सीएम योगी का अखिलेश यादव पर हमला, बोले पीडीए की परिभाषा बदलते हैं, गिद्ध जिस पेड़ पर चढ़े उसे सुखा डालते हैं
Digital UP News Desk
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनकी पार्टी की राजनीति पर तीखा हमला बोला। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे कल्याण सिंह की जयंती/स्मृति से जुड़े संदर्भ में बोलते हुए सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति और उसके राजनीतिक इस्तेमाल पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग समय और परिस्थितियों के अनुसार अपनी राजनीतिक भाषा और परिभाषाएं बदलते रहते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग अपने राजनीतिक हित के अनुसार शब्दों की व्याख्या बदलते हैं, उनके बयानों पर भरोसा करना कठिन है। उन्होंने पीडीए को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘पी’ की परिभाषा पहले पिछड़ा, फिर पंडित और आगे चलकर पाकिस्तान से भी जोड़ने की कोशिश की जा सकती है। सीएम योगी का यह बयान समाजवादी पार्टी की सामाजिक न्याय और पीडीए की राजनीति पर सीधा राजनीतिक प्रहार माना जा रहा है।
कल्याण सिंह को लेकर सपा पर साधा निशाना
सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कल्याण सिंह के प्रति जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं था, बल्कि उन लोगों की भावनाओं का भी अपमान था, जो उनके जीवन और योगदान को हिंदू गौरव से जोड़कर देखते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कल्याण सिंह ने अपने जीवन में जिन मूल्यों और सिद्धांतों को अपनाया, उन पर वह अंत तक कायम रहे। उनके अनुसार, बाबू जी ने जो कहा, उसे करके भी दिखाया। यही कारण है कि उनका जीवन आज भी राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बना हुआ है।
सीएम योगी ने आरोप लगाया कि सपा मुखिया अखिलेश यादव के मन में कल्याण सिंह के प्रति द्वेष का भाव रहा है। उन्होंने कहा कि किसी बड़े नेता के निधन या स्मृति के अवसर पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सम्मान व्यक्त करना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले को राजनीतिक और सामाजिक सम्मान से जोड़ते हुए सपा नेतृत्व पर निशाना साधा।
मायावती के कदम की सीएम योगी ने की चर्चा
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मायावती ने कल्याण सिंह के प्रति अपना दायित्व निभाते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
सीएम योगी ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह केवल जातीय स्तर पर अपमान का विषय नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों की भावनाओं से जुड़ा मामला है, जो कल्याण सिंह के योगदान को महत्वपूर्ण मानते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में रहे व्यक्तित्वों के योगदान का सम्मान किया जाना चाहिए।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन सामान्य किसान परिवार से निकलकर बड़े राजनीतिक मुकाम तक पहुंचने की मिसाल है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को बड़ा केवल उसका पद नहीं बनाता, बल्कि उसकी सोच, कर्म, सिद्धांत और समाज के प्रति उसका योगदान उसे बड़ा बनाते हैं।
‘बड़ा आदमी कर्मों से बनता है’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बड़ा आदमी केवल बड़े पद पर पहुंचने से नहीं बनता। व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों और विचारों से होती है। उन्होंने कल्याण सिंह को इसी दृष्टि से याद करते हुए कहा कि सामान्य किसान परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपने कर्म, मूल्य और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण देश और प्रदेश की राजनीति में अलग पहचान बनाई।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कल्याण सिंह अपनी कर्मठता और सिद्धांतों के प्रति अडिग रहने के कारण हमेशा स्मरणीय रहेंगे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन जिन लोगों ने अपने मूल्यों के साथ समझौता नहीं किया, उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाता है।
साक्षी महाराज के बयान का भी किया उल्लेख
सीएम योगी ने भाजपा सांसद साक्षी महाराज के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जो बात कही है, वह राजनीतिक परिस्थितियों को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और नेता समय के अनुसार अपना रुख बदलते हैं।
इसी संदर्भ में उन्होंने एक तीखी राजनीतिक उपमा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ऐसे लोग गिद्ध की तरह होते हैं, जिस पेड़ पर चढ़ते हैं, उसे सुखा डालते हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान को विपक्षी राजनीति और समाजवादी पार्टी की रणनीति पर उनके हमले के रूप में देखा जा रहा है।
कन्नौज मेडिकल कॉलेज के नाम का भी जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कन्नौज में मेडिकल कॉलेज के नाम से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के नाम पर मेडिकल कॉलेज बनाया गया था, लेकिन बाद में उसके नाम से आंबेडकर का नाम हटा दिया गया।
सीएम योगी ने कहा कि इस संबंध में मंत्री असीम अरुण की ओर से जानकारी दिए जाने के बाद दोबारा मेडिकल कॉलेज के नाम में बाबा साहेब आंबेडकर का नाम शामिल किया गया। मुख्यमंत्री ने इस उदाहरण के जरिए विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाया और कहा कि महापुरुषों के नाम और उनके योगदान को सम्मान देना जरूरी है।
कल्याण सिंह का राजनीतिक जीवन रहा महत्वपूर्ण
कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की राजनीति को प्रभावित किया और भाजपा के संगठन तथा विचारधारा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके जीवन को सिद्धांत, प्रतिबद्धता और कर्मठता से जोड़ते हुए उनकी स्मृतियों को नमन किया।
योगी ने कहा कि कल्याण सिंह का जीवन इस बात का उदाहरण है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी अपनी मेहनत और सिद्धांतों के बल पर बड़े स्तर पर पहचान बना सकता है। उन्होंने कहा कि बाबू जी ने सार्वजनिक जीवन में जो मूल्य स्थापित किए, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
पीडीए की राजनीति पर बढ़ी सियासी बहस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में पीडीए को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। समाजवादी पार्टी लंबे समय से पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को अपने राजनीतिक गठजोड़ का महत्वपूर्ण हिस्सा बताती रही है। वहीं भाजपा लगातार विपक्षी दलों की इस रणनीति पर सवाल उठाती रही है।
ऐसे में सीएम योगी का ताजा बयान केवल अखिलेश यादव पर व्यक्तिगत राजनीतिक हमला नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी की सामाजिक समीकरण आधारित राजनीति की आलोचना के रूप में भी देखा जा रहा है। आगामी राजनीतिक परिस्थितियों में इस बयान को लेकर सपा और भाजपा के बीच जुबानी टकराव और बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह के व्यक्तित्व और उनके राजनीतिक योगदान को सामने रखते हुए समाजवादी पार्टी पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने पीडीए की राजनीति, महापुरुषों के सम्मान और राजनीतिक विचारधारा के संदर्भ में विपक्ष को घेरा। साथ ही उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि सार्वजनिक जीवन में किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके विचारों, कर्मों और सिद्धांतों से बनती है।

