कानपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ा, बैराज पर चेतावनी बिंदु पार; खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा पानी

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रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी

कानपुरः कानपुर में सावन की विदाई की अंतिम बेला के बीच गंगा नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। गंगा बैराज पर नदी चेतावनी बिंदु पार कर चुकी है और अब धीरे-धीरे खतरे के निशान की ओर बढ़ रही है। जलस्तर बढ़ने के कारण गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से नदी के आसपास की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

बुधवार को गंगा बैराज की अपस्ट्रीम पर जलस्तर 114.220 मीटर और डाउनस्ट्रीम पर 114.070 मीटर दर्ज किया गया। वहीं, शुक्लागंज गेज पर गंगा का जलस्तर 112.750 मीटर तक पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि शुक्लागंज गेज पर नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब 25 सेंटीमीटर की दूरी पर है। ऐसे में जलस्तर में आगे होने वाली बढ़ोतरी को लेकर तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

लगातार बढ़ रहा गंगा का प्रवाह

गंगा के जलस्तर में वृद्धि के बीच बैराज से भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। बुधवार को गंगा बैराज से 3,61,440 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। पानी के इस प्रवाह का असर नदी के आसपास के क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। हालांकि, वर्तमान स्थिति में लोगों से घबराने के बजाय सावधानी और सतर्कता बनाए रखने की अपील की जा रही है।

गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने का सीधा प्रभाव नदी के किनारे बसे इलाकों पर पड़ता है। विशेष रूप से निचले क्षेत्रों में पानी के पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए स्थानीय स्तर पर नदी के किनारे आवागमन, पशुओं को नदी के पास ले जाने और अन्य गतिविधियों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है।

शुक्लागंज में भी बढ़ी निगरानी

शुक्लागंज गेज पर जलस्तर 112.750 मीटर दर्ज किया गया है। यहां नदी चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच चुकी है। जलस्तर और बढ़ने की स्थिति में तटवर्ती इलाकों में निगरानी और बढ़ाई जा सकती है। नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि गंगा के प्रवाह में थोड़े समय के भीतर बदलाव देखने को मिल सकता है।

स्थानीय लोगों के लिए यह समय विशेष सतर्कता बरतने का है। खासकर वे परिवार जो नदी के बिल्कुल नजदीक या निचले इलाकों में रहते हैं, उन्हें जलस्तर में होने वाले बदलाव की जानकारी लेते रहना चाहिए। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से जारी होने वाली किसी भी सलाह या निर्देश का पालन करना आवश्यक है।

बैराज की अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम स्थिति

गंगा बैराज की अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम स्थिति भी नदी के बढ़ते प्रवाह को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। बुधवार को अपस्ट्रीम में जलस्तर 114.220 मीटर और डाउनस्ट्रीम में 114.070 मीटर दर्ज किया गया। दोनों स्थानों पर जलस्तर ऊंचा बना हुआ है।

इसके अलावा बैराज से 3,61,440 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से नदी के प्रवाह पर भी असर पड़ रहा है। पानी की इतनी बड़ी मात्रा छोड़े जाने के बाद तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी आवश्यक हो जाती है। इसलिए संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे जलस्तर में होने वाले बदलावों की जानकारी समय पर स्थानीय लोगों तक पहुंचाएं।

तटवर्ती क्षेत्रों में सावधानी जरूरी

गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। नदी के किनारे अनावश्यक रूप से जाने से बचना बेहतर होगा। वहीं, बच्चों और बुजुर्गों को नदी के आसपास जाने से रोकना भी जरूरी है।

इसके साथ ही खेतों, कच्चे रास्तों और निचले इलाकों में पानी के संभावित असर पर भी नजर रखनी होगी। यदि जलस्तर में और बढ़ोतरी होती है तो ऐसे क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हो सकता है। इसलिए स्थानीय लोगों को पहले से ही जरूरी सावधानियां बरतने की आवश्यकता है।

जलस्तर बढ़ने की वजह से बढ़ी चिंता

सावन की विदाई के समय गंगा के प्रवाह में तेजी देखी जा रही है। नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु पार करने के बाद खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, केवल जलस्तर बढ़ने के आधार पर किसी बड़े खतरे की स्थिति मानना उचित नहीं है। स्थिति लगातार बदल सकती है और वास्तविक स्थिति जलस्तर की आगे की प्रवृत्ति पर निर्भर करेगी।

यही वजह है कि प्रशासनिक स्तर पर नदी की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है। जलस्तर के आंकड़ों को नियमित रूप से दर्ज करने के साथ-साथ बैराज से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा पर भी नजर रखना जरूरी है।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

गंगा नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन या संबंधित विभागों से मिलने वाली आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। यदि जलस्तर में तेजी से वृद्धि होती है, तो स्थानीय स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

इसके अलावा नदी के किनारे बने घाटों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। जलस्तर बढ़ने के दौरान नदी में उतरना या तेज बहाव वाले स्थानों के करीब जाना जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसलिए लोगों को सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

आगे भी जलस्तर पर रहेगी नजर

फिलहाल कानपुर गंगा बैराज और शुक्लागंज क्षेत्र में गंगा के जलस्तर पर निगरानी बनाए रखना महत्वपूर्ण है। बुधवार के आंकड़ों के अनुसार गंगा चेतावनी बिंदु पार कर चुकी है और खतरे के निशान की ओर बढ़ रही है। बैराज से 3,61,440 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण आने वाले समय में नदी के प्रवाह में होने वाले बदलाव पर भी नजर रखनी होगी।