कानपुर नगर निगम टेंडर अनियमितता मामले में एसआईटी जांच, भुगतान और फर्म रजिस्ट्रेशन की फाइलें खंगाली
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: नगर निगम में सामने आए कथित टेंडर अनियमितता मामले की जांच अब एसआईटी ने तेज कर दी है। इसी क्रम में प्रभारी एडीसीपी डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में एसआईटी की टीम नगर निगम कार्यालय पहुंची। टीम ने मुख्य अभियंता कार्यालय में पहुंचकर टेंडर प्रक्रिया, भुगतान और फर्म रजिस्ट्रेशन से जुड़ी विभिन्न फाइलों की जांच शुरू की।
जांच के दौरान टीम ने संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन किया और आवश्यक रिकॉर्ड जुटाए। वहीं, गोविंद शर्मा से संबंधित कैला देवी भुगतान मामले के दस्तावेजों में कुछ कथित कमियां सामने आने की जानकारी भी मिली है। एसआईटी ने जांच के दौरान संदिग्ध माने जा रहे दस्तावेजों की तस्वीरें भी अपने रिकॉर्ड के लिए लीं।
फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और जिम्मेदारी से जुड़े तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे।
नगर निगम पहुंची एसआईटी की टीम
टेंडर से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के लिए एसआईटी की टीम नगर निगम पहुंची। टीम का नेतृत्व प्रभारी एडीसीपी डॉ. अर्चना सिंह ने किया। नगर निगम पहुंचने के बाद अधिकारियों ने मुख्य अभियंता कार्यालय में संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की।
जांच का मुख्य फोकस टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ भुगतान और फर्म रजिस्ट्रेशन से संबंधित रिकॉर्ड पर रहा। टीम ने संबंधित फाइलों को देखा और उनमें दर्ज विवरणों का परीक्षण किया।
इस दौरान अधिकारियों ने दस्तावेजों की प्रक्रिया, उपलब्ध रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़े कागजातों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया। जांच में सामने आने वाले तथ्यों को एसआईटी अपने स्तर पर दर्ज कर रही है।
भुगतान और फर्म रजिस्ट्रेशन की फाइलों की जांच
एसआईटी ने मुख्य अभियंता कार्यालय में मौजूद भुगतान और फर्म रजिस्ट्रेशन से जुड़ी फाइलों को जांच के दायरे में लिया। टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई है या नहीं, इसे स्पष्ट करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।
इसके अलावा, फर्म से जुड़े दस्तावेजों और पंजीकरण की प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियों को समझने का प्रयास किया जा रहा है।
जांच के दौरान किसी दस्तावेज में जानकारी संदिग्ध या अधूरी पाए जाने पर उसे भी रिकॉर्ड में शामिल किया जा रहा है। इसी क्रम में टीम ने कुछ दस्तावेजों की तस्वीरें भी लीं।
कैला देवी भुगतान दस्तावेजों में मिली कमियां
जांच के दौरान गोविंद शर्मा की कैला देवी से जुड़े भुगतान संबंधी दस्तावेजों में कथित तौर पर कुछ कमियां मिलने की जानकारी सामने आई है। एसआईटी ने संबंधित दस्तावेजों को भी जांच के दायरे में रखा है।
हालांकि, इन कमियों की प्रकृति और उनका टेंडर प्रक्रिया से क्या संबंध है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल एसआईटी दस्तावेजों का परीक्षण कर रही है और संबंधित रिकॉर्ड को एकत्र किया जा रहा है।
जांच एजेंसी दस्तावेजों में दर्ज जानकारी का आपस में मिलान कर रही है। इसके आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि टेंडर और भुगतान प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार हुई थी या नहीं।
संदिग्ध दस्तावेजों की फोटो ली
एसआईटी टीम ने जांच के दौरान कुछ ऐसे दस्तावेजों की तस्वीरें भी लीं, जिन्हें जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन दस्तावेजों को आगे की जांच में संदर्भ के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
दस्तावेजों की फोटो लेने के साथ ही टीम ने रिकॉर्ड में उपलब्ध अन्य संबंधित कागजातों का भी अवलोकन किया। इस तरह जांच टीम मामले से जुड़े अधिक से अधिक दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने में लगी है।
एसआईटी की जांच का उद्देश्य उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले की वास्तविक स्थिति को समझना है। इसलिए टेंडर से लेकर भुगतान और फर्म रजिस्ट्रेशन तक की प्रक्रिया की अलग-अलग स्तर पर पड़ताल की जा रही है।
मुख्य अभियंता कार्यालय में मौजूद रहे अधिकारी
एसआईटी की जांच के दौरान नगर निगम के मुख्य अभियंता कार्यालय में कई संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। इनमें मुख्य अभियंता एसएफए जैदी, अधिशाषी अभियंता दिवाकर भास्कर और आरके सिंह शामिल रहे।
अधिकारियों की मौजूदगी में एसआईटी ने संबंधित फाइलों और दस्तावेजों का परीक्षण किया। जांच टीम की ओर से मांगे गए रिकॉर्ड और जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी इसी दौरान आगे बढ़ी।
नगर निगम से जुड़े अधिकारियों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि टेंडर प्रक्रिया, भुगतान और फर्म रजिस्ट्रेशन से संबंधित जानकारी इन्हीं अभिलेखों में दर्ज होती है।
टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर फोकस
टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना किसी भी सरकारी संस्था के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण अहम हो जाता है।
एसआईटी की टीम इसी उद्देश्य से टेंडर से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। इसके साथ ही भुगतान प्रक्रिया और संबंधित फर्म के पंजीकरण से जुड़े रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया जा रहा है।
यदि दस्तावेजों में कोई अंतर या अनियमितता सामने आती है तो उसकी परिस्थितियों और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के बाद किया जाएगा। फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर
नगर निगम में हुई एसआईटी की यह जांच मामले से जुड़े दस्तावेजी तथ्यों को सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टीम ने जिस तरह भुगतान, फर्म रजिस्ट्रेशन और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड को जांच में शामिल किया है, उससे मामले की विभिन्न कड़ियों की पड़ताल की जा रही है।
वहीं, कैला देवी से संबंधित भुगतान दस्तावेजों में मिली कथित कमियों को भी जांच के दौरान देखा जा रहा है। इन दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति और उनका मामले से संबंध जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट हो सकेगा।
एसआईटी द्वारा लिए गए दस्तावेजों के फोटो और अन्य रिकॉर्ड भी आगे की जांच में उपयोग किए जा सकते हैं। इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों या अन्य लोगों से जानकारी ली जा सकती है।
दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ेगी जांच
जांच में दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण आधार माने जा रहे हैं। इसलिए एसआईटी ने पहले चरण में कार्यालयी रिकॉर्ड और संबंधित फाइलों की जांच पर जोर दिया है।
टेंडर जारी होने से लेकर फर्म के पंजीकरण और भुगतान तक की प्रक्रिया में कौन-कौन से दस्तावेज तैयार हुए, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही रिकॉर्ड में दर्ज विवरणों का मिलान किया जा रहा है।
इस प्रक्रिया के बाद यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या दस्तावेजों में गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।
फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है। इसलिए मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित तथ्यों की पुष्टि के बाद ही सामने आएगा। नगर निगम से जुड़े टेंडर और भुगतान रिकॉर्ड की जांच के बाद पूरे प्रकरण की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

