भारत-वियतनाम तटरक्षक सहयोग मजबूत, चेन्नई में सातवीं उच्च स्तरीय बैठक

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Digital UP News Desk

चेन्नईः भारतीय तटरक्षक बल (ICG) और वियतनाम तटरक्षक बल (VCG) के बीच सातवीं उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। यह बैठक वर्ष 2015 में दोनों देशों के तटरक्षक बलों के बीच हुए सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन (MoU) के ढांचे के तहत हुई। बैठक का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, कानून प्रवर्तन, खोज एवं बचाव तथा समुद्री पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत और वियतनाम के बीच सहयोग को और मजबूत करना रहा।

बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि और वियतनाम तटरक्षक बल के वाइस कमांडेंट मेजर जनरल लुओंग दिन्ह हंग ने की। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने समुद्री क्षेत्र में बदलती जरूरतों और साझा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

समुद्री सहयोग को मजबूत करने पर जोर

बैठक के दौरान दोनों तटरक्षक बलों के बीच सहयोग के कई प्रमुख क्षेत्रों की समीक्षा की गई। इनमें समुद्री खोज एवं बचाव (SAR), समुद्री कानून प्रवर्तन, समुद्री प्रदूषण की स्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया और क्षमता निर्माण प्रमुख रहे। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने प्रशिक्षण, पेशेवर आदान-प्रदान तथा जहाज यात्राओं के माध्यम से आपसी समझ और परिचालन समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

समुद्री क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तटरक्षक बलों के बीच बेहतर तालमेल बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में भारत और वियतनाम के बीच नियमित संवाद और संयुक्त गतिविधियां दोनों देशों की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने में सहायक हो सकती हैं।

2015 के समझौता ज्ञापन के तहत आगे बढ़ रहा सहयोग

भारत और वियतनाम के तटरक्षक बलों के बीच सहयोग वर्ष 2015 में हुए समझौता ज्ञापन के बाद लगातार आगे बढ़ा है। इस व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों के बीच संस्थागत संवाद, प्रशिक्षण कार्यक्रम, पेशेवर अनुभव साझा करने और जहाज यात्राओं जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया है।

वहीं, सातवीं उच्च स्तरीय बैठक में दोनों पक्षों ने अब तक हुए सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और भविष्य में इसे और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। अधिकारियों ने माना कि नियमित संपर्क से दोनों तटरक्षक बलों के बीच आपसी विश्वास और समन्वय को और मजबूत किया जा सकता है।

खोज एवं बचाव सहयोग महत्वपूर्ण

समुद्री खोज एवं बचाव दोनों देशों के सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। समुद्र में दुर्घटना, संकट या किसी अन्य आपात स्थिति के दौरान त्वरित कार्रवाई के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी संचार और समन्वय आवश्यक होता है।

इसी क्रम में भारतीय और वियतनाम तटरक्षक बलों के बीच प्रशिक्षण तथा पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान उपयोगी साबित हो सकता है। इससे दोनों पक्षों को समुद्री आपात परिस्थितियों से निपटने की प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने और अपनी परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने का अवसर मिलता है।

समुद्री कानून प्रवर्तन पर भी चर्चा

बैठक में समुद्री कानून प्रवर्तन के क्षेत्र में सहयोग को भी प्रमुखता दी गई। समुद्री क्षेत्र में कानूनों और नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न देशों की समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के बीच सहयोग आवश्यक है।

भारत और वियतनाम दोनों ने इस क्षेत्र में अनुभव और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करने के महत्व पर जोर दिया। इसके अलावा, दोनों तटरक्षक बलों के बीच पेशेवर संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई, ताकि जरूरत पड़ने पर परिचालन स्तर पर बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके।

समुद्री प्रदूषण से निपटने की दिशा में सहयोग

समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा भी बैठक के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल रही। समुद्री प्रदूषण की घटनाओं से पर्यावरण, समुद्री जैव विविधता और तटीय क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए ऐसी परिस्थितियों में त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया जरूरी होती है।

भारतीय और वियतनाम तटरक्षक बलों ने समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और प्रशिक्षण के जरिए दोनों पक्ष इस क्षेत्र में अपनी तैयारियों को और बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

नियमित संस्थागत संवाद पर सहमति

दोनों पक्षों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि तटरक्षक बलों के बीच नियमित संस्थागत संवाद भविष्य के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों, पेशेवर आदान-प्रदान और जहाज यात्राओं को जारी रखने की आवश्यकता पर भी सहमति बनी।

ऐसे कार्यक्रमों से अधिकारियों और कर्मियों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलता है। परिणामस्वरूप, आपसी विश्वास बढ़ता है और विभिन्न समुद्री परिस्थितियों में संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता मजबूत होती है।

27 अगस्त को होगा संयुक्त अभ्यास SAHYOG-HOPTAC

भारत और वियतनाम के तटरक्षक बलों के बीच जारी सहयोग के तहत संयुक्त अभ्यास SAHYOG-HOPTAC का आयोजन 27 अगस्त 2026 को समुद्र में निर्धारित है। यह अभ्यास दोनों देशों के तटरक्षक बलों के लिए परिचालन समन्वय और अंतर-संचालनीयता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।

इस अभ्यास के माध्यम से दोनों पक्ष अपनी परिचालन प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने के साथ-साथ सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान कर सकेंगे। साथ ही, संयुक्त गतिविधियों के जरिए समुद्री सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया से संबंधित क्षमताओं को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी

भारत और वियतनाम के बीच तटरक्षक सहयोग केवल संस्थागत संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समुद्री सुरक्षा, संरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा है। दोनों देशों के बीच नियमित बैठकें और संयुक्त गतिविधियां समुद्री क्षेत्र में सहयोग की निरंतरता को दर्शाती हैं।

विशेष रूप से, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों के बढ़ते महत्व के बीच तटरक्षक बलों के बीच संवाद और सहयोग की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में भारत और वियतनाम के बीच प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और अनुभव साझा करने की पहल क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को मजबूत करने में योगदान दे सकती है।

आपसी विश्वास और समन्वय को नई मजबूती

चेन्नई में आयोजित सातवीं उच्च स्तरीय बैठक ने भारत और वियतनाम के तटरक्षक बलों के बीच लंबे समय से जारी सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी विश्वास, समन्वय और परिचालन सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

इसके अलावा, नियमित बातचीत और संयुक्त गतिविधियों के माध्यम से भविष्य में सहयोग के नए अवसर तलाशने पर भी जोर दिया गया। SAHYOG-HOPTAC संयुक्त अभ्यास इसी व्यापक सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कुल मिलाकर, सातवीं उच्च स्तरीय बैठक भारत और वियतनाम के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। खोज एवं बचाव, समुद्री कानून प्रवर्तन, प्रदूषण प्रतिक्रिया, प्रशिक्षण और पेशेवर आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग से दोनों देशों की तटरक्षक क्षमताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही, संयुक्त अभ्यास और नियमित संवाद समुद्री सुरक्षा, संरक्षा तथा पर्यावरणीय स्थिरता के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।

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