कानपुर में 15 साल से फरार 50 हजार का इनामी गिरफ्तार, छह नामों से पुलिस को दे रहा था चकमा – जानिए कौन है यह?

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रिपोर्ट – मुकेश वर्मा 

कानपुर: थाना बर्रा पुलिस और दक्षिण जोन की सर्विलांस टीम ने लंबे समय से फरार चल रहे एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पर ₹50 हजार का इनाम घोषित था और वह करीब 15 वर्षों से गिरफ्तारी से बच रहा था। पुलिस ने उसे रामादेवी चौराहे के पास से गिरफ्तार किया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग नाम और फर्जी पते इस्तेमाल करता था। जांच में उसके छह अलग-अलग नाम और पतों का इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने से जुड़े करीब 17 मुकदमे दर्ज बताए गए हैं।

15 वर्षों से पुलिस को थी तलाश

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्त वर्ष 2009 से संबंधित मामलों में वांछित चल रहा था। मामला दर्ज होने के बाद उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपनी पहचान और ठिकाने बदलने का प्रयास किया।

इस दौरान वह अलग-अलग शहरों में रहकर पुलिस की नजर से बचता रहा। लंबे समय तक गिरफ्तारी न होने के कारण पुलिस ने उसकी तलाश जारी रखी और उसके संबंध में उपलब्ध सूचनाओं को लगातार अपडेट किया।

बर्रा थाने से संबंधित इस मामले में आरोपी पर ₹50 हजार का इनाम घोषित किया गया था। इसके बाद पुलिस टीम उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही थी।

लोन दिलाने के नाम पर ठगी का आरोप

पुलिस के अनुसार, आरोपी वर्ष 2009 से लोन दिलाने के नाम पर लोगों से कथित तौर पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह से जुड़ा था। आरोप है कि गिरोह आम लोगों को लोन दिलाने का भरोसा देकर उनसे रकम लेता था।

पुलिस का कहना है कि इस मामले में लोगों से बड़ी रकम की धोखाधड़ी किए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसी से जुड़े मामलों में आरोपी की तलाश की जा रही थी।

जांच के दौरान आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने से जुड़े करीब 17 मुकदमों की जानकारी पुलिस को मिली। हालांकि, इन मामलों में अंतिम दोषसिद्धि न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।

छह अलग-अलग नामों से छिपाई पहचान

पुलिस जांच में आरोपी के बारे में एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। बताया गया कि वह अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए छह अलग-अलग नाम और फर्जी पते इस्तेमाल कर रहा था।

अलग-अलग पहचान के कारण उसकी तलाश पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई थी। इसके बावजूद पुलिस टीम ने पुराने रिकॉर्ड, उपलब्ध सूचनाओं और तकनीकी संसाधनों की मदद से आरोपी की पहचान का सत्यापन किया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी अलग-अलग स्थानों पर अपनी पहचान बदलकर रह रहा था। इस वजह से उसके वर्तमान ठिकाने तक पहुंचना आसान नहीं था।

फेस रिकग्निशन ऐप से मिली मदद

आरोपी की गिरफ्तारी में पुलिस ने आधुनिक तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया। पुलिस टीम ने फेस रिकग्निशन ऐप की सहायता से उपलब्ध जानकारी का मिलान किया और उसकी वास्तविक पहचान का पता लगाने का प्रयास किया।

तकनीकी जानकारी और पुलिस की निगरानी के आधार पर टीम आरोपी तक पहुंचने में सफल रही। इसके बाद उसे रामादेवी चौराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया गया।

यह कार्रवाई बर्रा पुलिस और दक्षिण जोन की सर्विलांस टीम के संयुक्त प्रयास से की गई। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड भी खंगालने की प्रक्रिया शुरू की।

सर्विलांस टीम की भूमिका रही अहम

लंबे समय से फरार आरोपी की गिरफ्तारी में दक्षिण जोन की सर्विलांस टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रही। टीम ने तकनीकी सूचनाओं और उपलब्ध रिकॉर्ड का विश्लेषण किया।

इसके अलावा पुलिस ने आरोपी के संभावित ठिकानों और पहचान से संबंधित जानकारी को भी जांच के दायरे में रखा। इसी क्रम में उसकी वास्तविक पहचान की पुष्टि करने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

पुलिस का कहना है कि लंबे समय से फरार और वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे मामलों में तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल पुलिस की कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर रहा है।

17 मुकदमों का रिकॉर्ड सामने आया

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज से संबंधित लगभग 17 मुकदमे दर्ज हैं। इन मामलों की विस्तृत जानकारी पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर आगे की जांच में शामिल की जा रही है।

आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों को देखते हुए पुलिस उसके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। साथ ही, यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसने अलग-अलग पहचान और पते का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया।

पुलिस की जांच में यदि किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह की भूमिका सामने आती है, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस ने शुरू की विधिक कार्रवाई

गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस संबंधित मामलों के रिकॉर्ड और आरोपी से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। साथ ही, आरोपी से जुड़े पुराने मामलों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस ने बताया कि वांछित और इनामी अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा। विशेष रूप से ऐसे आरोपी, जो लंबे समय से गिरफ्तारी से बच रहे हैं, उनकी पहचान और लोकेशन का पता लगाने के लिए तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

तकनीक के जरिए लंबे समय से फरार आरोपी तक पहुंची पुलिस

कुल मिलाकर, कानपुर के बर्रा थाना क्षेत्र में पुलिस को लंबे समय से फरार चल रहे ₹50 हजार के इनामी आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। पुलिस के अनुसार, आरोपी करीब 15 वर्षों से गिरफ्तारी से बच रहा था और छह अलग-अलग नाम व पतों के जरिए अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था।

लोन दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में वांछित आरोपी के खिलाफ करीब 17 मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। इस बार पुलिस ने सर्विलांस और फेस रिकग्निशन तकनीक की मदद से उसकी पहचान का पता लगाया और रामादेवी चौराहे के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई जारी है और उसके पुराने मामलों की भी जांच की जा रही है।

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