सुरेश ओबेरॉय का राजनीति से मोहभंग, बोले बीजेपी में ज्यादातर लोग पैसे बना रहे थे
Digital UP News Desk
अस्सी और नब्बे के दशक में बॉलीवुड के चर्चित अभिनेताओं में शामिल रहे सुरेश ओबेरॉय ने साल 2004 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ली थी। उस समय उन्होंने पार्टी के लिए चुनाव प्रचार में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। हालांकि, करीब दो दशक बाद अब एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने राजनीतिक अनुभव को लेकर खुलकर बात की है। अभिनेता ने कहा कि राजनीति की दुनिया उनके लिए नहीं बनी थी और वहां उन्हें वह सकारात्मक ऊर्जा महसूस नहीं हुई, जिसकी वह उम्मीद कर रहे थे।
रणबीर कपूर की फिल्म ‘एनिमल’ में नजर आए सुरेश ओबेरॉय ने निधि वसनदानी के पॉडकास्ट में अपने राजनीतिक सफर से जुड़े कई अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनका बीजेपी में शामिल होना किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का हिस्सा नहीं था। बल्कि कॉलेज के समय के एक दोस्त के कहने पर उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली थी। हालांकि, समय के साथ उन्हें लगा कि वह राजनीतिक माहौल में खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहे हैं।
दोस्त के कहने पर बीजेपी में शामिल हुए थे सुरेश ओबेरॉय
सुरेश ओबेरॉय के मुताबिक, हैदराबाद में कॉलेज के दिनों के उनके एक दोस्त ने उन्हें बीजेपी में शामिल होने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने बताया कि एक दिन उनका दोस्त उनके घर आया और पार्टी की सदस्यता लेने के लिए कहा। इसके बाद वह उसके साथ चले गए और बीजेपी में शामिल हो गए।
सुरेश ओबेरॉय ने फरवरी 2004 में बीजेपी की औपचारिक सदस्यता ली थी। उस समय नवजोत सिंह सिद्धू और गजेंद्र चौहान जैसे कुछ अन्य चर्चित चेहरे भी पार्टी से जुड़े थे। इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान सुरेश ओबेरॉय ने पार्टी के लिए चुनाव प्रचार भी किया।
हालांकि, अभिनेता ने अपने हालिया इंटरव्यू में यह स्वीकार किया कि राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान उन्हें भीतर से संतुष्टि नहीं मिली। उनके अनुसार, फिल्मों की दुनिया और राजनीति के बीच काफी अंतर है। फिल्म में किसी प्रोजेक्ट पर काम करने के बाद कलाकार अगले काम की ओर बढ़ सकता है, लेकिन राजनीति में लगातार लोगों और परिस्थितियों के साथ जुड़े रहना पड़ता है।
आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात का किया जिक्र
सुरेश ओबेरॉय ने अपने राजनीतिक सफर के दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी से हुई मुलाकातों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दोनों वरिष्ठ नेताओं से उनका संपर्क हुआ था और उन्होंने उन्हें सम्मान भी दिया।
अभिनेता ने कहा कि एक समय उनके गुरु ने उन्हें राजनीति से दूरी बनाए रखने की सलाह दी थी। उनके मुताबिक, गुरु ने उन्हें सावधान करते हुए कहा था कि राजनीतिक लोगों से ज्यादा संपर्क नहीं रखना चाहिए। सुरेश ओबेरॉय ने बताया कि उनके गुरु ने उन्हें इस मामले में काफी सख्ती से समझाया था।
हालांकि, उस सलाह के बावजूद अभिनेता कुछ समय तक राजनेताओं के संपर्क में रहे। बाद में उन्हें महसूस हुआ कि राजनीतिक माहौल उनके स्वभाव के अनुरूप नहीं है। यही वजह रही कि उन्होंने राजनीति में अपनी सक्रियता को आगे नहीं बढ़ाया।
बोले- राजनीति की दुनिया मेरे लिए नहीं बनी
सुरेश ओबेरॉय ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि वह राजनीति में अंदर से खुश नहीं थे। उन्हें वहां सकारात्मक ऊर्जा महसूस नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म और राजनीति में काम करने के तौर-तरीके बिल्कुल अलग हैं।
अभिनेता के अनुसार, फिल्मों में एक फिल्म पूरी करने के बाद व्यक्ति अगले प्रोजेक्ट पर काम कर सकता है। इसके विपरीत राजनीति में आपको लोगों और परिस्थितियों के साथ लगातार जुड़े रहना पड़ता है। आपको किसी व्यवस्था का हिस्सा बनकर उसके साथ आगे बढ़ना होता है।
सुरेश ओबेरॉय ने माना कि वह राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बनने में खुद को सहज नहीं कर सके। उनके मुताबिक, इसी अनुभव ने उन्हें यह समझने में मदद की कि राजनीति उनके लिए उपयुक्त क्षेत्र नहीं है।
बीजेपी के कई नेताओं को लेकर जताई नाराजगी
इंटरव्यू के दौरान सुरेश ओबेरॉय ने बीजेपी के भीतर अपने अनुभव को लेकर भी स्पष्ट टिप्पणी की। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह पार्टी के सभी नेताओं के बारे में ऐसा नहीं कह रहे हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कुछ वरिष्ठ नेताओं को अलग रखते हुए कहा कि उनके आसपास मौजूद कुछ बड़े नेताओं को लेकर उनकी राय अलग रही।
सुरेश ओबेरॉय ने दावा किया कि उनके अनुभव में पार्टी के कई लोग पैसे बनाने में लगे हुए थे और उन्हें उनका व्यवहार बनावटी लगा। अभिनेता ने कहा कि इसी वजह से वह उन लोगों से सहज नहीं हो पाए।
यह टिप्पणी उनके राजनीतिक अनुभव का निजी आकलन है। उन्होंने बातचीत में यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनकी आलोचना पार्टी के प्रत्येक सदस्य या नेता के लिए नहीं थी, बल्कि उनका अनुभव कुछ लोगों तक सीमित था।
मोहन भागवत के प्रशंसक हैं सुरेश ओबेरॉय
राजनीति से दूरी बनाने के बावजूद सुरेश ओबेरॉय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के प्रति अपनी प्रशंसा जाहिर की। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनकी मोहन भागवत से फोन पर बातचीत भी हुई थी।
अभिनेता ने अपने बेटे विवेक ओबेरॉय की फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ का जिक्र करते हुए बताया कि वह फिल्म की रील नागपुर भी लेकर गए थे, ताकि इसे मोहन भागवत को दिखा सकें।
इससे साफ है कि राजनीति से उनका मोहभंग होने के बावजूद कुछ राजनीतिक और सामाजिक व्यक्तित्वों के प्रति उनकी व्यक्तिगत सम्मान की भावना बनी हुई है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भी बोले सुरेश ओबेरॉय
इसी पॉडकास्ट बातचीत में सुरेश ओबेरॉय ने जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रदर्शन को गैरजरूरी बताते हुए 20 जुलाई की घटना को लेकर छात्रों की भूमिका पर सवाल उठाए।
अभिनेता ने कहा कि छात्रों को पुलिस के साथ मारपीट नहीं करनी चाहिए थी। उनके मुताबिक, किसी भी विरोध प्रदर्शन में अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन पुलिस के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता।
उनकी यह टिप्पणी भी इंटरव्यू के दौरान राजनीतिक और सामाजिक घटनाओं पर पूछे गए सवालों के जवाब में सामने आई।
2004 में बताया था- बीजेपी में शामिल होना मेरा फैसला
सुरेश ओबेरॉय के हालिया बयान की एक दिलचस्प बात यह है कि साल 2004 में बीजेपी में शामिल होने के समय उन्होंने इसे अपना व्यक्तिगत फैसला बताया था। अप्रैल 2004 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह खुद दिल्ली गए थे और बीजेपी में शामिल होने की इच्छा जाहिर करने के लिए लालकृष्ण आडवाणी से मिले थे।
वहीं, अब उन्होंने बताया है कि उन्हें बीजेपी में शामिल होने के लिए कॉलेज के एक दोस्त ने प्रेरित किया था। इस तरह उनके पुराने और हालिया बयानों में पार्टी से जुड़ने की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग पहलुओं की जानकारी सामने आती है।
फिल्मों में जारी रहा सफर
सुरेश ओबेरॉय ने मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत की और इसके बाद फिल्मों में अपनी पहचान बनाई। अस्सी और नब्बे के दशक में उन्होंने कई फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। लंबे फिल्मी करियर के बाद भी वह अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में नजर आते रहे हैं।
हाल के वर्षों में उन्हें नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ भी काम करते देखा गया है। रणबीर कपूर की ‘एनिमल’ में उनकी मौजूदगी ने उन्हें एक बार फिर दर्शकों के बीच चर्चा में ला दिया।
कुल मिलाकर, सुरेश ओबेरॉय का हालिया इंटरव्यू उनके राजनीतिक सफर के एक अलग पहलू को सामने लाता है। साल 2004 में बीजेपी से जुड़ने के बाद उन्होंने पार्टी के लिए चुनाव प्रचार किया था, लेकिन समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि राजनीति उनके व्यक्तित्व और काम करने के तरीके के अनुकूल नहीं है। अब उन्होंने अपने अनुभव को खुलकर साझा करते हुए राजनीति से दूरी बनाने की वजह बताई है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ नेताओं के प्रति सम्मान और पूरी राजनीतिक व्यवस्था के साथ सहज होना दो अलग बातें हैं।

