प्रयागराज: APO-2025 आरक्षण पर HC सख्त, UPPSC से ओपन कैटेगरी की मेरिट पर मांगा स्पष्टीकरण

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Digital UP News

प्रयागराज: सहायक अभियोजन अधिकारी (APO)-2025 भर्ती में आरक्षण व्यवस्था और ओपन कैटेगरी की मेरिट को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) से भर्ती प्रक्रिया में ओपन कैटेगरी की सूची तैयार किए जाने के आधार और आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों की मेरिट को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण मांगा है।

जस्टिस मनीष कुमार निगम की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आयोग की ओर से दाखिल हलफनामा कोर्ट के पूर्व निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन करता हुआ दिखाई नहीं देता। इसलिए हाईकोर्ट ने UPPSC को एक और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मामले में अगली सुनवाई 21 अगस्त को सुबह 10 बजे निर्धारित की गई है। इस दौरान आयोग को ओपन कैटेगरी की मेरिट सूची और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े सवालों पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।

APO-2025 प्रीलिम्स रिजल्ट को दी गई चुनौती

यह मामला APO-2025 प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम से जुड़ा है। याचिका पंकज वर्मा और दो अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं ने प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को चुनौती देते हुए भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण और मेरिट से जुड़े मुद्दे हाईकोर्ट के सामने रखे हैं।

याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने भर्ती प्रक्रिया में ओपन कैटेगरी की मेरिट को लेकर आयोग से जानकारी मांगी। कोर्ट ने यह जानना चाहा कि ओपन कैटेगरी में अभ्यर्थियों का चयन किस आधार पर किया गया और इसमें केवल अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को शामिल किया गया या सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को उनकी मेरिट के आधार पर अवसर दिया गया।

यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आरक्षण व्यवस्था में ओपन या अनारक्षित सीटों को लेकर मेरिट के आधार पर चयन का मुद्दा कई भर्ती प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण होता है।

ओपन कैटेगरी की मेरिट पर हाईकोर्ट का सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने UPPSC से सीधे सवाल किया कि ओपन कैटेगरी की मेरिट सूची किस आधार पर तैयार की गई है। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या ओपन कैटेगरी में सिर्फ अनारक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को रखा गया था या आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थियों को भी उनकी मेरिट के आधार पर इसमें शामिल किया गया, जिन्होंने सामान्य मेरिट में स्थान हासिल किया था।

अदालत के इन सवालों के बाद अब आयोग को अपने अगले हलफनामे में भर्ती प्रक्रिया की स्थिति को अधिक स्पष्ट तरीके से बताना होगा।

विशेष रूप से आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों की मेरिट और उनके ओपन कैटेगरी में स्थान को लेकर अदालत ने स्पष्टीकरण मांगा है। इसके साथ ही, ओपन कैटेगरी की सूची तैयार करने के लिए अपनाए गए मानदंड की जानकारी भी आयोग को देनी होगी।

पूर्व निर्देशों के अनुपालन पर भी सवाल

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान UPPSC की ओर से दाखिल किए गए हलफनामे पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि आयोग का हलफनामा कोर्ट के पूर्व निर्देशों का पूर्ण रूप से अनुपालन करता हुआ प्रतीत नहीं होता।

इसके बाद अदालत ने आयोग को एक और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। नए हलफनामे में आयोग को उन सभी सवालों का स्पष्ट जवाब देना होगा, जो अदालत ने सुनवाई के दौरान उठाए हैं।

इससे यह स्पष्ट है कि कोर्ट भर्ती प्रक्रिया के रिकॉर्ड और आरक्षण व्यवस्था को लेकर विस्तृत जानकारी चाहता है। अब अगली सुनवाई में आयोग की ओर से दाखिल किए जाने वाले हलफनामे पर अदालत की नजर रहेगी।

आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों पर भी सवाल

सुनवाई में आरक्षित वर्ग के उन अभ्यर्थियों का मुद्दा भी सामने आया, जो मेरिट के आधार पर ओपन कैटेगरी में स्थान प्राप्त कर सकते हैं। हाईकोर्ट ने आयोग से इस संबंध में स्पष्ट जानकारी मांगी है।

अदालत यह जानना चाहती है कि APO-2025 की प्रारंभिक परीक्षा में मेरिट सूची तैयार करते समय आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के लिए क्या व्यवस्था अपनाई गई। साथ ही, यह भी स्पष्ट करना होगा कि ऐसे अभ्यर्थियों को ओपन कैटेगरी की मेरिट सूची में शामिल किया गया या नहीं।

इस मुद्दे का सीधा संबंध भर्ती में मेरिट और आरक्षण की प्रक्रिया से है। इसलिए अदालत ने आयोग को संबंधित रिकॉर्ड और प्रक्रिया को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।

ओपन कैटेगरी की सूची किस आधार पर बनी?

हाईकोर्ट की सुनवाई में सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक ओपन कैटेगरी की सूची तैयार करने का आधार रहा। कोर्ट ने आयोग से जानना चाहा कि किस नियम या प्रक्रिया के तहत ओपन कैटेगरी की मेरिट सूची तैयार की गई।

इसका जवाब आयोग के अगले हलफनामे में सामने आने की उम्मीद है। आयोग को यह भी स्पष्ट करना होगा कि मेरिट तैयार करते समय अभ्यर्थियों की श्रेणी को किस तरह ध्यान में रखा गया और क्या सभी अभ्यर्थियों को उनकी मेरिट के आधार पर ओपन कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा का अवसर मिला।

अदालत के निर्देश के बाद अब UPPSC के सामने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड और नियमों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी है।

21 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को सुबह 10 बजे निर्धारित की है। अगली तारीख पर UPPSC की ओर से नया हलफनामा दाखिल किए जाने की संभावना है।

इस हलफनामे के आधार पर अदालत यह देखेगी कि आयोग ने पूर्व निर्देशों और वर्तमान सुनवाई के दौरान उठाए गए सवालों का कितना स्पष्ट जवाब दिया है।

अगली सुनवाई APO-2025 भर्ती के अभ्यर्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें प्रारंभिक परीक्षा परिणाम और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अदालत की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

UPPSC की ओर से अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष

मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और अधिवक्ता अवनीश त्रिपाठी पेश हुए। उन्होंने आयोग की ओर से अदालत के समक्ष पक्ष रखा।

वहीं, याचिका पंकज वर्मा और दो अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से APO-2025 प्रीलिम्स रिजल्ट और भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण व्यवस्था से जुड़े सवाल अदालत के सामने रखे गए हैं।

मामले की सुनवाई जस्टिस मनीष कुमार निगम की सिंगल बेंच में हुई।

भर्ती प्रक्रिया पर अभ्यर्थियों की नजर

APO-2025 भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों के लिए हाईकोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को चुनौती दिए जाने के बाद अब अदालत के सामने भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े कई प्रश्न हैं।

अदालत ने फिलहाल किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय UPPSC से अधिक स्पष्ट जानकारी मांगी है। इसलिए अगली सुनवाई में आयोग के हलफनामे और उसमें दिए गए तथ्यों के आधार पर मामले की दिशा तय होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में मेरिट और आरक्षण के नियमों का स्पष्ट अनुपालन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में कोर्ट की ओर से मांगी गई जानकारी से प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।

आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर 21 अगस्त की सुनवाई पर है। UPPSC को अदालत के निर्देश के अनुसार नया हलफनामा दाखिल करना होगा। इसमें ओपन कैटेगरी की मेरिट, आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों की स्थिति और सूची तैयार करने के आधार से जुड़े सवालों का जवाब देना होगा।

इसके बाद हाईकोर्ट उपलब्ध रिकॉर्ड और आयोग के जवाब का परीक्षण करेगा। अदालत यह भी देख सकती है कि भर्ती प्रक्रिया में लागू नियमों और पूर्व निर्देशों का पालन किस तरह किया गया।

फिलहाल हाईकोर्ट ने APO-2025 प्रीलिम्स रिजल्ट से जुड़ी याचिका पर सुनवाई जारी रखते हुए आयोग से अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगा है। इसलिए इस स्तर पर भर्ती परिणाम को लेकर अंतिम स्थिति सामने नहीं आई है।

कुल मिलाकर, APO-2025 भर्ती में आरक्षण और ओपन कैटेगरी की मेरिट को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने UPPSC से महत्वपूर्ण जानकारी मांगी है। कोर्ट ने आयोग के पिछले हलफनामे को पूर्व निर्देशों का पूर्ण अनुपालन न करने वाला माना और नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अब 21 अगस्त की सुनवाई में आयोग की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर सभी की नजर रहेगी।