बांदा में बिजली संकट को लेकर किसानों का पावर हाउस घेराव, लाइन जोड़ने के नाम पर वसूली के आरोप
रिपोर्ट- शैलेन्द्र शानू वर्मा
बांदा। नारायनपुर फीडर की बदहाल विद्युत व्यवस्था से परेशान सैकड़ों किसानों ने रविवार को 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र बीरा का घेराव कर प्रदर्शन किया। बिजली आपूर्ति में लगातार आ रही दिक्कतों और कथित वसूली के आरोपों को लेकर किसानों में नाराजगी देखने को मिली। प्रदर्शन में पुरुषों के साथ महिलाएं और छात्राएं भी शामिल रहीं। किसानों ने विद्युत विभाग से व्यवस्था में तत्काल सुधार कराने और शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
किसान ट्रैक्टर, बाइक और चार पहिया वाहनों से विद्युत उपकेंद्र बीरा पहुंचे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने विद्युत विभाग के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई और “इंकलाब जिंदाबाद” तथा “भारत माता की जय” के नारे लगाए। किसानों का कहना था कि लंबे समय से बिजली की समस्या बनी हुई है, लेकिन शिकायतों के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं किया गया।
तीन महीने से बिजली व्यवस्था प्रभावित होने का आरोप
ग्रामीणों के मुताबिक नारायनपुर फीडर की विद्युत आपूर्ति करीब तीन महीने से प्रभावित है। बार-बार बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति के कारण सबसे अधिक परेशानी किसानों को हो रही है। खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से फसलों की देखभाल प्रभावित हो रही है। इसके अलावा ग्रामीण घरों में भी बिजली की समस्या का सामना कर रहे हैं।
किसानों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की निर्भरता केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है। खेती-किसानी के लिए सिंचाई, मोटर संचालन और अन्य आवश्यक कार्यों में विद्युत आपूर्ति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में लगातार बिजली बाधित होने से किसानों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है।
वहीं, बिजली की समस्या का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ने का दावा किया गया। ग्रामीणों के अनुसार शाम और रात के समय बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। महिलाओं और बुजुर्गों को भी घरेलू कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लाइन जोड़ने के नाम पर रुपये लेने के आरोप
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने विद्युत विभाग के एक लाइनमैन पर गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों का दावा है कि खराब या काटी गई बिजली लाइन को जोड़ने के नाम पर उनसे हजारों रुपये तक मांगे गए। किसानों ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर पैसे नहीं देने पर कनेक्शन जोड़ने में टालमटोल की जाती है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। किसानों ने मांग की कि पूरे मामले की विभागीय स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
किसानों ने यह भी कहा कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा के लिए किसी भी प्रकार की कथित अनधिकृत वसूली गंभीर विषय है। इसलिए शिकायतों को केवल आश्वासन तक सीमित रखने के बजाय उनकी जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
उपकेंद्र परिसर में मिली खाली बोतलों पर भी उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने विद्युत उपकेंद्र परिसर में पड़ी शराब की खाली बोतलों को भी अधिकारियों के सामने दिखाया। किसानों ने इस मामले की भी जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि विद्युत उपकेंद्र जैसे महत्वपूर्ण सरकारी परिसर की व्यवस्था और अनुशासन को लेकर विभाग को स्पष्ट जांच करनी चाहिए।
ग्रामीणों की शिकायत थी कि उपकेंद्र में कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में बिजली आपूर्ति से जुड़े मामलों के साथ-साथ परिसर की स्थिति की भी जांच जरूरी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने सुनी किसानों की शिकायतें
दोपहर बाद जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल विद्युत उपकेंद्र बीरा पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। किसानों ने उन्हें अपनी विभिन्न शिकायतों से अवगत कराया तथा कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से बिजली आपूर्ति में सुधार, कथित वसूली के आरोपों की जांच और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को नियमित और पर्याप्त बिजली मिलनी चाहिए, ताकि खेती और घरेलू जरूरतें प्रभावित न हों।
जिला पंचायत अध्यक्ष के समक्ष किसानों ने अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं। इसके बाद प्रशासन और विद्युत विभाग के स्तर पर मामले को आगे बढ़ाने की बात कही गई।
देर शाम मौके पर पहुंचे जेई
किसानों के प्रदर्शन के बाद देर शाम विद्युत विभाग के जेई शत्रुघन भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी शिकायतों की जानकारी ली। किसानों ने बिजली आपूर्ति की स्थिति और लाइन जोड़ने के नाम पर कथित वसूली से संबंधित आरोप उनके सामने भी रखे।
जेई ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी शिकायतों को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है और आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसके बाद किसानों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य बिजली व्यवस्था को बेहतर कराना और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान कराना है। किसानों ने विभाग से जल्द से जल्द प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने चेतावनी दी कि यदि नारायनपुर फीडर की बिजली व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ और कथित वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आपूर्ति में सुधार होने से किसानों को सिंचाई में राहत मिलेगी और विद्यार्थियों तथा घरेलू उपभोक्ताओं की परेशानियां भी कम होंगी। इसलिए विभाग को शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए।

