कानपुर में सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी पर श्री रामलला गोपाल मंदिर में किया गया रुद्राभिषेक – हर हर महादेव की रही गूंज

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रिपोर्ट – सर्वेश सोनू शर्मा 

कानपुर: शास्त्री नगर क्षेत्र स्थित श्रीरामलला गोपाल मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के पावन अवसर पर भगवान शिव का विधि-विधान से रुद्राभिषेक किया गया। धार्मिक आयोजन में मंदिर के महंत 1008 श्री बलरामदास जी महाराज, आचार्य पं. अरुण कुमार द्विवेदी, क्षेत्रीय महिलाओं, बुजुर्गों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। इस दौरान मंदिर परिसर भगवान शिव के जयकारों और वैदिक मंत्रोच्चारण से भक्तिमय नजर आया।

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के संयोग पर मंदिर में आयोजित रुद्राभिषेक में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान भगवान शिव का दूध, दही, शहद, शक्कर, बेलपत्र और पुष्पों से अभिषेक किया गया। इसके बाद भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया गया।

वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ रुद्राभिषेक

कार्यक्रम की शुरुआत धार्मिक विधि-विधान के साथ हुई। मंदिर परिसर में आचार्य पं. अरुण कुमार द्विवेदी और महंत 1008 श्री बलरामदास जी महाराज के मार्गदर्शन में भगवान शिव का रुद्राभिषेक संपन्न कराया गया।

रुद्राभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को दूध, दही, शहद, शक्कर, बेलपत्र और फूल अर्पित किए। वहीं, वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ पूजा-अर्चना की गई। पूजा के बाद भगवान शिव का आकर्षक श्रृंगार किया गया।

इस अवसर पर मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन भी हुआ। श्रद्धालुओं ने धार्मिक भजनों में सहभागिता करते हुए भगवान शिव की आराधना की। इससे पूरे मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय हो गया।

सावन के तीसरे सोमवार का रहा विशेष महत्व

हिंदू धार्मिक परंपरा में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस महीने में सोमवार के दिन शिव आराधना और अभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है। इसी परंपरा के तहत श्रीरामलला गोपाल मंदिर में प्रत्येक वर्ष सावन के दौरान धार्मिक आयोजन किया जाता है।

इस वर्ष भी सावन के तीसरे सोमवार को मंदिर में रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। इसके साथ ही नाग पंचमी का पर्व होने के कारण आयोजन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया।

सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। भक्तों ने भगवान शिव के दर्शन किए और पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। इसके बाद रुद्राभिषेक और विशेष श्रृंगार के कार्यक्रम में भी श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

महिलाओं और बुजुर्गों ने भी लिया हिस्सा

रुद्राभिषेक कार्यक्रम में क्षेत्र की महिलाओं और बुजुर्गों ने भी उत्साह के साथ सहभागिता की। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को बेलपत्र और पुष्प अर्पित किए तथा धार्मिक मंत्रों का जाप किया।

आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि सावन में भगवान शिव की पूजा करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़ने का अवसर भी मिलता है।

इस दौरान मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में हिस्सा लिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक लोगों ने धार्मिक वातावरण का आनंद लिया।

धर्म के मार्ग पर चलने का दिलाया संकल्प

रुद्राभिषेक के अवसर पर आचार्य पं. अरुण कुमार द्विवेदी और महंत 1008 श्री बलरामदास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि धार्मिक जीवन में नियमित पूजा-पाठ और भजन के साथ-साथ अच्छे आचरण का भी विशेष महत्व है। व्यक्ति को अपने जीवन में सेवा, सद्भाव और सकारात्मक विचारों को अपनाना चाहिए।

इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान का नियमित भजन करने का संकल्प भी दिलाया गया। आचार्यों ने कहा कि धार्मिक साधना केवल विशेष पर्वों तक सीमित न रहकर दैनिक जीवन का हिस्सा बननी चाहिए।

मंत्रोच्चारण और भजन से भक्तिमय हुआ मंदिर

रुद्राभिषेक के दौरान मंदिर परिसर में लगातार वैदिक मंत्रोच्चारण होता रहा। इसके साथ ही भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान शिव के भजनों का गायन किया।

मंदिर में भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किए जाने के बाद श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। दूध, दही, शहद, शक्कर, बेलपत्र और फूलों से किए गए अभिषेक के बाद भगवान शिव का आकर्षक स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यक्रम के दौरान भक्तों ने भगवान शिव से परिवार और समाज की सुख-शांति की कामना की।

धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रयास

श्रीरामलला गोपाल मंदिर में आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक प्रयास के रूप में भी देखा गया। सावन और नाग पंचमी जैसे पर्वों के अवसर पर मंदिरों में होने वाले धार्मिक कार्यक्रम लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष सावन के दौरान भगवान शिव की पूजा और रुद्राभिषेक का आयोजन श्रद्धा के साथ किया जाता है। इसी क्रम में इस वर्ष भी तीसरे सोमवार पर विशेष कार्यक्रम रखा गया।

ऐसे आयोजनों में स्थानीय लोगों की भागीदारी से धार्मिक गतिविधियों के साथ सामाजिक जुड़ाव भी मजबूत होता है।

नाग पंचमी पर शिव आराधना

इस बार रुद्राभिषेक का आयोजन नाग पंचमी के अवसर पर भी हुआ। हिंदू पंचांग के अनुसार नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा की परंपरा रही है। वहीं सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है।

इसी कारण नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर मंदिर में आयोजित शिव आराधना में श्रद्धालुओं ने विशेष उत्साह दिखाया।

पूजा-अर्चना के दौरान भक्तों ने भगवान शिव को बेलपत्र और पुष्प अर्पित किए तथा वैदिक मंत्रों के साथ अभिषेक में हिस्सा लिया।

श्रद्धालुओं ने लिया भजन-कीर्तन में हिस्सा

रुद्राभिषेक के बाद मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान शिव का स्मरण किया। धार्मिक गीतों और मंत्रोच्चारण से वातावरण श्रद्धामय बना रहा।

महंत 1008 श्री बलरामदास जी महाराज और आचार्य पं. अरुण कुमार द्विवेदी ने श्रद्धालुओं को धार्मिक जीवन में नियमित साधना और सदाचार के महत्व के बारे में बताया।

उन्होंने भक्तों से अपने दैनिक जीवन में भगवान का भजन करने और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

श्रद्धा और आस्था के साथ संपन्न हुआ आयोजन

कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। आयोजन में शामिल लोगों ने धार्मिक वातावरण के बीच सावन और नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया।

कुल मिलाकर, कानपुर के शास्त्री नगर स्थित श्रीरामलला गोपाल मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी पर आयोजित रुद्राभिषेक श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चारण, भजन-कीर्तन और भगवान शिव के विशेष श्रृंगार ने आयोजन को धार्मिक रंग प्रदान किया। वहीं, मंदिर के महंत और आचार्य ने श्रद्धालुओं को नियमित भजन, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

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