बदायूं की गौशालाओं में गौवंशों की मौत पर शासन सख्त, मंत्री धर्मपाल सिंह ने किया निरीक्षण

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रिपोर्ट: वीपिन यादव

बदायूं। जिले की गौशालाओं में गौवंशों की मौत के मामले को शासन ने गंभीरता से लिया है। इसी क्रम में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने म्याऊं विकास क्षेत्र के अभिगांव स्थित गौशाला का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गौशाला की व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं मिलने पर मंत्री ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से गौवंशों की मौत तथा वहां की व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी ली।

मंत्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गौशालाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि गौवंशों की मौत के मामले में जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाएगी और जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। मंत्री ने दो टूक कहा कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

अभिगांव गौशाला में मौतों के आंकड़ों को लेकर सवाल

अभिगांव गौशाला में गौवंशों की मौत को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। स्थानीय चश्मदीदों की ओर से करीब 70 गौवंशों की मौत का दावा किया गया है। वहीं, जिला प्रशासन ने अभिगांव गौशाला में 20 गौवंशों की मौत की पुष्टि की है।

मौतों की संख्या को लेकर सामने आए इस अंतर के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर वास्तविक मौतों की संख्या कम बताए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन ने मामले की जांच के लिए अलग समिति गठित की है, जिससे मौतों की वास्तविक संख्या, कारण और जिम्मेदारी तय की जा सके।

ब्यौर गौशाला में भी 20 गौवंशों की मौत की पुष्टि

यह मामला केवल अभिगांव गौशाला तक सीमित नहीं है। सालारपुर क्षेत्र की ब्यौर गौशाला में भी 20 गौवंशों की मौत की प्रशासन की ओर से पुष्टि की गई है। दोनों स्थानों पर हुई घटनाओं के बाद जिला प्रशासन ने अलग-अलग जांच समितियां गठित की हैं।

जांच समितियों को गौशालाओं में उपलब्ध व्यवस्थाओं, पशुओं के रखरखाव, चारे-पानी की व्यवस्था, उपचार और निगरानी सहित विभिन्न पहलुओं की जांच करनी है। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और गौशाला संचालकों की ओर से निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन किया गया था या नहीं।

दो ग्राम पंचायत सचिव निलंबित

प्रशासन ने मामले में शुरुआती कार्रवाई भी शुरू कर दी है। अभिगांव और ब्यौर गौशालाओं से जुड़े दो ग्राम पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही म्याऊं और सालारपुर क्षेत्र के पशु चिकित्साधिकारियों के निलंबन की संस्तुति भी की गई है।

संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद गौशालाओं की निगरानी व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

दोनों गौशालाओं से जुड़े एनजीओ ब्लैकलिस्ट

गौशालाओं के संचालन से जुड़े एनजीओ पर भी प्रशासन ने कार्रवाई की है। अभिगांव और ब्यौर गौशालाओं से जुड़े एनजीओ को ब्लैकलिस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, गौशाला संचालकों के खिलाफ संबंधित थानों में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।

अभिगांव गौशाला मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब जांच के निष्कर्ष पर नजर बनी हुई है। खासतौर पर यह पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा कि गौवंशों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किस स्तर पर लापरवाही सामने आती है।

बिना सीसीटीवी वाली गौशालाओं में लगेंगे कैमरे

मामले के बाद प्रशासन ने जिले की गौशालाओं की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। जिन गौशालाओं में अभी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं, वहां कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य गौशालाओं में होने वाली गतिविधियों और पशुओं की देखभाल की लगातार निगरानी करना है।

इसके अलावा गौशालाओं के नियमित निरीक्षण पर भी जोर दिया गया है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि गौवंशों के लिए पर्याप्त चारा, पानी, उपचार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें। नियमित निरीक्षण से व्यवस्थाओं में कमी सामने आने पर समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।

जांच के बाद साफ होगी मौतों की वास्तविक वजह

अभिगांव और ब्यौर गौशालाओं में गौवंशों की मौत के बाद अब जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। खास तौर पर अभिगांव में मौतों की संख्या को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों के कारण जांच की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

मंत्री धर्मपाल सिंह के निरीक्षण के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हुई है। अब यह देखना होगा कि जांच समितियां अपनी रिपोर्ट में मौतों की वास्तविक संख्या और कारणों के बारे में क्या तथ्य सामने रखती हैं। साथ ही, जिन अधिकारियों, कर्मचारियों, संचालकों या अन्य संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय होगी, उनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर भी नजर रहेगी।

फिलहाल बदायूं की अभिगांव और ब्यौर गौशालाओं से जुड़े मामले ने जिले में गौशालाओं की निगरानी, संचालन और पशु देखभाल की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। शासन स्तर से सख्ती के बाद उम्मीद है कि जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति सामने आएगी और जिम्मेदारी तय होने के साथ व्यवस्थाओं में सुधार की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।