कानपुर में विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह 2026 का आयोजन, जागरूकता के साथ रचनात्मक प्रतियोगिताएं
रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा
कानपुर: जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज एवं एल.एल.आर. अस्पताल, कानपुर के मानसिक रोग विभाग की ओर से विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह 2026 के अंतर्गत विभिन्न जागरूकता एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ मानसिक रोगों से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करना और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करना है।
इस वर्ष विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम “Lived Experiences Heard: Real Voices, Real Change” रखी गई है। इस थीम के माध्यम से उन लोगों के वास्तविक अनुभवों को समझने और उन्हें महत्व देने पर जोर दिया जा रहा है, जो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों से गुजर चुके हैं या वर्तमान में उनका सामना कर रहे हैं। इसके साथ ही समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता पर जोर
मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के तहत आयोजित कार्यक्रमों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही महत्वपूर्ण है। हालांकि, कई बार मानसिक परेशानियों को लेकर लोग खुलकर बात नहीं कर पाते हैं।
ऐसे में जागरूकता कार्यक्रमों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इसके माध्यम से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समझने, जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से सलाह लेने और प्रभावित व्यक्ति के प्रति सहयोगात्मक रवैया अपनाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि मानसिक रोगों को लेकर समाज में मौजूद भ्रांतियों और पूर्वाग्रहों को कम करने के लिए सही जानकारी और संवेदनशील संवाद जरूरी है। विशेष रूप से मरीजों के अनुभवों को समझना और उनकी बात को सम्मानपूर्वक सुनना मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
डॉ. विशाल सिन्हा ने साझा किए विचार
मानसिक रोग विभाग में आयोजित कार्यक्रम में सेंट्रल साइकिएट्रिक सोसाइटी के प्रेसिडेंट एवं एस.एन.एम.सी. आगरा के विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल सिन्हा ने अतिथि वक्ता के रूप में प्रतिभाग किया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक रोगों से जुड़े सामाजिक पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करने और मरीजों के अनुभवों को संवेदनशीलता के साथ समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके संबोधन में इस बात को प्रमुखता दी गई कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को केवल चिकित्सकीय दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि व्यक्ति के सामाजिक और भावनात्मक अनुभवों के संदर्भ में भी समझना आवश्यक है।
इसके अलावा, उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक वातावरण तैयार करने और जरूरतमंद लोगों के प्रति सहानुभूति रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
मेडिकल छात्रों के लिए हुईं रचनात्मक प्रतियोगिताएं
विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के दौरान मेडिकल छात्रों और अन्य प्रतिभागियों के लिए विभिन्न रचनात्मक एवं जागरूकता आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें स्किट प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता और स्लोगन प्रतियोगिता प्रमुख रहीं।
इन गतिविधियों का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं था, बल्कि रचनात्मक माध्यमों से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश समाज तक पहुंचाना भी था। प्रतिभागियों ने अपने पोस्टर, स्लोगन और स्किट के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने, मानसिक रोगों को लेकर जागरूक रहने और प्रभावित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने का संदेश दिया।
विशेष रूप से स्किट और पोस्टर जैसी गतिविधियों के जरिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। वहीं, स्लोगन प्रतियोगिता के माध्यम से छोटे और प्रभावशाली संदेशों द्वारा लोगों का ध्यान मानसिक स्वास्थ्य की ओर आकर्षित किया गया।
मानसिक रोगों से जुड़े कलंक को कम करने की कोशिश
मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक सामाजिक कलंक भी माना जाता है। कई बार मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या का सामना कर रहे व्यक्ति या उनके परिवार को सामाजिक धारणा के कारण अपनी परेशानी साझा करने में कठिनाई होती है।
इसी वजह से विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह जैसे आयोजनों के माध्यम से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी देने और गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास किया जाता है। कार्यक्रम में भी इसी दिशा में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
इसके साथ ही, मरीजों की बात सुनने और उनके अनुभवों को समझने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया। “Lived Experiences Heard: Real Voices, Real Change” थीम इसी विचार को आगे बढ़ाती है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े वास्तविक अनुभवों को सुना और समझा जाए, ताकि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।
चिकित्सकों और रेजिडेंट्स की रही सहभागिता
कार्यक्रम में मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी सहित विभाग के चिकित्सकों और रेजिडेंट्स ने सहभागिता की। कार्यक्रम में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आयुषी डी. सिंघ, डॉ. कृतिका चावला, डॉ. अमन नकवी, डॉ. अमृता भाटिया मौजूद रहीं।
इसके अलावा सीनियर रेजिडेंट डॉ. राधा, डॉ. शुभ्रा, डॉ. विदुषी और डॉ. क्षीतिज ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। वहीं, जूनियर रेजिडेंट डॉ. सौम्या, डॉ. अभिषेक और डॉ. मनीष तथा मेडिकल ऑफिसर डॉ. ब्रजेश सहित विभाग के अन्य चिकित्सक और रेजिडेंट उपस्थित रहे।
मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का संदेश
विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह 2026 के तहत आयोजित इन गतिविधियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक और संवेदनशील सोच विकसित करने का संदेश दिया गया। साथ ही, रचनात्मक प्रतियोगिताओं के जरिए मेडिकल छात्रों को इस विषय पर अपनी समझ और विचार व्यक्त करने का अवसर भी मिला।
कुल मिलाकर, जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज एवं एल.एल.आर. अस्पताल में आयोजित यह कार्यक्रम मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ समाज में मानसिक रोगों से जुड़े कलंक को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। कार्यक्रम के जरिए यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समझना, प्रभावित व्यक्ति की बात सुनना और जरूरत के समय उचित सहायता उपलब्ध कराना सामूहिक जिम्मेदारी है।

