एमवीडीए ने बदली मानचित्र स्वीकृति व्यवस्था, फास्ट पास पोर्टल से 75% मामलों का समय पर निस्तारण
रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज
मथुरा। भवन निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत कराने की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने की दिशा में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) ने महत्वपूर्ण बदलाव किया है। प्राधिकरण ने मानचित्र स्वीकृति की पुरानी व्यवस्था को समाप्त करते हुए फास्ट पास पोर्टल को पूरी तरह प्रभावी कर दिया है। नई ऑनलाइन व्यवस्था का शुरुआती परिणाम भी सकारात्मक रहा है। जुलाई में पोर्टल पर प्राप्त करीब 75 प्रतिशत मामलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर या उससे पहले मानचित्रों को स्वीकृति प्रदान की गई।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब भवन निर्माण की अनुमति के लिए आवेदकों को प्राधिकरण के अलग-अलग पटलों और विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। आवेदन से लेकर मानचित्र स्वीकृति और जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी की प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
ऑनलाइन होगी मानचित्र स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया
मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लक्ष्मी नागप्पन के अनुसार, फास्ट पास पोर्टल को मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया है। नई व्यवस्था में आवेदक को पोर्टल पर मानचित्र के साथ जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होंगे। इसके बाद आवेदन की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से आगे बढ़ेगी।
इसके अलावा, आवेदन की स्थिति भी पोर्टल पर देखी जा सकेगी। इससे आवेदक को यह जानने के लिए कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे कि उसका आवेदन किस स्तर पर है। साथ ही, निर्धारित समय सीमा में आवेदन का निस्तारण होने से प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की संभावना भी कम होगी।
दरअसल, भवन निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया में कई बार अलग-अलग विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है। पुरानी व्यवस्था में इसके लिए संबंधित विभागों में पत्र लेकर जाना पड़ सकता था। अब फास्ट पास पोर्टल के माध्यम से यह प्रक्रिया भी ऑनलाइन कर दी गई है।
जुलाई में 75 प्रतिशत मामलों का समय पर निस्तारण
फास्ट पास पोर्टल के प्रभावी होने के बाद जुलाई में इसके परिणाम सामने आए। प्राधिकरण के अनुसार, पोर्टल पर प्राप्त करीब 75 प्रतिशत मामलों में मानचित्रों को निर्धारित समय सीमा में या उससे पहले स्वीकृति प्रदान की गई। इससे संकेत मिलता है कि डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से मानचित्र स्वीकृति की गति में सुधार हुआ है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल आवेदन को ऑनलाइन लेना नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है। इसलिए आवेदक को आवेदन जमा करने के बाद उसकी प्रगति की जानकारी भी ऑनलाइन मिल सकेगी। इससे प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने के साथ-साथ आवेदकों के लिए सुविधाजनक भी होगी।
500 वर्गमीटर तक के भूखंडों के लिए बड़ी राहत
नई व्यवस्था के तहत मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसके अनुसार 0 से 100 वर्गमीटर तक के भूखंडों को लो रिस्क, 100 से 500 वर्गमीटर तक के भूखंडों को मीडियम रिस्क और 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों को हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया है।
लो रिस्क श्रेणी में आने वाले 100 वर्गमीटर तक के आवासीय भूखंडों के मानचित्र की स्वीकृति आवेदक स्वयं पोर्टल के माध्यम से प्राप्त कर सकता है। यानी निर्धारित शर्तों और प्रक्रिया का पालन करने पर ऐसे मामलों में प्राधिकरण की अलग से स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी।
वहीं, प्राधिकरण से स्वीकृत कॉलोनियों में 500 वर्गमीटर तक के आवासीय भूखंडों के मानचित्र आर्किटेक्ट के माध्यम से पोर्टल पर स्वीकृत कराए जा सकते हैं। इससे मध्यम आकार के आवासीय भूखंडों के लिए भी प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल हो गई है।
हालांकि, व्यावसायिक भूखंडों के लिए अलग सीमा निर्धारित की गई है। नई व्यवस्था के तहत 30 वर्गमीटर तक के व्यावसायिक भूखंडों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार स्वीकृति की सुविधा दी गई है।
एनओसी के लिए नहीं लगाने होंगे विभागों के चक्कर
फास्ट पास पोर्टल की एक अहम विशेषता विभिन्न विभागों से एनओसी प्राप्त करने की ऑनलाइन व्यवस्था है। आवेदन के आधार पर संबंधित विभाग के लिए एनओसी का अनुरोध पोर्टल से स्वत: तैयार होकर भेजा जाएगा। इसके लिए आवेदक को अलग-अलग कार्यालयों में जाकर पत्र जमा कराने की जरूरत नहीं होगी।
इस व्यवस्था से मानचित्र स्वीकृति और एनओसी की प्रक्रिया के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद है। साथ ही, आवेदन की स्थिति एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने के कारण आवेदक को अलग-अलग विभागों से जानकारी लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी भवन निर्माण के लिए किसी विभाग की एनओसी जरूरी है, तो आवेदन प्रक्रिया के दौरान पोर्टल के माध्यम से संबंधित विभाग तक अनुरोध पहुंचाया जा सकेगा। इससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और डिजिटल रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर
प्राधिकरण का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। आवेदन कब जमा हुआ, उसकी प्रक्रिया किस स्तर पर है और कब तक उसका निस्तारण होना है, जैसी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहने से आवेदक को स्पष्ट स्थिति मिल सकेगी।
इसके साथ ही, समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था अधिकारियों और संबंधित विभागों की जवाबदेही भी तय करने में मदद कर सकती है। खासकर उन मामलों में जहां निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई जरूरी है, ऑनलाइन सिस्टम प्रक्रिया की निगरानी को आसान बनाएगा।
आवेदकों को मिलेगी समय और संसाधनों की बचत
भवन निर्माण की योजना बनाने वाले लोगों के लिए मानचित्र स्वीकृति एक महत्वपूर्ण चरण होता है। ऐसे में आवेदन की प्रक्रिया जितनी सरल होगी, निर्माण कार्य की तैयारी भी उतनी ही आसानी से आगे बढ़ सकेगी। फास्ट पास पोर्टल के माध्यम से आवेदन ऑनलाइन जमा करने, दस्तावेज अपलोड करने, एनओसी के लिए अनुरोध भेजने और आवेदन की स्थिति देखने की सुविधा मिलने से आवेदकों को समय और संसाधनों की बचत होगी।
वहीं, आर्किटेक्ट के माध्यम से स्वीकृति की सुविधा मिलने से निर्धारित श्रेणी के आवासीय भूखंडों के मामलों में प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित हो सकती है। इसके लिए आवेदकों को पोर्टल पर निर्धारित नियमों और आवश्यक दस्तावेजों के अनुसार आवेदन करना होगा।
डिजिटल व्यवस्था से बदल रहा है कामकाज का तरीका
मथुरा-वृंदावन जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में भवन निर्माण और विकास से जुड़े आवेदनों की संख्या महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति व्यवस्था प्राधिकरण के कामकाज को भी अधिक व्यवस्थित करने में मदद कर सकती है।
फास्ट पास पोर्टल की व्यवस्था लागू होने के बाद अब मानचित्र स्वीकृति, एनओसी और आवेदन की स्थिति जैसी सेवाओं को एक ही डिजिटल प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है। जुलाई में करीब 75 प्रतिशत मामलों का समय पर या उससे पहले निस्तारण होना इस व्यवस्था के शुरुआती प्रभाव को दर्शाता है।
हालांकि, डिजिटल व्यवस्था की सफलता के लिए आवेदकों की ओर से सही दस्तावेज उपलब्ध कराना और निर्धारित नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा। आवेदन में किसी प्रकार की कमी होने पर प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए आवेदकों को पोर्टल पर आवेदन करने से पहले आवश्यक दस्तावेज और संबंधित नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

