हमीरपुर में संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन हुआ अलर्ट, 36 बाढ़ चौकियां और 21 शरणालय तैयार – प्रशासन ने कसी कमर

6a4a2445-788e-4341-9f29-d1e542ea3298

रिपोर्ट – मोहम्मद अकरम 

हमीरपुर: संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए हमीरपुर जिला प्रशासन ने राहत और बचाव से जुड़ी तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिलाधिकारी अभिषेक गोयल के निर्देश पर जिले के सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। हालांकि, फिलहाल जनपद में बाढ़ की कोई स्थिति नहीं है और यमुना तथा बेतवा नदियों का जलस्तर खतरे के निर्धारित बिंदु से काफी नीचे है। इसके बावजूद प्रशासन किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहा है।

अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) राकेश कुमार ने बताया कि वर्तमान में जिले में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। फिर भी नदी के जलस्तर, तटबंधों, बाढ़ संभावित गांवों और राहत व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके अलावा सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

यमुना और बेतवा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे

हमीरपुर जनपद में यमुना, बेतवा, चंद्रावल, बिरमा, केन और धसान प्रमुख नदियां हैं। इनमें यमुना और बेतवा का प्रभाव जिले में सबसे अधिक माना जाता है। ऐसे में इन दोनों नदियों के जलस्तर की नियमित निगरानी की जा रही है।

प्रशासन के अनुसार, यमुना नदी का खतरे का बिंदु 103.630 मीटर और बेतवा नदी का खतरे का बिंदु 104.540 मीटर निर्धारित है। 18 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे यमुना का जलस्तर 94.300 मीटर, जबकि बेतवा का जलस्तर 93.550 मीटर दर्ज किया गया।

इस तरह यमुना नदी खतरे के बिंदु से 9.33 मीटर और बेतवा नदी 10.99 मीटर नीचे बह रही थी। इसलिए वर्तमान समय में जिले में बाढ़ की स्थिति नहीं है। हालांकि, प्रशासन ने भविष्य में जलस्तर बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए सभी तैयारियां पहले से पूरी कर ली हैं।

194 गांव और मजरों की पहचान

संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने तहसीलवार 194 गांवों और मजरों को पहले से चिन्हित किया है। इनमें हमीरपुर तहसील के 91, मौदहा तहसील के 49, राठ तहसील के 20 और सरीला तहसील के 34 गांव शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से विशेष निगरानी रखी जा रही है। बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर इन चिन्हित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान को प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जाएगा।

इसके साथ ही संबंधित विभागों को अपने-अपने स्तर पर आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे किसी भी आपात स्थिति में राहत कार्य शुरू करने में अनावश्यक देरी न हो।

बाढ़ स्टीयरिंग ग्रुप की बैठक से तैयारियों की समीक्षा

बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर बाढ़ स्टीयरिंग ग्रुप की बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में संबंधित विभागों को बाढ़ से पहले आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए।

इसके अलावा 11 जून 2026 को जनपद में वृहद संयुक्त बाढ़ मॉक एक्सरसाइज भी आयोजित की गई थी। इस अभ्यास के माध्यम से विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय, राहत-बचाव व्यवस्था और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को परखा गया।

मॉक एक्सरसाइज के बाद सामने आए बिंदुओं के आधार पर व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने का प्रयास किया गया। प्रशासन का उद्देश्य यही है कि वास्तविक आपदा की स्थिति में सभी विभाग बिना देरी के एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर राहत कार्य कर सकें।

190 नावों का सत्यापन, मोटरबोट की भी व्यवस्था

संभावित बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के लिए नाव और मोटरबोट की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने बताया कि नाव एवं मोटरबोट किराये पर लेने की निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

इसके अलावा जिले में उपलब्ध 190 नावों का सत्यापन किया गया है। नाविकों से भी सहमति पत्र प्राप्त किए गए हैं। इससे जरूरत पड़ने पर नावों और नाविकों को तत्काल राहत एवं बचाव अभियान में लगाया जा सकेगा।

राहत सामग्री के संबंध में भी प्रशासन ने पहले से तैयारी कर ली है। बाढ़ राहत किट, पका हुआ भोजन, राहत शिविरों के लिए टेंट और अन्य जरूरी लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं की निविदा प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।

25 हजार बोरियां और क्रेट रखे गए सुरक्षित

आपातकालीन परिस्थितियों के लिए प्रशासन ने आवश्यक सामग्री भी आरक्षित रखी है। इसके तहत 25 हजार खाली बोरियां, 300 वायर क्रेट और 500 नायलॉन क्रेट उपलब्ध रखे गए हैं।

इन संसाधनों का इस्तेमाल आवश्यकता पड़ने पर जलभराव, तटबंध सुरक्षा और राहत कार्यों में किया जा सकता है। प्रशासन की कोशिश है कि बाढ़ की स्थिति में जरूरी सामग्री जुटाने में समय न लगे।

36 बाढ़ चौकियां और 21 शरणालय तैयार

जिले में संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए 36 बाढ़ चौकियां और 21 बाढ़ शरणालय चिन्हित किए गए हैं। इन स्थानों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

राहत और बचाव कार्यों में स्थानीय स्तर पर सहयोग के लिए 100 आपदा मित्र स्वयंसेवकों और 27 होमगार्ड जवानों को प्रशिक्षण दिया गया है। जरूरत पड़ने पर इन प्रशिक्षित लोगों को राहत अभियान में शामिल किया जा सकेगा।

इसके साथ ही जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे और सातों दिन संचालित किए जा रहे हैं। यहां से नदी के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

पशुओं के लिए भी प्रशासन ने की तैयारी

संभावित बाढ़ के दौरान सिर्फ लोगों ही नहीं, बल्कि पशुधन की सुरक्षा को भी ध्यान में रखा गया है। प्रशासन ने पशुओं के लिए भूसा और चारा उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की है।

जिले में 1.92 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण कराया जा चुका है। इससे बाढ़ के दौरान पशुओं में बीमारी फैलने की आशंका को कम करने में मदद मिलेगी।

प्रशासन ने पशुपालकों को भी संभावित बाढ़ की स्थिति में पशुओं की सुरक्षा को लेकर जरूरी सावधानी बरतने के लिए तैयार रहने को कहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी तैयारी

संभावित आपदा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट रखा गया है। प्रशासन के अनुसार, क्लोरीन टैबलेट, ओआरएस, ब्लीचिंग पाउडर और एंटी स्नेक वेनम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

इसके अलावा सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर सचल चिकित्सा दल गठित किए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर ये टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा सकेंगी।

96 पेट्रोल-डीजल पंपों पर पर्याप्त ईंधन

आपदा की स्थिति में वाहनों और राहत कार्यों के लिए ईंधन की कमी न हो, इसके लिए जिले के 96 पेट्रोल और डीजल पंपों पर पर्याप्त ईंधन उपलब्ध होने की जानकारी प्रशासन ने दी है।

इसके अलावा संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों और नगर क्षेत्रों के प्रमुख नालों की वर्षा पूर्व सफाई भी कराई जा चुकी है। प्रशासन के अनुसार जिले के सभी तटबंध सुरक्षित हैं।

इससे जलनिकासी व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने और संभावित जलभराव की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

प्रशासन ने लोगों से की अपील

अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। सभी संबंधित विभागों को आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। साथ ही बाढ़ या किसी अन्य आपदा की स्थिति में प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग करें।

फिलहाल हमीरपुर में बाढ़ की स्थिति नहीं है, लेकिन प्रशासन ने एहतियात के तौर पर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। यमुना और बेतवा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे होने के बावजूद 24×7 निगरानी, बाढ़ चौकियों, शरणालयों, नावों, चिकित्सा सेवाओं और राहत सामग्री की व्यवस्था से प्रशासन किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

You may have missed