कानपुर आरटीओ कार्यालय में जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त छापेमारी, एक दर्जन से अधिक संदिग्ध लोग हिरासत में

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रिपोर्ट- हरिशंकर शर्मा 

कानपुर। आरटीओ कार्यालय में अनधिकृत लोगों की मौजूदगी और विभागीय कामकाज को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद रविवार को जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की। एसडीएम सदर अभिनव सिंह और एडीसीपी स्पेशल ऑपरेशन सुमित सुधाकर रामटेके के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच, एसओजी तथा अतिरिक्त पुलिस बल की टीम ने आरटीओ परिसर में पहुंचकर विभिन्न कक्षों और दस्तावेजों की जांच की। कार्रवाई के दौरान कार्यालय के दोनों गेट बंद कर दिए गए और परिसर में मौजूद लोगों से पूछताछ की गई।

छापेमारी की सूचना मिलते ही आरटीओ कार्यालय परिसर में मौजूद कई एजेंट और अनधिकृत लोग इधर-उधर जाने लगे। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए एक दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। वहीं, कुछ लोग मौके से निकलने में सफल रहे। जांच के दौरान परिसर में ड्रोन कैमरे से भी निगरानी और रिकॉर्डिंग कराई गई, ताकि कार्यालय में मौजूद लोगों की पहचान और उनकी गतिविधियों का रिकॉर्ड सुरक्षित किया जा सके।

दोपहर में अचानक पहुंची प्रशासन और पुलिस की टीम

दोपहर करीब दो बजे एसडीएम सदर अभिनव सिंह, एडीसीपी स्पेशल ऑपरेशन सुमित सुधाकर रामटेके, क्राइम ब्रांच, एसओजी और अतिरिक्त पुलिस बल के साथ आरटीओ कार्यालय पहुंचे। अधिकारियों के पहुंचते ही पूरे परिसर में जांच शुरू कर दी गई। टीम के आने की जानकारी मिलने पर एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार सिंह और एआरटीओ टेक्निकल नेहा द्विवेदी भी मौके पर पहुंचीं।

इसके बाद अधिकारियों ने जिला प्रशासन और पुलिस टीम को आरटीओ कार्यालय के विभिन्न कक्षों का निरीक्षण कराया। टीम ने सबसे पहले प्रवर्तन कक्ष में पहुंचकर संबंधित दस्तावेजों की जांच की। इसके बाद कैश विभाग में भी रिकॉर्ड और नकदी का मिलान किया गया। प्रशासन के मुताबिक, शुरुआती जांच में कैश के रखरखाव से जुड़ी कुछ अनियमितताएं सामने आई हैं।

कैश विभाग में 15 हजार रुपये की कमी मिली

जांच के दौरान कैश विभाग में बाबू विपिन कुमार के पास करीब 15 हजार रुपये की कमी पाई गई। अधिकारियों के अनुसार यह राशि टैक्स से संबंधित थी। बाद में संबंधित आवेदक द्वारा रकम जमा कर दी गई। प्रशासन ने इस मामले में कैश से संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी जांच की।

जांच टीम ने यह भी देखा कि कार्यालय में आवेदकों से संबंधित वित्तीय लेनदेन किस प्रकार दर्ज किए जा रहे हैं। इसके साथ ही अधिकारियों ने उपलब्ध दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को भी अपने परीक्षण में शामिल किया।

चालान की राशि और रसीद को लेकर शिकायत

संयुक्त कार्रवाई की एक प्रमुख वजह आरटीओ विभाग से संबंधित शिकायतें भी बताई गई हैं। एसडीएम सदर अभिनव सिंह के अनुसार, हमीरपुर जिले के ललपुरा थाना क्षेत्र निवासी ट्रक चालक कामता प्रसाद ने 22 अगस्त को शिकायत की थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक भौंती बाईपास पर उसके ट्रक का चालान किया गया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि चालान में सीट बेल्ट और हैवी लाइसेंस से संबंधित धाराएं शामिल की गईं, जबकि चालक का कहना था कि उसके पास हैवी लाइसेंस मौजूद था। साथ ही उसने ट्रक में सीट बेल्ट नहीं होने का भी उल्लेख किया। प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विभागीय प्रक्रिया और रिकॉर्ड की जांच शुरू की।

एसडीएम ने बताया कि जांच के दौरान शिकायत से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ पूरे आरटीओ परिसर की व्यवस्थाओं को भी देखा गया। वहीं, एआरटीओ प्रवर्तन की ओर से बताया गया कि शिकायतकर्ता के वाहन पर टैक्स बकाया भी था। ऐसे में मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

सारथी भवन में भी हुई गहन जांच

कैश विभाग के बाद टीम एसओजी के साथ सारथी भवन पहुंची। यहां वाहन लाइसेंस से जुड़े बायोमीट्रिक कार्य वाले काउंटरों की जांच की गई। काउंटर नंबर छह पर आजमगढ़ निवासी कर्मचारी मुजाहिद फारूकी मौजूद मिले।

पूछताछ के दौरान कर्मचारी ने बताया कि दोपहर 12 बजे तक साइट के काम नहीं करने के कारण बायोमीट्रिक प्रक्रिया नहीं हो सकी थी। अधिकारियों ने इस व्यवस्था से जुड़े तकनीकी रिकॉर्ड और कार्यप्रणाली की भी जानकारी ली।

इसके अलावा सारथी भवन के अन्य कमरों और काउंटरों का भी निरीक्षण किया गया। टीम ने यह जानने का प्रयास किया कि आवेदकों के कार्य किस प्रक्रिया के तहत किए जा रहे हैं और कार्यालय परिसर में अनधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी किस तरह बनी हुई है।

एजेंटों और अनधिकृत लोगों से पूछताछ

पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरटीओ परिसर में मौजूद एजेंटों और अन्य अनधिकृत लोगों की पहचान की गई। पुलिस के मुताबिक, एक दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कार्यालय में अनधिकृत लोगों की गतिविधियां किस प्रकार संचालित हो रही थीं और उनका विभागीय कामकाज से कोई संबंध है या नहीं।

छापेमारी के दौरान कुछ लोगों के मौके से निकलने की भी जानकारी सामने आई। हालांकि, पुलिस की ओर से पूरे मामले में जांच जारी होने की बात कही गई है। इसलिए किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

ड्रोन कैमरे से भी की गई निगरानी

आरटीओ कार्यालय में कार्रवाई के दौरान पुलिस ने ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल भी किया। इसका उद्देश्य परिसर में मौजूद लोगों की गतिविधियों और उनकी पहचान से संबंधित रिकॉर्ड तैयार करना था। ड्रोन से परिसर के विभिन्न हिस्सों की निगरानी की गई।

एडीसीपी स्पेशल ऑपरेशन सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि कार्यालय परिसर में अनधिकृत लोगों के आवागमन की सूचना मिली थी। इसी आधार पर जांच की गई। पुलिस ने विभाग से सीसीटीवी फुटेज और जरूरी दस्तावेज लिए हैं। इनका परीक्षण किया जा रहा है।

सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड जांच के दायरे में

प्रशासन ने आरटीओ कार्यालय से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, जरूरी दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड को जांच में शामिल किया है। अधिकारियों का कहना है कि इन रिकॉर्ड के आधार पर कार्यालय में आने-जाने वाले लोगों और संबंधित गतिविधियों की जानकारी जुटाई जाएगी।

इसके अलावा कैश विभाग में सामने आई कमी और शिकायतकर्ता के चालान से जुड़े दस्तावेजों का भी परीक्षण किया जा रहा है। प्रशासनिक टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सामने आई गड़बड़ियां किसी प्रक्रिया संबंधी समस्या का परिणाम हैं या इसके पीछे किसी व्यक्ति की भूमिका है।

अधिवक्ता से पुलिस की हुई बहस

कार्रवाई के दौरान एक अधिवक्ता और पुलिसकर्मियों के बीच भी बहस होने की जानकारी सामने आई। हालांकि, इस संबंध में अधिकारियों की ओर से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई और जांच से जुड़े सभी तथ्यों को रिकॉर्ड में लिया जा रहा है।

शासन को भेजी जाएगी जांच रिपोर्ट

एसडीएम सदर ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप विभागीय कार्यप्रणाली की जांच की जा रही है। आरटीओ कार्यालय को लेकर पहले से मिल रही शिकायतों के मद्देनजर यह कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने कहा कि जांच के दौरान सामने आने वाले सभी तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा।

वहीं, एडीसीपी स्पेशल ऑपरेशन ने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है। विभागीय दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

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