यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो पर ICC की कार्रवाई, दूसरे टेस्ट में झड़प के बाद आचार संहिता उल्लंघन

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Digital UP News Desk

कोलंबो: भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन मैदान पर हुई तीखी झड़प के मामले में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने बड़ा कदम उठाया है। भारतीय सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और श्रीलंका के तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो को आईसीसी आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ आईसीसी के अनुच्छेद 2.12 के तहत कार्रवाई की गई है। यह प्रावधान किसी खिलाड़ी या मैच अधिकारी के साथ अनुचित शारीरिक संपर्क से संबंधित है।

मैच के दौरान हुई इस घटना ने कुछ समय के लिए मुकाबले का माहौल गर्म कर दिया था। हालांकि, स्थिति को जल्द ही नियंत्रित कर लिया गया और खेल आगे जारी रहा। इसके बाद मैच अधिकारियों की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले को आईसीसी की आचार संहिता के तहत देखा गया। जांच के बाद दोनों खिलाड़ियों को नियमों का उल्लंघन करने का दोषी माना गया।

क्या है पूरा मामला?

भारत और श्रीलंका के बीच दूसरे टेस्ट के पहले दिन मुकाबला काफी प्रतिस्पर्धात्मक नजर आया। इसी दौरान यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो के बीच मैदान पर विवाद की स्थिति बनी। दोनों खिलाड़ियों के बीच तीखी बहस के बाद शारीरिक संपर्क की स्थिति भी सामने आई। इस घटना को मैच अधिकारियों ने गंभीरता से लिया और इसकी रिपोर्ट संबंधित प्रक्रिया के तहत की गई।

आईसीसी की आचार संहिता खिलाड़ियों को मैदान पर खेल भावना और अनुशासन बनाए रखने के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित करती है। खासतौर पर किसी खिलाड़ी या मैच अधिकारी के साथ अनुचित शारीरिक संपर्क को नियमों का उल्लंघन माना जाता है। इसी प्रावधान के तहत जायसवाल और फर्नांडो पर कार्रवाई की गई है।

अनुच्छेद 2.12 क्या कहता है?

आईसीसी आचार संहिता का अनुच्छेद 2.12 खिलाड़ी या मैच अधिकारी के साथ अनुचित शारीरिक संपर्क से संबंधित है। क्रिकेट के मैदान पर खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा के दौरान बहस या भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है, लेकिन आईसीसी नियम खिलाड़ियों से मर्यादा बनाए रखने की अपेक्षा करते हैं।

दरअसल, क्रिकेट को लंबे समय से खेल भावना और अनुशासन के लिए जाना जाता है। इसलिए मैदान पर खिलाड़ियों के व्यवहार को लेकर आईसीसी की आचार संहिता काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। खिलाड़ी अगर निर्धारित नियमों की सीमा पार करते हैं तो उनके खिलाफ मैच अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।

यशस्वी जायसवाल की भूमिका

भारतीय टीम के युवा सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार चर्चा में रहे हैं। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के साथ-साथ वह मैदान पर ऊर्जा और उत्साह के लिए भी पहचाने जाते हैं। दूसरे टेस्ट के दौरान असिथा फर्नांडो के साथ हुई घटना ने हालांकि उन्हें अनुशासन से जुड़े मामले में ला खड़ा किया।

आईसीसी के निर्णय के बाद जायसवाल को भविष्य के मुकाबलों में मैदान पर अपने व्यवहार को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक खिलाड़ी से अपेक्षा की जाती है कि वह दबाव और प्रतिस्पर्धा के बावजूद नियमों और खेल भावना का सम्मान करे।

असिथा फर्नांडो पर भी कार्रवाई

श्रीलंका के तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो भी इस घटना में बराबर के पक्ष के रूप में सामने आए। आईसीसी ने उन्हें भी अनुच्छेद 2.12 के उल्लंघन का दोषी माना है। इस तरह कार्रवाई केवल भारतीय खिलाड़ी तक सीमित नहीं रही, बल्कि दोनों पक्षों के खिलाड़ियों को नियमों के दायरे में रखा गया।

यह फैसला आईसीसी की उस नीति को भी दर्शाता है, जिसके तहत मैदान पर अनुचित व्यवहार के मामलों में खिलाड़ियों की राष्ट्रीयता के आधार पर कोई अलग मानक नहीं अपनाया जाता। यदि किसी खिलाड़ी का व्यवहार निर्धारित आचार संहिता का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

मैदान पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अनुशासन जरूरी

टेस्ट क्रिकेट में खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक है। लंबे प्रारूप में एक-एक गेंद और रन का महत्व बढ़ जाता है। ऐसे में कई बार मैदान पर खिलाड़ियों के बीच बहस या तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। हालांकि, प्रतिस्पर्धा और अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है।

यही कारण है कि आईसीसी ने खिलाड़ियों के लिए आचार संहिता तैयार की है। इसका उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अनुशासन, सम्मान और खेल भावना को बनाए रखना भी है। खिलाड़ियों से उम्मीद की जाती है कि वे विरोधी टीम के सदस्यों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें और किसी भी परिस्थिति में अनुचित शारीरिक संपर्क से बचें।

मैच अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण

ऐसे मामलों में मैच अधिकारियों की भूमिका बेहद अहम होती है। मैदान पर होने वाली घटनाओं को अधिकारी देखते हैं और जरूरत पड़ने पर उनकी रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसके बाद संबंधित नियमों के आधार पर मामले की समीक्षा की जाती है।

यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो से जुड़े मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। दोनों खिलाड़ियों को आचार संहिता के अनुच्छेद 2.12 के तहत दोषी पाया गया। इस कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के साथ-साथ उनके आचरण को भी गंभीरता से लिया जाता है।

क्रिकेट में खेल भावना का महत्व

क्रिकेट सिर्फ बल्लेबाजी, गेंदबाजी और जीत-हार का खेल नहीं है। खेल भावना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। मैदान पर खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होने के बावजूद एक-दूसरे का सम्मान करना क्रिकेट की परंपरा का हिस्सा रहा है।

हालांकि, आधुनिक क्रिकेट में मुकाबले का दबाव काफी बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय मैचों में हर गेंद पर खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया और व्यवहार कैमरों में रिकॉर्ड होता है। ऐसे में मैदान पर छोटी-सी घटना भी तुरंत चर्चा का विषय बन सकती है। इसलिए खिलाड़ियों के लिए अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

भारतीय और श्रीलंकाई टीमों के लिए संदेश

इस घटना के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण संदेश है कि मुकाबला चाहे कितना भी रोमांचक क्यों न हो, आचार संहिता की सीमा का पालन करना जरूरी है। भारत और श्रीलंका के बीच मुकाबले हमेशा प्रतिस्पर्धात्मक रहे हैं और दोनों टीमों के खिलाड़ी मैदान पर पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन करते हैं।

इसके बावजूद खेल की गरिमा बनाए रखना दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है। आईसीसी की कार्रवाई इसी दिशा में एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखी जा सकती है।

आगे क्या होगा?

यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो के मामले में आईसीसी की कार्रवाई के बाद दोनों खिलाड़ियों के लिए मैदान पर अनुशासन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। ऐसी घटनाओं से खिलाड़ियों को यह सीख भी मिलती है कि प्रतिस्पर्धा के दौरान भावनाओं पर नियंत्रण जरूरी है।

कुल मिलाकर, दूसरे टेस्ट के पहले दिन हुई घटना ने क्रिकेट में अनुशासन और खेल भावना की अहमियत को एक बार फिर सामने ला दिया है। आईसीसी द्वारा दोनों खिलाड़ियों को समान रूप से आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी ठहराया जाना यह दर्शाता है कि मैदान पर व्यवहार को लेकर नियम सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू होते हैं।

भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट मुकाबला भले ही मैदान पर रोमांच और प्रतिस्पर्धा से भरपूर हो, लेकिन खिलाड़ियों से उम्मीद यही रहेगी कि वे आगे खेल भावना और अनुशासन की मिसाल पेश करें। क्रिकेट की असली खूबसूरती भी इसी में है कि कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद खिलाड़ियों के बीच सम्मान और खेल की गरिमा बनी रहे।

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