फर्जी मुकदमे के आरोप में एसएसपी से शिकायत, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने गोविंद नगर पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

85

रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज

मथुरा। थाना गोविंद नगर पुलिस पर कथित रूप से फर्जी मुकदमा दर्ज करने, पार्टी पदाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार करने और बिना उचित कारण थाने में बैठाए रखने का आरोप सामने आया है। इस संबंध में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के महानगर अध्यक्ष मोइनुद्दीन ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है। वहीं, एसएसपी ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

गोविंद नगर पुलिस पर लगाए आरोप

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के महानगर अध्यक्ष मोइनुद्दीन की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, 21 अगस्त को उन्हें और पार्टी के सदस्य आसिफ को गोविंद नगर थाने में पूरे दिन और रात बैठाए रखा गया। इसके बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया। मोइनुद्दीन का आरोप है कि पूरे मामले में उनकी ओर से कोई गलत कार्य नहीं किया गया था, इसके बावजूद पुलिस ने उनका पक्ष उचित तरीके से नहीं सुना।

उन्होंने एसएसपी से कहा कि किसी भी मामले में कार्रवाई करने से पहले सभी पक्षों की बात सुनना और तथ्यों की निष्पक्ष जांच करना जरूरी है। उनका आरोप है कि इस प्रकरण में ऐसा नहीं किया गया। इसी कारण उन्होंने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मामले की विभागीय जांच की मांग की है।

पार्टी पदाधिकारियों से अभद्रता का आरोप

शिकायत में पार्टी के जिला अध्यक्ष राजवीर सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। उनका कहना है कि जब वह कुछ कार्यकर्ताओं के साथ मामले की जानकारी लेने गोविंद नगर थाने पहुंचे, तो थाना प्रभारी अजय वर्मा और उपनिरीक्षक मयंक ने उनके साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया।

प्रार्थना पत्र के मुताबिक, पुलिसकर्मियों पर धमकाने और भविष्य में थाने नहीं आने की बात कहने का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा पीले गमछे को लेकर भी एक पुलिसकर्मी द्वारा कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया है।

हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पार्टी पदाधिकारियों ने एसएसपी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग की है।

पुराने प्रकरण का भी किया उल्लेख

शिकायत में एक पुराने प्रकरण का भी हवाला दिया गया है। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, रिहान नामक व्यक्ति से जुड़े एक मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद प्रकरण न्यायालय तक पहुंचा था। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस मामले में पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर जांच के आदेश भी दिए गए थे।

पार्टी पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पुराने मामले के बावजूद पुलिस की कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उनका कहना है कि आमजन की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और किसी भी व्यक्ति के साथ अनावश्यक परेशानी या दबाव की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।

निष्पक्ष जांच की मांग

मोइनुद्दीन ने एसएसपी से मांग की है कि गोविंद नगर थाने में तैनात संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की विभागीय स्तर पर जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी की गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नागरिकों की शिकायतों का निष्पक्ष तरीके से समाधान करना भी है। इसलिए किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है।

पार्टी की ओर से यह भी मांग की गई है कि भविष्य में ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता और संबंधित पक्ष की बात निष्पक्ष रूप से सुनी जाए। इससे पुलिस और आम नागरिकों के बीच विश्वास मजबूत होगा।

एसएसपी ने दिया जांच का आश्वासन

शिकायत मिलने के बाद एसएसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने और नियमानुसार उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ऐसे में अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई।

पुलिस प्रशासन की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल शिकायत के आधार पर पार्टी पदाधिकारियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग रखी है।

निष्पक्ष जांच से सामने आएगा सच

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू निष्पक्ष जांच है। शिकायतकर्ता जहां पुलिस पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने और अभद्र व्यवहार का आरोप लगा रहे हैं, वहीं आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी। इसलिए मामले से जुड़े सभी तथ्यों, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों की जांच आवश्यक मानी जा रही है।

You may have missed