कानपुर के मोतीझील में अवैध पार्किंग मेयर को दे रही सीधी चुनौती, सड़क-फुटपाथ पर वाहन खड़े कर वसूली का आरोप

4234b220-79c3-4003-b46d-0957733bdf36

रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: शहर के प्रमुख सार्वजनिक और पर्यटन स्थलों में शामिल मोतीझील में पार्किंग व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। म्यूजिकल फाउंटेन पार्क के बाहर सड़क और फुटपाथ पर वाहनों को खड़ा कराकर कथित तौर पर पार्किंग शुल्क वसूले जाने का मामला सामने आया है। सामने आए वीडियो के आधार पर सड़क और फुटपाथ के हिस्से में पार्किंग स्टैंड संचालित किए जाने का दावा किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि म्यूजिकल फाउंटेन पार्क से लेकर बाल उद्यान पार्क और तुलसी उपवन के आसपास के फुटपाथ तक वाहनों को खड़ा कराया जा रहा है। आरोप है कि चार पहिया वाहन पार्क करने के नाम पर प्रति वाहन करीब 50 रुपये तक लिए जा रहे हैं। हालांकि, इस कथित वसूली के पीछे कौन जिम्मेदार है और संबंधित स्थान पर पार्किंग की आधिकारिक अनुमति है या नहीं, यह जांच का विषय है।

मामला सामने आने के बाद नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सड़क और फुटपाथ पर अनधिकृत तरीके से पार्किंग संचालित की जा रही है, तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

मोतीझील में पार्किंग को लेकर उठे सवाल

मोतीझील कानपुर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों में से एक है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग घूमने, पार्कों का भ्रमण करने और परिवार के साथ समय बिताने पहुंचते हैं। ऐसे में पार्किंग व्यवस्था का व्यवस्थित होना जरूरी है, ताकि लोगों को आवागमन में परेशानी न हो।

इसी बीच म्यूजिकल फाउंटेन पार्क के बाहर सड़क और फुटपाथ पर वाहनों को खड़ा कराए जाने का मामला चर्चा में आया है। सामने आए वीडियो में सड़क के किनारे और फुटपाथ के हिस्से में कई वाहन खड़े दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।

आरोप है कि इन वाहनों को पार्किंग स्टैंड के रूप में संचालित किए जा रहे स्थान पर खड़ा कराया जाता है और इसके बदले वाहन चालकों से शुल्क लिया जाता है।

चार पहिया वाहन से 50 रुपये लेने का आरोप

मामले में सबसे महत्वपूर्ण आरोप पार्किंग शुल्क की कथित वसूली को लेकर है। जानकारी के मुताबिक, चार पहिया वाहन खड़ा करने के लिए प्रति वाहन करीब 50 रुपये तक लिए जाने का दावा किया जा रहा है।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह शुल्क किसी अधिकृत पार्किंग व्यवस्था के तहत लिया जा रहा है या किसी निजी व्यक्ति अथवा समूह द्वारा। यही वजह है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।

यदि संबंधित स्थान पर अधिकृत पार्किंग संचालित हो रही है, तो उसके लिए निर्धारित अनुमति, शुल्क दर और संचालनकर्ता की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। वहीं, यदि किसी प्रकार की अनुमति नहीं है तो सड़क और फुटपाथ के इस्तेमाल तथा कथित वसूली की जांच जरूरी होगी।

सड़क और फुटपाथ पर पार्किंग से राहगीरों की परेशानी

सड़क और फुटपाथ का उपयोग आमतौर पर वाहनों के आवागमन और पैदल चलने वाले लोगों के लिए होता है। ऐसे में यदि इन स्थानों पर बड़ी संख्या में वाहन खड़े कर दिए जाएं तो राहगीरों के सामने परेशानी पैदा हो सकती है।

मोतीझील जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थल पर लोगों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। पार्कों के आसपास परिवार, बच्चे और बुजुर्ग भी पहुंचते हैं। इसलिए फुटपाथ पर वाहनों का जमावड़ा होने से पैदल चलने वालों को सड़क की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

इसी कारण स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि पार्किंग के लिए निर्धारित स्थानों और सड़क-फुटपाथ के इस्तेमाल की स्थिति को स्पष्ट किया जाए।

म्यूजिकल फाउंटेन से तुलसी उपवन तक सवाल

सामने आई जानकारी के अनुसार, कथित पार्किंग व्यवस्था केवल म्यूजिकल फाउंटेन पार्क के बाहर तक सीमित नहीं होने का दावा किया जा रहा है। म्यूजिकल फाउंटेन पार्क से बाल उद्यान पार्क और तुलसी उपवन के आसपास के फुटपाथ तक वाहनों को खड़ा कराए जाने की बात कही जा रही है।

यदि यह स्थिति व्यापक स्तर पर है, तो संबंधित विभागों के लिए पूरे क्षेत्र का निरीक्षण करना आवश्यक होगा। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि जहां वाहन खड़े कराए जा रहे हैं, वह भूमि किस विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है और वहां पार्किंग की अनुमति है या नहीं।

जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सामने आया मामला अधिकृत पार्किंग व्यवस्था से जुड़ा है या अनधिकृत संचालन से।

किसके आदेश पर हो रही कथित वसूली?

मामले में सबसे बड़ा सवाल पार्किंग शुल्क की कथित वसूली को लेकर है। यदि लोगों से वाहन खड़ा करने के लिए शुल्क लिया जा रहा है, तो यह जानना जरूरी है कि शुल्क लेने का अधिकार किसे दिया गया है।

किसी भी अधिकृत पार्किंग व्यवस्था में सामान्य तौर पर संचालनकर्ता, शुल्क और नियमों से संबंधित जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। ऐसे में यदि मौके पर कोई बोर्ड, रसीद या अधिकृत अनुमति उपलब्ध है तो उसकी भी जांच की जानी चाहिए।

दूसरी ओर, यदि बिना अनुमति के शुल्क लिया जा रहा है तो संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए आगे आना होगा। फिलहाल इन सवालों का जवाब आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आएगा।

नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल

मोतीझील में सामने आए इस मामले के बाद नगर निगम की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों के बीच यह चर्चा है कि यदि लंबे समय से सड़क या फुटपाथ पर वाहनों को खड़ा कराया जा रहा है और कथित तौर पर शुल्क भी लिया जा रहा है, तो संबंधित विभाग की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी।

हालांकि, नगर निगम या किसी अन्य संबंधित विभाग की ओर से इस मामले में आधिकारिक जांच या कार्रवाई की जानकारी सामने आना अभी बाकी है। इसलिए लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि आधिकारिक स्तर पर होना आवश्यक है।

इस मामले में प्रशासनिक जांच होने पर ही यह स्पष्ट होगा कि पार्किंग व्यवस्था के संचालन के लिए किसी व्यक्ति या संस्था को अनुमति दी गई थी या नहीं।

राहगीरों और वाहन चालकों के लिए जरूरी है स्पष्ट व्यवस्था

मोतीझील में आने वाले लोगों के लिए स्पष्ट और व्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था जरूरी है। इससे एक तरफ वाहन चालकों को अपना वाहन सुरक्षित स्थान पर खड़ा करने की सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ सड़क और फुटपाथ पर अनावश्यक दबाव भी कम होगा।

इसके अलावा अधिकृत पार्किंग होने की स्थिति में शुल्क की जानकारी भी लोगों को स्पष्ट रूप से मिलनी चाहिए। इससे वाहन चालकों के बीच किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं रहेगी।

यदि किसी स्थान पर पार्किंग की अनुमति नहीं है, तो वहां वाहन खड़ा कराने की व्यवस्था पर रोक लगाना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

वीडियो सामने आने के बाद जांच की मांग

मामले से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद अब लोगों की नजर संबंधित विभागों की कार्रवाई पर है। वीडियो में दिखाई देने वाली स्थिति की सत्यता और वास्तविक परिस्थितियों की जांच की जा सकती है।

प्रशासन चाहे तो मौके का निरीक्षण कर यह पता लगा सकता है कि सड़क और फुटपाथ पर कितने क्षेत्र में वाहन खड़े कराए जा रहे हैं। साथ ही वहां मौजूद लोगों से पूछताछ और पार्किंग शुल्क से संबंधित जानकारी भी जुटाई जा सकती है।

इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति या संस्था के पास पार्किंग संचालन की अनुमति है तो संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।

जांच के बाद स्थिति होगी स्पष्ट

फिलहाल मोतीझील में कथित अवैध पार्किंग और पार्किंग शुल्क की वसूली का मामला आरोपों के स्तर पर है। इसलिए किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराने से पहले संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

यदि जांच में अनधिकृत पार्किंग संचालन की पुष्टि होती है, तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि पार्किंग अधिकृत पाई जाती है तो उसके संचालन, शुल्क और निर्धारित क्षेत्र की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि मोतीझील जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर आम लोगों की सुविधा और यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो।

अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें

मोतीझील में सड़क और फुटपाथ पर कथित पार्किंग स्टैंड संचालित होने तथा वाहन चालकों से शुल्क लिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद अब लोगों की नजर नगर निगम और संबंधित विभागों पर है।

सवाल यह है कि जिस स्थान पर वाहन खड़े कराए जा रहे हैं, वहां पार्किंग संचालन की अनुमति किसके पास है? यदि शुल्क लिया जा रहा है तो उसकी अधिकृत व्यवस्था क्या है? और यदि यह व्यवस्था बिना अनुमति संचालित हो रही है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

इन सभी सवालों का जवाब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल जरूरी है कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण करें, पार्किंग व्यवस्था की वैधता की जांच करें और आम लोगों के लिए सड़क तथा फुटपाथ को सुचारु रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

मोतीझील में सामने आया यह मामला केवल कथित पार्किंग वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्थानों के व्यवस्थित उपयोग से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए निष्पक्ष जांच और स्पष्ट कार्रवाई से ही स्थिति पूरी तरह सामने आ सकेगी।

You may have missed