श्रीकृष्ण जन्मोत्सव 2026 में दिखेगा लोक संस्कृतियों का संगम, शोभायात्रा में जुटेंगे कलाकार
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मोत्सव-2026 को लेकर ब्रज में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में होने वाला आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ उत्तर भारत की विविध लोक संस्कृतियों का भी जीवंत मंच बनेगा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव से एक दिन पहले 3 सितंबर 2026 को सुबह 9 बजे श्रीकृष्ण जन्मस्थान के गेट नंबर-1 से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।
इस शोभायात्रा में ब्रज की पारंपरिक लोक कलाओं के साथ बुंदेलखंड, अवध, राजस्थान और हरियाणा की लोक संस्कृतियों की झलक भी देखने को मिलेगी। अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्य और नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता का संदेश देंगे।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से आयोजित इस शोभायात्रा को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मंगलवार को समिति के सदस्यों, सामाजिक संस्थाओं, सांस्कृतिक संगठनों और शोभायात्रा मार्ग पर स्वागत करने वाले नागरिकों के साथ बैठक आयोजित की गई। इसमें कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और मार्ग पर होने वाले स्वागत की रूपरेखा तय की गई।
3 सितंबर को निकलेगी शोभायात्रा
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव से एक दिन पूर्व निकलने वाली शोभायात्रा श्रीकृष्ण जन्मस्थान के गेट नंबर-1 से शुरू होगी। इसके बाद शोभायात्रा महाविद्या कॉलोनी, गोविंद नगर थाना, होटल शीतल रीजेंसी, मुकुंद विहार और डीग गेट होते हुए वापस श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचेगी।
शोभायात्रा के मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और कलाकारों के स्वागत की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए संबंधित सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों की ओर से तैयारियां की जा रही हैं।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शोभायात्रा धार्मिक उत्साह के साथ व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो। इसके लिए मार्ग में स्वागत, स्वल्पाहार और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारियां भी संबंधित संस्थाओं को सौंपी गई हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ लोक संस्कृति की झलक
इस वर्ष शोभायात्रा की खासियत यह होगी कि इसमें केवल ब्रज की संस्कृति ही नहीं, बल्कि उत्तर भारत की विभिन्न लोक परंपराओं का समावेश होगा। ब्रज के कलाकार रास, लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी लोक परंपराओं को प्रस्तुत करेंगे।
इसके साथ ही बुंदेलखंड के कलाकार अपनी पारंपरिक लोक शैली प्रस्तुत करेंगे। अवध की सांस्कृतिक परंपराओं की झलक भी शोभायात्रा में देखने को मिलेगी। वहीं राजस्थान और हरियाणा के कलाकार अपने क्षेत्र की लोक कलाओं के माध्यम से कार्यक्रम को विविध रंग देंगे।
इस प्रकार शोभायात्रा में ब्रज की कृष्णमय संस्कृति और उत्तर भारत की अलग-अलग लोक परंपराएं एक साथ दिखाई देंगी। आयोजकों का उद्देश्य धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक विरासत को भी लोगों तक पहुंचाना है।
मान मंदिर की सखियां और इस्कॉन की संकीर्तन मंडली होंगी शामिल
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा आयोजित शोभायात्रा में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थाओं की भागीदारी रहेगी। मान मंदिर बरसाना की सखियां, संतगण और इस्कॉन वृंदावन की संकीर्तन मंडली भी इसमें शामिल होगी।
इसके अलावा बैंड पार्टी और विभिन्न लोक एवं सांस्कृतिक दल भी शोभायात्रा का हिस्सा बनेंगे। कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में अपनी प्रस्तुतियां देंगे। वहीं लोक वाद्यों और नृत्य के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों की पहचान को प्रदर्शित किया जाएगा।
शोभायात्रा में श्रद्धालुओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रहेगी। आयोजकों ने भगवान श्रीकृष्ण में आस्था रखने वाले लोगों से उत्साह के साथ इसमें शामिल होने की अपील की है।
‘हर भक्त की शोभायात्रा’ : लक्ष्मी नागप्पन
बैठक की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की मुख्य कार्यपालक अधिकारी लक्ष्मी नागप्पन ने कहा कि यह केवल परिषद की शोभायात्रा नहीं है, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण में आस्था रखने वाले प्रत्येक भक्त की शोभायात्रा है।
उन्होंने लोगों से उत्साहपूर्वक सहभागिता करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने आयोजन को भव्य बनाने के साथ-साथ व्यवस्थाओं को व्यवस्थित रखने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव ब्रज की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। ऐसे में सभी लोगों की सहभागिता से आयोजन को और बेहतर बनाया जा सकता है।
स्वागत के लिए तैयार हो रहे विभिन्न संगठन
शोभायात्रा में शामिल होने वाले कलाकारों और श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए मार्ग में अलग-अलग स्थानों पर व्यवस्थाएं की जाएंगी। इसमें पुष्पवर्षा, स्वागत-सत्कार और स्वल्पाहार की व्यवस्था शामिल है।
संस्कार भारती, उद्योगपति प्रमोद गर्ग, नागरिक सुरक्षा संगठन के पदाधिकारी राजीव बृजवासी, समाजसेवी एसके शर्मा, नवीन मित्तल, जयंती प्रसाद अग्रवाल, अमित जैन और सभासद नीरज वशिष्ठ सहित विभिन्न संगठनों और नागरिकों की ओर से स्वागत की तैयारियां की जाएंगी।
इसके अलावा आयोजन को सफल बनाने के लिए कई सामाजिक और स्वयंसेवी संस्थाओं को भी जिम्मेदारियां दी गई हैं।
इन संस्थाओं को मिली व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी
शोभायात्रा के दौरान व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए कल्याण करोति, नेहरू युवा केंद्र, नागरिक सुरक्षा दल और युवा कल्याण विभाग सहित अन्य संगठनों को जिम्मेदारी दी गई है।
इन संस्थाओं की भूमिका शोभायात्रा के दौरान विभिन्न व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण रहेगी। वहीं स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों से भी सहयोग की अपेक्षा की गई है।
बैठक में परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजीव पांडे, उपमुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश चंद्र, मुख्य अभियंता राणा प्रताप सिंह, सहायक अभियंता जेके जैन, गीता शोध संस्थान के कोऑर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार, इस्कॉन वृंदावन के अध्यक्ष रवि लोचन दास, मान मंदिर की ओर से पंकज चतुर्वेदी, नेहरू युवा केंद्र के अमित कुमार, संस्कार भारती के सुरेंद्र गुप्ता और रेडक्रॉस के ए.एल. खंडेलवाल सहित कई पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।
ब्रज की धरती पर दिखेगा सांस्कृतिक समागम
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव-2026 की शोभायात्रा इस लिहाज से खास होने जा रही है कि इसमें धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विविधता को भी प्रमुखता दी जा रही है। ब्रज की धरती पर जब अलग-अलग क्षेत्रों के कलाकार अपनी लोक परंपराओं का प्रदर्शन करेंगे, तो श्रद्धालुओं को उत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक एक ही मंच पर देखने को मिलेगी।
वहीं, शोभायात्रा के माध्यम से नई पीढ़ी को भी लोक कलाओं और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर मिलेगा। आयोजकों का प्रयास है कि धार्मिक उत्सव के साथ लोक संस्कृति का संरक्षण और प्रचार भी हो।
इस तरह 3 सितंबर की शोभायात्रा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव-2026 की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण आकर्षण बनेगी। ब्रज की कृष्ण भक्ति, लोक संगीत, नृत्य और विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक परंपराएं मिलकर मथुरा की धरती पर एक अनूठा सांस्कृतिक वातावरण तैयार करेंगी।

