यूपी में चीनी के बढ़ते दाम ने बिगाड़ा रसोई का बजट, दिवाली तक 80 किलो पहुंचने की आशंका

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Digital UP News

लखनऊ/कानपुर: त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के कई शहरों में चीनी के खुदरा दाम में तेजी देखने को मिली है। उपलब्ध स्थानीय बाजार आंकड़ों के मुताबिक, कुछ जिलों में महज 15 से 20 दिनों के भीतर चीनी की कीमत में करीब 15 से 17 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है।

कानपुर में जहां कुछ समय पहले चीनी करीब 44 रुपये किलो बिक रही थी, वहीं अब इसका खुदरा भाव 60 से 61 रुपये किलो तक पहुंच गया है। इसी तरह झांसी, शाहजहांपुर और फर्रुखाबाद में भी कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी बताई जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में त्योहारी मांग बढ़ने के साथ कीमतों को लेकर बाजार में और दबाव बनने की आशंका जताई जा रही है।

कई जिलों में तेजी से बढ़े चीनी के दाम

स्थानीय बाजार से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, कानपुर में करीब 17 दिनों में चीनी के भाव 44 रुपये से बढ़कर 60-61 रुपये प्रति किलो हो गए। वहीं झांसी में लगभग 18 दिनों के दौरान कीमत 46 रुपये से बढ़कर 63 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।

शाहजहांपुर में भी करीब 15 दिनों के भीतर चीनी का भाव 48 रुपये से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। फर्रुखाबाद में लगभग 20 दिनों में कीमत 45 रुपये से बढ़कर 60 रुपये किलो तक पहुंच गई।

सबसे अधिक तेजी की बात करें तो चंदौली के नौगढ़ बाजार में एक ही शाम में चीनी के भाव 56 रुपये से बढ़कर 70 रुपये किलो तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इस तरह अलग-अलग जिलों में कीमतों में तेजी का असर उपभोक्ताओं पर दिखाई देने लगा है।

हालांकि, स्थानीय बाजार में कीमतों में अंतर मांग, आपूर्ति, थोक भाव और कारोबारी स्तर पर उपलब्ध स्टॉक के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

देशभर में भी बढ़ी औसत खुदरा कीमत

केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से दी गई जानकारी के मुताबिक, 18 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 52.3 रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी। एक साल पहले यह कीमत लगभग 46.34 रुपये प्रति किलो बताई गई थी।

इस तुलना से स्पष्ट है कि पिछले एक साल में भी चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। वहीं, उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानीय बाजारों में खुदरा कीमत राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज की जा रही है।

इसके अलावा मिल स्तर पर भी चीनी के भाव में तेजी बताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मिल भाव 5,400 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर तक पहुंच गए हैं। यदि यह तेजी आगे भी बनी रहती है तो खुदरा बाजार में इसका असर और बढ़ सकता है।

चीनी महंगी होने की क्या वजह है?

चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे प्रमुख कारण आगामी 2026-27 चीनी सीजन में उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक को लेकर बनी अनिश्चितता है।

इसके अलावा गन्ने के रकबे में कमी की बात भी सामने आ रही है। यदि गन्ने की उपलब्धता कम होती है तो चीनी मिलों के उत्पादन और बाजार में आने वाली चीनी की मात्रा पर असर पड़ सकता है।

वहीं, गन्ने के एक हिस्से का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन के लिए किए जाने से भी चीनी उत्पादन पर प्रभाव पड़ने की चर्चा है। सरकार लंबे समय से इथेनॉल मिश्रण और गन्ने से जुड़े वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देती रही है। ऐसे में चीनी और इथेनॉल के बीच कच्चे माल के उपयोग का संतुलन भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

त्योहारों से बढ़ेगी मांग

चीनी की कीमतों में तेजी का एक बड़ा कारण त्योहारी सीजन भी माना जा रहा है। रक्षाबंधन के बाद नवरात्र और फिर दशहरा व दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार आने वाले हैं। इन त्योहारों के दौरान मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और घरेलू पकवानों में चीनी की खपत बढ़ जाती है।

इसके अलावा मिठाई कारोबारियों और खाद्य उत्पाद निर्माताओं की ओर से भी मांग बढ़ती है। परिणामस्वरूप यदि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति नहीं रहती है तो कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

यही वजह है कि कारोबारियों और उपभोक्ताओं की नजर अब आने वाले हफ्तों में चीनी की कीमतों पर बनी हुई है।

जमाखोरी को लेकर भी चिंता

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच कुछ जिलों में जमाखोरी की शिकायतों की बात भी सामने आई है। आरोप है कि पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के बावजूद कुछ कारोबारियों द्वारा माल की आपूर्ति रोककर बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश की जा सकती है।

हालांकि, इस तरह के आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकती है। यदि किसी क्षेत्र में वास्तव में जमाखोरी या अनुचित तरीके से स्टॉक रोकने की शिकायत मिलती है तो प्रशासन और संबंधित विभागों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

बाजार में पारदर्शी आपूर्ति बनाए रखना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि त्योहारी सीजन में किसी भी आवश्यक खाद्य वस्तु की कृत्रिम कमी का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

सरकार ने लागू की स्टॉक होल्डिंग लिमिट

चीनी की कीमतों में अनावश्यक तेजी और जमाखोरी पर नियंत्रण के लिए सरकार की ओर से स्टॉक सीमा से जुड़ी व्यवस्था लागू की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चीनी डीलरों के लिए 1 अगस्त से 30 नवंबर तक स्टॉक होल्डिंग लिमिट लागू की गई है।

इसका उद्देश्य बाजार में पर्याप्त मात्रा में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण रखना है।

इसके साथ ही बाजार की निगरानी और स्टॉक की जानकारी की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन मिलता है तो संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकते हैं।

दिवाली तक 70-80 रुपये किलो पहुंचने का दावा

कानपुर के कुछ व्यापारियों ने चिंता जताई है कि यदि बाजार में आपूर्ति और कीमतों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रहा तो दिवाली तक चीनी के भाव 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकते हैं।

हालांकि, यह फिलहाल व्यापारियों की आशंका है, कोई निश्चित कीमत का पूर्वानुमान नहीं। वास्तविक कीमत आने वाले दिनों में उत्पादन, स्टॉक, सरकारी नीतियों, थोक बाजार और त्योहारी मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।

इसलिए उपभोक्ताओं के लिए भी यह जरूरी है कि वे घबराकर जरूरत से ज्यादा खरीदारी न करें। वहीं, प्रशासन के स्तर पर बाजार में कीमतों और स्टॉक की नियमित निगरानी से स्थिति को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।

आम परिवारों पर पड़ेगा सीधा असर

चीनी रोजमर्रा की रसोई में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख खाद्य वस्तुओं में शामिल है। चाय, मिठाई, घरेलू पकवान और कई अन्य खाद्य पदार्थों में इसका उपयोग होता है। ऐसे में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने पर इसका सीधा असर परिवारों के मासिक बजट पर पड़ सकता है।

खासकर त्योहारों के दौरान जब घरों में मिठाइयां और अन्य पकवान अधिक बनाए जाते हैं, तब चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ सकती है। इसके अलावा बाजार में तैयार मिठाइयों की कीमतों पर भी कच्चे माल की लागत का असर पड़ सकता है।

आगे बाजार पर रहेगी नजर

फिलहाल उत्तर प्रदेश के कई शहरों में चीनी के दामों में तेजी ने बाजार और उपभोक्ताओं दोनों का ध्यान खींचा है। एक ओर त्योहारी मांग बढ़ने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर उत्पादन और स्टॉक को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है।

ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की निगरानी, स्टॉक होल्डिंग लिमिट का पालन, बाजार में आपूर्ति और चीनी मिलों से आने वाले स्टॉक की स्थिति काफी महत्वपूर्ण होगी। यदि आपूर्ति सामान्य रहती है और जमाखोरी पर प्रभावी नियंत्रण होता है तो कीमतों में अनावश्यक तेजी पर अंकुश लगाया जा सकता है।

फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि आने वाले त्योहारी सीजन में चीनी के भाव किस स्तर पर टिकते हैं। वहीं, व्यापारियों की ओर से जताई जा रही 70 से 80 रुपये किलो तक पहुंचने की आशंका कितनी सही साबित होती है, यह आने वाले दिनों के बाजार रुझान से ही स्पष्ट होगा।

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