कानपुर देहात में गांधी-शास्त्री जयंती पर स्वच्छता श्रमदान, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प

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रिपोर्ट – विशाल मिश्रा

कानपुर देहात। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर कानपुर देहात में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्वच्छता ही सेवा, सेवा संकल्प अभियान और वन्य प्राणी सप्ताह के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में अधिकारियों, कर्मचारियों और आम लोगों ने सामूहिक रूप से स्वच्छता श्रमदान किया। इसके साथ ही नदी, पर्यावरण, जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम का आयोजन प्रभागीय वनाधिकारी कानपुर देहात प्रोमिला के नेतृत्व में वन विभाग कार्यालय परिसर और लिंक रोड क्षेत्र में किया गया। इस दौरान विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वयं श्रमदान करते हुए आसपास के क्षेत्र की साफ-सफाई की। इसके माध्यम से आम लोगों को यह संदेश दिया गया कि स्वच्छता केवल किसी अभियान या विशेष दिवस तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन की आदत बनाया जाना चाहिए।

अधिकारियों और कर्मचारियों ने किया श्रमदान

गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित स्वच्छता श्रमदान कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी प्रोमिला ने स्वयं अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सफाई अभियान में हिस्सा लिया। इस दौरान कार्यालय परिसर और लिंक रोड के आसपास सफाई की गई। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और जनसामान्य ने भी उत्साहपूर्वक श्रमदान किया।

इसके अलावा, लोगों को स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक करते हुए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है। यदि लोग अपने आसपास सफाई रखने के साथ दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें तो स्वच्छता अभियान को व्यापक स्तर पर सफल बनाया जा सकता है।

गांधी और शास्त्री के आदर्शों को अपनाने की अपील

कार्यक्रम के दौरान प्रभागीय वनाधिकारी प्रोमिला ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन एवं विचारों को याद करते हुए उपस्थित लोगों से उनके आदर्शों को व्यवहारिक जीवन में अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा, स्वच्छता और सेवा के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। वहीं, लाल बहादुर शास्त्री सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।

उन्होंने कहा कि दोनों महान विभूतियों के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में स्वच्छता, अनुशासन, जिम्मेदारी और सेवा की भावना को मजबूत किया जा सकता है। इसलिए जयंती समारोहों का उद्देश्य केवल महापुरुषों को याद करना नहीं, बल्कि उनके विचारों को अपने आचरण में शामिल करना भी होना चाहिए।

नदी, पर्यावरण और जल संरक्षण का लिया संकल्प

स्वच्छता श्रमदान के साथ कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और जनसामान्य ने नदी एवं जल स्रोतों को स्वच्छ रखने, पर्यावरण की रक्षा करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहयोग करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में लोगों को बताया गया कि स्वच्छ पर्यावरण का सीधा संबंध स्वस्थ जीवन से है। इसलिए प्लास्टिक एवं अन्य कचरे का उचित निस्तारण, सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई और जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे अपने आसपास के लोगों को भी पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करें।

प्रतिभागियों को दिलाई गई स्वच्छता की शपथ

कार्यक्रम के अंत में प्रभागीय वनाधिकारी प्रोमिला ने उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य प्रतिभागियों को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के आदर्शों पर चलने की शपथ दिलाई। सभी प्रतिभागियों ने अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण की रक्षा करने का संकल्प लिया।

शपथ के दौरान लोगों ने यह भी संकल्प लिया कि वे स्वयं स्वच्छता के प्रति जागरूक रहेंगे और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। इस पहल के माध्यम से जनभागीदारी को बढ़ावा देने और स्वच्छता को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करने का संदेश दिया गया।

वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद

स्वच्छता श्रमदान कार्यक्रम में क्षेत्रीय वन अधिकारी भोगनीपुर सर्वेश कुमार भदौरिया, क्षेत्रीय वन अधिकारी अकबरपुर बुद्ध प्रिय, जिला परियोजना अधिकारी जिला गंगा समिति कानपुर देहात विवेक कुमार सैनी सहित वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और कार्यालय स्टाफ मौजूद रहा।

कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से लोगों में जागरूकता बढ़ती है और समाज में सामूहिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है।

कुल मिलाकर, गांधी जयंती और शास्त्री जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल स्वच्छता श्रमदान तक सीमित नहीं रहा। इसके माध्यम से महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया। साथ ही नदी, जल, पर्यावरण और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता के प्रति लोगों को जिम्मेदार बनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि स्वच्छ और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।