंह, पुष्पा सिंह, पूनम तिवारी, दीपिका सिंह, आनवी तिवारी और अनुष्का सिंह सहित कई श्रद्धालु शामिल रहे।

सभी ने सामूहिक रूप से सुंदरकांड पाठ में भाग लिया और भक्ति भाव से वातावरण को और अधिक पवित्र बना दिया।

आयोजन का उद्देश्य और सामाजिक संदेश

प्रेम मंदिर परिवार द्वारा आयोजित इस साप्ताहिक कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में धार्मिक जागरूकता फैलाना और युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ना है। आज के समय में जब आधुनिकता के प्रभाव में पारंपरिक मूल्य कहीं न कहीं कमजोर हो रहे हैं, ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।

इसके अतिरिक्त यह कार्यक्रम सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है, जहां विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोग एक साथ आकर भक्ति और श्रद्धा में लीन होते हैं।

भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम

कार्यक्रम में संगीतमय सुंदरकांड पाठ ने सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। ढोल-नगाड़ों, हारमोनियम और भजनों की मधुर ध्वनि ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

हनुमान चालीसा के सामूहिक उच्चारण के दौरान उपस्थित लोगों में विशेष ऊर्जा और उत्साह देखा गया। आरती के समय दीपों की रोशनी और घंटियों की ध्वनि ने पूरे आयोजन को दिव्य अनुभव में बदल दिया।

आयोजकों का योगदान

मनीष शर्मा, जो इस कार्यक्रम के व्यवस्थापक हैं, ने बताया कि प्रेम मंदिर परिवार का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मकता और संस्कारों का विस्तार करना भी है।

उन्होंने सभी सहयोगियों और भक्तों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम आगे भी निरंतर जारी रहेंगे और इसे और अधिक भव्य रूप दिया जाएगा।

कानपुर का यह सुंदरकांड और हनुमान चालीसा पाठ आयोजन न केवल एक धार्मिक कार्यक्रम था, बल्कि यह आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक भी बनकर सामने आया। बाल सेना और भक्तों की सक्रिय भागीदारी ने इसे और भी विशेष बना दिया।

इस प्रकार के आयोजन समाज में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। आने वाले समय में भी ऐसे कार्यक्रमों से सनातन संस्कृति को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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