इटावा में जितेंद्र दोहरे का बयान: गठबंधन पर अखिलेश यादव लेंगे फैसला, जातिगत जनगणना की मांग
रिपोर्ट- रोहित सिंह चौहान
इटावा। समाजवादी पार्टी के सांसद जितेंद्र दोहरे ने इटावा में विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मुलाकात के बाद गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व ही करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जो भी फैसला लेंगे, वह पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को स्वीकार होगा।
सांसद जितेंद्र दोहरे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभिषेक उर्फ अंशुल यादव के साथ केदारेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ धार्मिक आस्था, सामाजिक न्याय और आरक्षण को लेकर भी अपनी राय रखी।
गठबंधन पर राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा फैसला
संजय सिंह और अखिलेश यादव की मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल पर जितेंद्र दोहरे ने कहा कि गठबंधन के संबंध में कोई भी निर्णय पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पार्टी के लिए जो फैसला लेंगे, वही सभी लोगों को मंजूर होगा।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाजवादी पार्टी में राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्णय को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में किसी भी संभावित गठबंधन या राजनीतिक तालमेल को लेकर अभी से किसी तरह का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में विभिन्न दलों के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर लगातार चर्चा होती रहती है। ऐसे में सपा सांसद का बयान पार्टी की आगामी रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा पर साधा निशाना
भाजपा पर निशाना साधते हुए जितेंद्र दोहरे ने धार्मिक और खान-पान से जुड़े राजनीतिक बयानों को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग मछली भोग, मुर्गा भोग और मटन भोग समेत हर तरह का भोग खाने वाले लोग हैं।
हालांकि, उन्होंने अपनी पार्टी की धार्मिक आस्था को अलग बताते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के लोग सनातन को मानने वाले हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहती है कि किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
सांसद ने कहा कि भगवान भोलेनाथ की कृपा उन लोगों पर बनी हुई है। उनके इस बयान को हाल के दिनों में धार्मिक मुद्दों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है।
उन्होंने धार्मिक आस्था के सम्मान की बात करते हुए कहा कि समाज में सभी वर्गों और समुदायों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग विचारों के बावजूद आपसी सम्मान और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना आवश्यक है।
जातिगत जनगणना के बाद आरक्षण की मांग
आरक्षण के मुद्दे पर सांसद जितेंद्र दोहरे ने समाजवादी पार्टी की लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले देश में जातिगत जनगणना कराई जानी चाहिए। इसके बाद विभिन्न सामाजिक वर्गों की वास्तविक संख्या के आधार पर उनकी हिस्सेदारी तय की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी चाहती है कि जिसकी जितनी संख्या हो, उसे उसी अनुपात में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, जातिगत जनगणना के आंकड़ों के आधार पर आरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपरक बनाया जा सकता है।
यह मुद्दा समाजवादी पार्टी की राजनीति में सामाजिक न्याय के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहा है। पार्टी की ओर से समय-समय पर जातिगत जनगणना और आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व की मांग उठाई जाती रही है।
जितेंद्र दोहरे के बयान से एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ कि सपा सांसद सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के मुद्दे को राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। उनके अनुसार, समाज के प्रत्येक वर्ग को उसकी संख्या के अनुपात में अवसर और भागीदारी मिलनी चाहिए।
केदारेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे सपा सांसद
इससे पहले सांसद जितेंद्र दोहरे, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभिषेक उर्फ अंशुल यादव के साथ केदारेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे और भगवान शिव के दर्शन किए। मंदिर में दर्शन के दौरान उन्होंने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।
मंदिर दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने गठबंधन, भाजपा की राजनीति और आरक्षण जैसे मुद्दों पर अपनी राय सामने रखी। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इन मुद्दों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा बयान
जितेंद्र दोहरे के बयान को उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां संभावित राजनीतिक गठबंधनों को लेकर अलग-अलग अटकलें सामने आती रहती हैं, वहीं दूसरी ओर सपा नेता लगातार सामाजिक न्याय, आरक्षण और जातिगत जनगणना जैसे मुद्दों को प्रमुखता दे रहे हैं।
गठबंधन को लेकर उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि अंतिम निर्णय अखिलेश यादव और पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व ही करेगा। इससे यह संदेश भी गया कि स्थानीय स्तर पर नेताओं की ओर से किसी संभावित राजनीतिक समीकरण को लेकर अंतिम घोषणा नहीं की जा रही है।
वहीं, भाजपा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने धार्मिक भावनाओं के सम्मान की बात कही। इसके साथ ही आरक्षण के मुद्दे पर जातिगत जनगणना को प्राथमिक कदम बताया। इस प्रकार उनके बयान में राजनीतिक गठबंधन, धार्मिक आस्था और सामाजिक न्याय तीनों प्रमुख मुद्दे दिखाई दिए।
सामाजिक न्याय पर सपा का जोर
समाजवादी पार्टी लंबे समय से सामाजिक न्याय की राजनीति को अपनी प्रमुख विचारधारा का हिस्सा बताती रही है। पार्टी नेताओं की ओर से पिछड़े, दलित और अन्य वंचित वर्गों की राजनीतिक एवं सामाजिक भागीदारी बढ़ाने की मांग लगातार उठाई जाती रही है।
जितेंद्र दोहरे ने भी इसी संदर्भ में जातिगत जनगणना और संख्या के अनुपात में हिस्सेदारी की बात कही। उनका कहना है कि पहले सामाजिक संरचना की वास्तविक तस्वीर सामने आनी चाहिए और फिर उसी आधार पर नीतियां तैयार की जानी चाहिए।

