साइबर तकनीक से दबोचा गया युवती के आपत्तिजनक फोटो-वीडियो वायरल करने का आरोपी, महाराष्ट्र से हुआ गिरफ्तार , जानिए सर्विलांस से जुड़ी जानकारी

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रिपोर्ट- पित्तेश्वर कुमार 

आजमगढ़। युवती के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में फरार चल रहे आरोपी को आजमगढ़ पुलिस ने महाराष्ट्र के पालघर जिले से गिरफ्तार किया है। रौनापार थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपी की लोकेशन का पता लगाया और स्थानीय पुलिस के सहयोग से उसे बोइसर स्थित एक कंपनी से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की इस कार्रवाई में साइबर सेल की तकनीकी टीम की भूमिका अहम रही।

पुलिस के मुताबिक, रौनापार थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने अपनी 23 वर्षीय बेटी से संबंधित मामले में पुलिस को तहरीर दी थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। आरोप है कि आरोपी प्रमोद गोंड ने युवती से परिचय बढ़ाया और बाद में उसकी निजी तस्वीरें व वीडियो बना लिए। इसके बाद कथित तौर पर इन सामग्री को सार्वजनिक करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाया गया। पुलिस का कहना है कि बाद में आरोपी ने युवती से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दी।

13 जुलाई को दर्ज हुआ था मुकदमा

मामले की गंभीरता को देखते हुए रौनापार थाने में 13 जुलाई 2026 को मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मुकदमा अपराध संख्या 195/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67ए में दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी।

विवेचना की जिम्मेदारी निरीक्षक अपराध एवं विवेचक अशोक कुमार तिवारी को सौंपी गई। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए। हालांकि, आरोपी की लोकेशन आजमगढ़ से बाहर होने के कारण उसे पकड़ना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था।

न्यायालय से लिया गया गैर जमानती वारंट

आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने न्यायालय से गैर जमानती वारंट (NBW) प्राप्त किया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश और तकनीकी निगरानी तेज कर दी। इसी क्रम में साइबर सेल आजमगढ़ की तकनीकी टीम ने आरोपी से जुड़े मोबाइल नंबर की लोकेशन को ट्रेस करना शुरू किया।

तकनीकी जांच के दौरान मोबाइल की लोकेशन महाराष्ट्र के पालघर जिले के बोइसर क्षेत्र में मिली। लोकेशन सामने आने के बाद पुलिस टीम ने आरोपी के संभावित ठिकाने की जानकारी जुटाई। इसके बाद रौनापार पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम महाराष्ट्र के लिए रवाना हुई।

बोइसर की कंपनी से हुई गिरफ्तारी

महाराष्ट्र पहुंचने के बाद आजमगढ़ पुलिस ने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया। स्थानीय पुलिस के सहयोग से संयुक्त टीम ने बोइसर क्षेत्र में आरोपी की तलाश शुरू की। तकनीकी जानकारी के आधार पर पुलिस को आरोपी के एक कंपनी परिसर में मौजूद होने की जानकारी मिली।

इसके बाद पुलिस टीम ने श्रीराम फेडरेशन कंपनी, बोइसर में कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रमोद गोंड को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान प्रमोद गोंड पुत्र जगरनाथ गोंड के रूप में हुई है। वह हैदराबाद, थाना रौनापार, जनपद आजमगढ़ का निवासी बताया गया है और उसकी उम्र 34 वर्ष है।

इस गिरफ्तारी को पुलिस की तकनीकी निगरानी और अंतरराज्यीय समन्वय का परिणाम माना जा रहा है। खास तौर पर साइबर सेल द्वारा मोबाइल लोकेशन की जानकारी जुटाने से पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में मदद मिली।

ट्रांजिट रिमांड के बाद आजमगढ़ लाई गई पुलिस टीम

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी का चिकित्सकीय परीक्षण कराया। इसके पश्चात उसे पालघर स्थित संबंधित न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। वहां से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करने के बाद पुलिस आरोपी को लेकर आजमगढ़ रवाना हुई।

पुलिस के अनुसार, 16 अगस्त को आरोपी को रौनापार थाने में दाखिल किया गया। इसके बाद मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। आगे की कार्रवाई न्यायालय और विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

साइबर अपराधों पर पुलिस की निगरानी

यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग से जुड़े अपराधों की गंभीरता को सामने लाता है। निजी तस्वीरों या वीडियो का बिना अनुमति प्रसार न केवल पीड़ित व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बन सकता है, बल्कि इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है। ऐसे मामलों में पुलिस की साइबर सेल तकनीकी माध्यमों के जरिए संदिग्ध मोबाइल नंबर, डिजिटल गतिविधियों और लोकेशन की जांच करती है।

आजमगढ़ पुलिस की इस कार्रवाई में भी तकनीकी निगरानी महत्वपूर्ण साबित हुई। आरोपी के आजमगढ़ से बाहर महाराष्ट्र में होने के बावजूद साइबर सेल की टीम ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर उसकी संभावित मौजूदगी वाले क्षेत्र की पहचान की। इसके बाद स्थानीय पुलिस के सहयोग से गिरफ्तारी की कार्रवाई पूरी की गई।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल अपराधों की जांच में तकनीकी साक्ष्यों का विशेष महत्व है। इसलिए साइबर सेल की टीम ऐसे मामलों में उपलब्ध डिजिटल जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाती है। इस मामले में भी आरोपी की तलाश के दौरान तकनीकी टीम और थाना पुलिस के बीच समन्वय बनाए रखा गया।

गिरफ्तारी टीम में ये पुलिसकर्मी रहे शामिल

आरोपी की गिरफ्तारी के लिए गठित टीम में रौनापार थाना पुलिस और साइबर सेल के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। पुलिस की ओर से निरीक्षक अपराध एवं विवेचक अशोक कुमार तिवारी तथा कांस्टेबल विकास यादव ने कार्रवाई में भाग लिया।

इसके अलावा साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक रवि प्रकाश गौतम, मुख्य आरक्षी ओम प्रकाश जायसवाल और मुकेश भारती भी संयुक्त टीम का हिस्सा रहे। टीम ने महाराष्ट्र में स्थानीय पुलिस के सहयोग से आरोपी को गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ फिलहाल इसी मामले से संबंधित आपराधिक इतिहास दर्ज है। मामले की विवेचना अभी जारी है और पुलिस आगे आवश्यक साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई कर रही है।

सोशल मीडिया यूजर्स के लिए जरूरी सावधानी

ऐसे मामलों में पुलिस लगातार लोगों से अपील करती रही है कि किसी व्यक्ति की निजी तस्वीर या वीडियो को उसकी अनुमति के बिना सोशल मीडिया पर साझा न करें। इसी तरह, यदि किसी व्यक्ति को ऑनलाइन धमकी, ब्लैकमेलिंग या निजी सामग्री के दुरुपयोग का सामना करना पड़ता है तो उसे तत्काल पुलिस या साइबर अपराध से संबंधित आधिकारिक माध्यमों पर शिकायत करनी चाहिए।

आजमगढ़ में हुई इस गिरफ्तारी से यह भी स्पष्ट है कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों में आरोपी यदि दूसरे राज्य में चला जाए, तब भी तकनीकी जांच और पुलिस के आपसी समन्वय के जरिए उस तक पहुंचने का प्रयास किया जा सकता है।