रायपुर मुवारी की ग्राम चौपाल में बच्चों के हक की उठी आवाज, बाल विवाह और बाल श्रम रोकने का लिया संकल्प
रिपोर्ट: अशोक सिंह
हथगाम/फतेहपुर। गांधी जयंती के अवसर पर हथगाम ब्लॉक की ग्राम पंचायत रायपुर मुवारी में आयोजित ग्राम चौपाल में बच्चों के अधिकार और उनकी सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान ग्रामीणों को बाल विवाह और बाल श्रम के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई और बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया गया।
ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान फतेहपुर एवं जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा तथा बाल विवाह और बाल श्रम की रोकथाम से संबंधित जरूरी जानकारियां साझा की गईं।
बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा पर दिया गया जोर
ग्राम चौपाल में संस्थान के सामुदायिक सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष कुमार (सोनू मोदनवाल) ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों का बचपन उनके भविष्य की नींव तैयार करता है। ऐसे में कम उम्र में विवाह या बच्चों से मजदूरी कराना उनके विकास और शिक्षा के अवसरों को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को काम में लगाने के बजाय उन्हें विद्यालय भेजना और उनकी शिक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। इसी तरह कम उम्र में विवाह के बजाय बच्चों को पढ़ाई पूरी करने, अपनी क्षमता विकसित करने और सुरक्षित वातावरण में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि गांव या आसपास के क्षेत्र में किसी बच्चे के बाल विवाह या बाल श्रम से जुड़ी जानकारी सामने आती है, तो उसे नजरअंदाज न किया जाए। समय रहते संबंधित हेल्पलाइन अथवा जिम्मेदार विभाग को सूचना देकर बच्चे की सहायता की जा सकती है।
ग्रामीणों ने ली बाल विवाह रोकने की शपथ
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को बाल विवाह रोकने की शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही लोगों से वचन पत्र भी भरवाए गए। ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि वे अपने गांव में बाल विवाह जैसी स्थिति को रोकने के लिए जागरूकता फैलाने में सहयोग करेंगे।
इसके अलावा ग्रामीणों को यह भी समझाया गया कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक परंपरा का विषय नहीं है, बल्कि इससे बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य पर असर पड़ सकता है। इसलिए परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को कम उम्र में विवाह के बजाय शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिले।
इसी क्रम में बाल श्रम को लेकर भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि बच्चों की प्राथमिकता शिक्षा और उनका सर्वांगीण विकास होना चाहिए। यदि किसी बच्चे को पढ़ाई की उम्र में काम करते हुए देखा जाता है, तो उसकी स्थिति की जानकारी संबंधित विभाग या हेल्पलाइन को दी जानी चाहिए।
ग्रामीणों को हेल्पलाइन नंबरों की दी गई जानकारी
ग्राम चौपाल में केवल जागरूकता संदेश ही नहीं दिया गया, बल्कि जरूरत पड़ने पर सहायता प्राप्त करने के लिए विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी ग्रामीणों को दी गई। विशेष रूप से चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में बताया गया, ताकि संकट में फंसे बच्चों की सहायता के लिए लोग समय पर सूचना दे सकें।
इसके साथ ही ग्रामीणों को महिला हेल्पलाइन 1090, आपातकालीन सेवा 112, एम्बुलेंस सेवा 108 और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के संबंध में भी जानकारी दी गई। ग्रामीणों से कहा गया कि आवश्यकता पड़ने पर इन सेवाओं का उपयोग किया जा सकता है।
इस जानकारी का उद्देश्य ग्रामीणों को यह बताना था कि किसी बच्चे की सुरक्षा से जुड़ी समस्या सामने आने पर चुप रहने के बजाय उपलब्ध सहायता व्यवस्था का सहारा लिया जाए। वहीं, सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाकर बाल विवाह और बाल श्रम की रोकथाम में ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम
ग्राम पंचायत रायपुर मुवारी में आयोजित चौपाल में ग्राम प्रशासक अशफाक अहमद खान और पंचायत सचिव राजीव कुमार की मौजूदगी रही। प्रशासनिक स्तर पर ग्रामीणों को बच्चों से जुड़े मुद्दों पर जागरूक करने के प्रयासों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में ब्लॉक कोऑर्डिनेटर पुष्पेंद्र कुमार और सामुदायिक सामाजिक कार्यकर्ता सुधांशु द्विवेदी समेत अन्य लोग भी मौजूद रहे। इस दौरान ग्रामीणों ने बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को लेकर अपनी जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया।
सामूहिक भागीदारी से मजबूत होगी बाल सुरक्षा
कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने बाल विवाह को रोकने और बच्चों को बाल श्रम से दूर रखने में सहयोग करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए परिवार, ग्राम पंचायत, प्रशासन और समाज के सभी वर्गों की सहभागिता आवश्यक है।
दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की जानकारी देना महत्वपूर्ण है। जब ग्रामीण किसी समस्या को पहचानने और उसके बारे में सही जगह सूचना देने के प्रति जागरूक होंगे, तब बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के प्रयास और मजबूत होंगे।
गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित रायपुर मुवारी की यह ग्राम चौपाल इसी दिशा में जागरूकता का संदेश लेकर सामने आई। कार्यक्रम में ग्रामीणों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि बाल विवाह और बाल श्रम की रोकथाम के लिए सामूहिक जागरूकता और जिम्मेदारी जरूरी है। बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण बचपन मिले, इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका निभाने की आवश्यकता है।

