जेन जी के आंदोलन पर अब्बास अंसारी बोले सही मांगों पर हो काम, शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखें संघर्ष

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Digital UP News Desk

मऊ: सदर विधानसभा क्षेत्र के रस्तीपुर गांव में जनसंपर्क अभियान के दौरान विधायक अब्बास अंसारी ने जेन जी के आंदोलन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जेन जी देश का भविष्य हैं और कहीं न कहीं वे अपनी सही मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। इसलिए उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। अब्बास अंसारी ने कहा कि जहां भी उनकी जरूरत होगी, वह मदद के लिए तैयार हैं।

उन्होंने आंदोलनकारियों से अपील की कि वे अपना आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखें। उनका कहना था कि कई बार किसी आंदोलन के बीच असामाजिक तत्वों को भेजकर माहौल खराब करने की कोशिश की जाती है। ऐसे में आंदोलनकारियों को सतर्क रहते हुए अपने उद्देश्य और मुद्दों पर केंद्रित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जेन जी समझदार हैं और उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचानी चाहिए।

सरकार के बैकफुट पर आने को बताया आंदोलन की उपलब्धि

अब्बास अंसारी ने जेन जी आंदोलन को लेकर कहा कि उन्होंने पहली बार सरकार को बैकफुट पर आते हुए देखा है। उन्होंने इसे आंदोलन की बड़ी उपलब्धि के तौर पर बताया। उनके मुताबिक, जेन जी और जेन अल्फा के संघर्ष का असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि यदि युवा किसी उचित मुद्दे को लेकर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाते हैं तो उनकी बात को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

उन्होंने युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर जागरूक है। ऐसे में उनकी चिंताओं को केवल राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय उन पर सकारात्मक चर्चा की आवश्यकता है। साथ ही, आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखना भी सभी की जिम्मेदारी है।

ओमप्रकाश राजभर और सपा अध्यक्ष के विवाद पर टिप्पणी से किया इनकार

जनसंपर्क अभियान के दौरान जब अब्बास अंसारी से सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बीच चल रही जुबानी जंग को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

अब्बास अंसारी ने कहा कि एक उनके बड़े भाई हैं और दूसरे उनके चाचा हैं। दोनों नेताओं के साथ उनके पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं। इसलिए वह दोनों के बीच चल रही राजनीतिक बयानबाजी पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं करना चाहते।

उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद होना कोई नई बात नहीं है। परिस्थितियां समय के साथ बदलती रहती हैं और आज जो राजनीतिक मतभेद दिखाई दे रहे हैं, संभव है कि आने वाले समय में उनकी स्थिति अलग हो। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों बड़े नेता अपने स्तर पर इस मामले को सुलझा लेंगे।

‘बड़े लोगों की बात है, अपने स्तर पर सुलझा लेंगे’

अब्बास अंसारी ने इस पूरे मामले को लेकर कहा कि राजनीति में नेताओं के बीच बयानबाजी और मतभेद सामने आते रहते हैं। हालांकि, व्यक्तिगत रिश्तों को राजनीतिक विवादों से अलग रखना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि दोनों नेताओं के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं और वह इस मुद्दे पर पक्ष लेने की स्थिति में नहीं हैं।

इस दौरान पत्रकारों ने उनसे यह भी पूछा कि चुनाव नजदीक आने के बाद वह फील्ड में अधिक सक्रिय नजर आ रहे हैं। इस सवाल पर अब्बास अंसारी ने हल्के अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि पत्रकार उन्हें हमेशा देर से ही देखते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या उन्हें इस तरह के सवाल पूछने के लिए किसी ने सिखाकर भेजा है।

टीआरपी के लिए नकारात्मक सवालों के बजाय विकास पर हो चर्चा

मीडिया से बातचीत के दौरान अब्बास अंसारी ने पत्रकारों से विकास और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मीडिया को केवल नकारात्मक सवालों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय जनता से जुड़े वास्तविक सवालों को सामने लाने पर जोर दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि हर घर नल से जल पहुंचाने की योजनाओं की जमीनी स्थिति क्या है और विकास के दावों का वास्तविक असर आम लोगों तक कितना पहुंच रहा है। उनके मुताबिक, जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना और उन मुद्दों को सामने लाना मीडिया की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

उन्होंने पत्रकारों से कहा कि केवल टीआरपी के लिए नकारात्मक सवाल पूछने के बजाय सड़क, पानी, रोजगार, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं जैसे विषयों पर भी सवाल किए जाने चाहिए। इससे आम लोगों से जुड़े मुद्दों को व्यापक मंच मिल सकता है।

महंगाई को लेकर सरकार पर साधा निशाना

अब्बास अंसारी ने महंगाई के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने रक्षाबंधन से पहले चीनी की कीमत बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की बात का उल्लेख करते हुए आम आदमी की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय मिठाई और अन्य जरूरी सामान खरीदने वाले परिवारों पर बढ़ती कीमतों का सीधा असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर जब लोग अपनी बहनों और परिवार के लिए मिठाई खरीदते हैं, तब महंगाई उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालती है। रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का असर विशेष रूप से मध्यम वर्ग और कमजोर आर्थिक स्थिति वाले लोगों पर पड़ता है।

अब्बास अंसारी ने कहा कि महंगाई को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए और यह देखना चाहिए कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आम लोगों की पहुंच में बनी रहें। उन्होंने जनहित से जुड़े आर्थिक मुद्दों पर लगातार चर्चा की जरूरत बताई।

गाजीपुर के बयान पर सवाल पूछे जाने पर पत्रकार से बोले- ‘प्रश्न तो सही से पूछ लो दोस्त’

बातचीत के दौरान जब गाजीपुर में उनके एक बयान को लेकर सवाल पूछा गया तो अब्बास अंसारी ने पत्रकार से प्रश्न को स्पष्ट तरीके से पूछने को कहा। उन्होंने सवाल पूछने की शैली पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किस बयान या घटना के संदर्भ में सवाल किया जा रहा है।

उन्होंने पत्रकार से कहा कि प्रश्न सही तरीके से पूछा जाए, ताकि वह उसका स्पष्ट जवाब दे सकें। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया के साथ बातचीत में सवालों के संदर्भ और तथ्यों को स्पष्ट रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

चुनावी सक्रियता के बीच जनसंपर्क पर जोर

रस्तीपुर गांव में जनसंपर्क अभियान के दौरान अब्बास अंसारी ने स्थानीय लोगों से संवाद किया और विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। उनके बयानों में युवा आंदोलन, राजनीतिक मतभेद, मीडिया की भूमिका और महंगाई जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

दरअसल, चुनावी माहौल के करीब आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगती हैं। ऐसे में नेताओं का गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क करना और स्थानीय मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। अब्बास अंसारी ने भी इस दौरान युवाओं और आम जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

कुल मिलाकर, रस्तीपुर में हुई बातचीत के दौरान अब्बास अंसारी ने जेन जी के आंदोलन को लेकर समर्थन का रुख अपनाते हुए शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील की। वहीं, ओमप्रकाश राजभर और सपा अध्यक्ष के बीच चल रही बयानबाजी से दूरी बनाए रखी। इसके अलावा उन्होंने मीडिया से विकास और महंगाई जैसे जनहित के मुद्दों पर अधिक सवाल करने की अपील की। इस दौरान उनके बयानों में युवाओं की भूमिका, लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने और आम जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिखाई दिया।

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