कानपुर में 36,580 किलो असुरक्षित भुना चना किया गया नष्ट, औरामिन डाई की पुष्टि के बाद कोर्ट ने दिया था आदेश
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बड़ी कार्रवाई करते हुए 36,580 किलोग्राम असुरक्षित भुना चना नष्ट कराया। यह भुना चना जांच के दौरान औरामिन डाई की मौजूदगी पाए जाने के बाद असुरक्षित घोषित किया गया था। विभाग के अनुसार, जब्त की गई सामग्री का अनुमानित मूल्य करीब 33.48 लाख रुपये था। न्यायालय के निर्देश के बाद तीन सदस्यीय समिति की निगरानी में सामग्री का पर्यावरण अनुकूल तरीके से विनष्टीकरण कराया गया।
यह कार्रवाई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा से जुड़े मामले में की गई है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, असुरक्षित घोषित सामग्री को नियमानुसार नष्ट कराना आवश्यक था, ताकि उसका दोबारा उपयोग या बाजार में पहुंचना संभव न हो।
जांच में सामने आई औरामिन डाई की मौजूदगी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार, 17 दिसंबर 2025 को की गई कार्रवाई के दौरान संबंधित भुना चना सीज किया गया था। इसके बाद खाद्य सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे गए। जांच रिपोर्ट में इसमें औरामिन डाई की उपस्थिति सामने आई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सामग्री को असुरक्षित घोषित किया गया। इसके बाद रेफरल प्रयोगशाला में भी जांच कराई गई, जहां औरामिन डाई की मौजूदगी की पुष्टि होने की जानकारी विभाग ने दी।
इसके परिणामस्वरूप सीज की गई सामग्री को नष्ट कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि, सामग्री को नष्ट करने के लिए न्यायालय की अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया।
14 जुलाई 2026 को न्यायालय ने दिया आदेश
सहायक आयुक्त (खाद्य)-द्वितीय की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट संख्या-1, कानपुर नगर में सरकार बनाम महेश कुमार गुप्ता से संबंधित दो वादों में सीज सामग्री के विनष्टीकरण को लेकर सुनवाई हुई थी।
न्यायालय ने 14 जुलाई 2026 को सीज सामग्री के विनष्टीकरण के संबंध में आदेश जारी किया। इसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
आदेश मिलने के बाद विभाग ने सामग्री को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नष्ट कराने के लिए समिति गठित की। इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के साथ-साथ असुरक्षित खाद्य सामग्री के सुरक्षित निस्तारण को सुनिश्चित करना था।
तीन सदस्यीय समिति ने संभाली जिम्मेदारी
विनष्टीकरण की कार्रवाई के लिए मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धर्मेंद्र कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति में खाद्य सुरक्षा अधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह और डॉ. देवेंद्र सिंह आजाद को सदस्य बनाया गया।
समिति को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई कि न्यायालय के आदेश के अनुसार सीज सामग्री का सत्यापन किया जाए और उसके बाद नियमानुसार विनष्टीकरण कराया जाए।
सबसे पहले समिति ने पर्यावरण के दृष्टिकोण से सुरक्षित तरीके से सामग्री को नष्ट करने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त किए। इसके लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संपर्क किया गया।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांगे गए दिशा-निर्देश
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, समिति ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से असुरक्षित खाद्य सामग्री के पर्यावरण अनुकूल विनष्टीकरण के संबंध में जानकारी मांगी थी। बोर्ड की ओर से इस काम के लिए दो पंजीकृत एजेंसियों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई।
इसके बाद संबंधित फर्म ने इन एजेंसियों से संपर्क किया। एजेंसियों की ओर से भुना चना नष्ट करने के लिए 40 रुपये प्रति किलोग्राम शुल्क बताया गया। इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री होने के कारण कुल खर्च काफी अधिक होना था।
संबंधित फर्म ने निर्धारित शुल्क को अधिक बताते हुए इसे वहन करने में असमर्थता जताई। साथ ही, सामग्री के विनष्टीकरण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।
नगर निगम से किया गया समन्वय
वैकल्पिक व्यवस्था के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने नगर निगम से संपर्क किया। इसके बाद नगर निगम के भौंती स्थित डंपिंग यार्ड में सामग्री के पर्यावरण अनुकूल विनष्टीकरण की व्यवस्था की गई।
इस व्यवस्था के बाद समिति ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत मौके पर पहुंचकर सीज सामग्री का निरीक्षण किया। सबसे पहले सामग्री पर लगी सील की जांच और सत्यापन किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान सील सही स्थिति में पाई गई। सत्यापन पूरा होने के बाद नियमानुसार सील हटाई गई और सामग्री को विनष्टीकरण के लिए अवमुक्त किया गया।
36,580 किलो भुना चना कराया गया नष्ट
निरीक्षण के दौरान समिति को सीज सामग्री में से कुछ हिस्सा चूहों से क्षतिग्रस्त भी मिला। इसके बावजूद उपलब्ध सामग्री का नियमानुसार निस्तारण किया गया।
विभाग के अनुसार, कुल 36,580 किलोग्राम भुना चना 23 अगस्त को नगर निगम के भौंती स्थित डंपिंग यार्ड में नष्ट कराया गया। इसके लिए नगर निगम से अनुबंधित फर्म मेसर्स एनवायरमेंटल टेक्नो, आगरा की सेवाएं ली गईं।
समिति की निगरानी में पूरी कार्रवाई कराई गई, ताकि सीज सामग्री का किसी भी स्तर पर दोबारा उपयोग न हो सके। साथ ही, पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखते हुए विनष्टीकरण की प्रक्रिया पूरी की गई।
खाद्य सुरक्षा को लेकर विभाग की कार्रवाई
खाद्य पदार्थों में मिलावट और असुरक्षित सामग्री की बिक्री को रोकना खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है। ऐसे मामलों में खाद्य सामग्री के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच कराई जाती है। यदि जांच में खाद्य पदार्थ निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
कानपुर में हुई यह कार्रवाई भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा रही। पहले खाद्य सामग्री को सीज किया गया, फिर प्रयोगशाला जांच के आधार पर उसे असुरक्षित घोषित किया गया और अंत में न्यायालय के आदेश के बाद उसका विनष्टीकरण कराया गया।
इस पूरी प्रक्रिया में विभाग ने न्यायालय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम के साथ समन्वय स्थापित किया। इस प्रकार, खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामले में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई पूरी की गई।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर जोर
असुरक्षित खाद्य सामग्री को नष्ट कराने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी सामग्री किसी भी माध्यम से उपभोक्ताओं तक न पहुंचे। खास तौर पर जब किसी खाद्य पदार्थ में जांच के दौरान निर्धारित मानकों के विपरीत तत्व पाए जाते हैं, तब उसके सुरक्षित निस्तारण की आवश्यकता बढ़ जाती है।
विभाग की ओर से की गई कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि सीज की गई खाद्य सामग्री को बिना निर्धारित प्रक्रिया के दोबारा इस्तेमाल या बाजार में भेजे जाने से रोकने के लिए निगरानी की जाती है।
फिलहाल, 36,580 किलोग्राम भुना चना न्यायालय के आदेश के बाद नियमानुसार नष्ट कराया जा चुका है। विभागीय अधिकारियों और गठित समिति की निगरानी में पूरी प्रक्रिया पूरी की गई।

