पूर्व IPS आदित्य प्रकाश वर्मा ने आजाद समाज पार्टी से दिया इस्तीफा, हाथरस से चुनाव लड़ने की अटकलों पर लगा विराम
Digital UP News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी आदित्य प्रकाश वर्मा ने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने उन्हें हाल ही में हाथरस विधानसभा सीट का प्रभारी बनाया था। ऐसे में माना जा रहा था कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में वे हाथरस विधानसभा क्षेत्र से आजाद समाज पार्टी के संभावित प्रत्याशी हो सकते हैं। हालांकि, अब उनके इस्तीफे के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है।
आदित्य प्रकाश वर्मा ने अपना त्यागपत्र पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को भेजा है। उन्होंने इस्तीफे में पार्टी छोड़ने की वजह व्यक्तिगत बताई है। अपने संक्षिप्त त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत कारणों से आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं और पार्टी नेतृत्व से उनका त्यागपत्र स्वीकार करने का अनुरोध किया है।
हाथरस विधानसभा सीट की मिली थी जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आजाद समाज पार्टी ने आदित्य प्रकाश वर्मा को हाथरस की सुरक्षित विधानसभा सीट का क्षेत्र प्रभारी नियुक्त किया था। पार्टी में शामिल होने के कुछ ही समय बाद उन्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने से यह संकेत माना गया कि संगठन उनके अनुभव और सामाजिक प्रभाव का चुनावी लाभ उठाना चाहता है।
चंद्रशेखर आजाद ने स्वयं आदित्य प्रकाश वर्मा को पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। इसके बाद वे हाथरस क्षेत्र में पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय दिखाई देने लगे थे। उनकी प्रशासनिक पृष्ठभूमि और सामाजिक गतिविधियों को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हुई थी कि पार्टी उन्हें हाथरस से विधानसभा चुनाव में उतार सकती है।
हालांकि, अब अचानक इस्तीफा देने से राजनीतिक समीकरण को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। वर्मा ने अपने त्यागपत्र में केवल व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया है। इसलिए उनके निर्णय के पीछे किसी राजनीतिक मतभेद या अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं वर्मा
आदित्य प्रकाश वर्मा जून 2025 में पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने हाथरस सहित आसपास के क्षेत्रों में सामाजिक गतिविधियों में अपनी सक्रियता बनाए रखी। यही वजह रही कि राजनीति में प्रवेश के बाद भी उन्हें एक ऐसे पूर्व अधिकारी के रूप में देखा गया, जिनकी समाज में अलग पहचान है।
करीब 36 वर्षों तक प्रशासनिक और पुलिस सेवा से जुड़े रहने के कारण उनके पास व्यापक प्रशासनिक अनुभव रहा है। इसी अनुभव को देखते हुए आजाद समाज पार्टी के लिए उनका जुड़ना महत्वपूर्ण माना गया था। इसके अलावा, शिक्षा और जरूरतमंद लोगों की मदद से जुड़े उनके सामाजिक कार्यों की भी चर्चा होती रही है।
अब सवाल यह है कि आखिर पार्टी में शामिल होने के कुछ ही समय बाद उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया? इसका स्पष्ट जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है। चूंकि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों को इस्तीफे की वजह बताया है, इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
करीब 36 साल का प्रशासनिक और पुलिस अनुभव
आदित्य प्रकाश वर्मा का प्रशासनिक और पुलिस सेवा का लंबा अनुभव रहा है। उत्तर प्रदेश की राज्य पुलिस सेवा में उन्हें पीपीएस अधिकारी के रूप में 14 जुलाई 1997 को फिरोजाबाद में पहली तैनाती मिली थी। इसके बाद उन्होंने पुलिस विभाग में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं।
सेवा के दौरान वे एटा की 43वीं पीएसी वाहिनी के कमांडेंट पद से सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2020 में उन्हें आईपीएस कैडर प्रदान किया गया। उस समय वे कासगंज में अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे।
पुलिस सेवा में आने से पहले भी वर्मा विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थानों में काम कर चुके थे। वर्ष 1989 से 1990 तक वे इलाहाबाद बैंक में लघु उद्योग क्षेत्राधिकारी रहे। इसके बाद 1991-92 में लघु उद्योग विकास बैंक में प्रबंधक के रूप में कार्य किया। वर्ष 1992-93 में वे फिर इलाहाबाद बैंक में लघु उद्योग क्षेत्राधिकारी रहे।
इसी क्रम में वर्ष 1993-94 में उन्होंने भारतीय औद्योगिक विकास बैंक में प्रबंधक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 1995 से 1997 तक वे व्यापार कर अधिकारी रहे। प्रशासनिक और वित्तीय क्षेत्र में काम करने के बाद उन्होंने पुलिस सेवा में प्रवेश किया और लंबे समय तक कानून-व्यवस्था से जुड़े दायित्व निभाए।
जालौन के कालपी में हुआ जन्म
आदित्य प्रकाश वर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कालपी कस्बे में हुआ था। उनके पिता का नाम स्वर्गीय वीपी वर्मा और माता का नाम स्वर्गीय कमला वर्मा था। पुलिस सेवा में रहते हुए उन्होंने अपनी कार्यशैली के साथ सामाजिक सरोकारों को भी महत्व दिया।
आईपीएस कैडर मिलने के बाद उन्होंने बैज लगाने के अवसर को भी अपने परिवार के साथ साझा किया था। बताया जाता है कि उन्होंने किसी वरिष्ठ अधिकारी के बजाय अपनी पत्नी और बेटी से आईपीएस का बैज लगवाया था। यह प्रसंग उनके लिए पारिवारिक भावनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षण माना गया।
गरीब छात्रा की पढ़ाई का उठाया था जिम्मा
पुलिस अधिकारी रहते हुए भी आदित्य प्रकाश वर्मा सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। एटा में उन्होंने एक गरीब और प्रतिभावान छात्रा शगुफ्ता की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाई थी। उन्होंने उसकी पढ़ाई का खर्च वहन करने का निर्णय लिया था।
उस समय वर्मा ने कहा था कि उन्होंने स्वयं जीवन में अभावों को करीब से देखा है, इसलिए जरूरतमंद लोगों की परेशानियों को बेहतर तरीके से समझते हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि वे अपने वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा गरीब बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने का संकल्प रखते हैं।
इस तरह उनका सार्वजनिक जीवन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहा। शिक्षा और जरूरतमंद परिवारों की सहायता से जुड़े उनके प्रयासों ने उन्हें सामाजिक स्तर पर भी पहचान दिलाई।
इस्तीफे के बाद राजनीतिक भविष्य पर निगाहें
आजाद समाज पार्टी से आदित्य प्रकाश वर्मा के इस्तीफे के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम पर सभी की नजरें हैं। फिलहाल उन्होंने पार्टी छोड़ने का कारण व्यक्तिगत बताया है और किसी दूसरे राजनीतिक दल में जाने की घोषणा नहीं की है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर विभिन्न दल अपनी तैयारियों को तेज कर रहे हैं। ऐसे समय में एक पूर्व आईपीएस अधिकारी का किसी राजनीतिक दल से जुड़ना और फिर जल्द ही उससे अलग हो जाना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया है।
खास तौर पर हाथरस विधानसभा सीट को लेकर पार्टी की रणनीति में भी बदलाव की संभावना है। चंद्रशेखर आजाद की पार्टी ने चुनावी तैयारियों के तहत कई सीटों पर अपने संभावित प्रत्याशियों और प्रभारियों को सक्रिय किया है। ऐसे में हाथरस में अब पार्टी को नए चेहरे की तलाश करनी पड़ सकती है।
फिलहाल आदित्य प्रकाश वर्मा के इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत कारणों के अलावा कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। इसलिए राजनीतिक मतभेद या भविष्य की किसी नई राजनीतिक भूमिका को लेकर लगाई जा रही अटकलों की पुष्टि नहीं की जा सकती। यदि आने वाले दिनों में वर्मा किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होते हैं, तो उनके मौजूदा निर्णय को नए राजनीतिक संदर्भ में देखा जा सकता है। वहीं, यदि वे सामाजिक गतिविधियों तक ही सीमित रहते हैं, तो उनका इस्तीफा व्यक्तिगत कारणों से लिया गया फैसला माना जाएगा।

