बागपत में करोड़ों की साइबर ठगी का खुलासा, बीमा पॉलिसी के नाम पर 8 आरोपी गिरफ्तार
रिपोर्ट: हैदर मलिक
बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी बीमा पॉलिसी रिन्यू कराने और लैप्स पॉलिसी को दोबारा चालू कराने के नाम पर देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को फोन करते थे। इसके बाद विभिन्न शुल्क और अन्य बहानों से पीड़ितों से रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से स्कॉर्पियो-एन कार, बाइक, 17 मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य सामान बरामद किया है। प्रारंभिक जांच में इस गिरोह के खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर करीब 53 शिकायतें सामने आने की बात पुलिस ने कही है। पुलिस अब गिरोह के नेटवर्क, अन्य संभावित आरोपियों और ठगी से जुड़ी रकम की जानकारी जुटाने में लगी है।
महिला से करीब दो लाख रुपये की ठगी के बाद सामने आया मामला
पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी का यह मामला उस समय जांच के दायरे में आया, जब एक महिला ने करीब दो लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तकनीकी माध्यमों से जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को ऐसे कई मामलों के बारे में जानकारी मिली, जिनमें लोगों को बीमा पॉलिसी से संबंधित सेवाओं का झांसा देकर रकम ट्रांसफर कराई गई थी।
जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर ऐसे नंबरों और खातों के बारे में जानकारी मिली, जिनका इस्तेमाल लोगों से संपर्क करने और रकम प्राप्त करने के लिए किया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों की पहचान कर कार्रवाई शुरू की।
बैंक और बीमा कंपनियों के नाम पर बनाया जाता था भरोसा
पुलिस का कहना है कि आरोपी ऑनलाइन माध्यमों से संभावित ग्राहकों का डाटा हासिल करते थे। इसके बाद वे लोगों को फोन करके खुद को Axis Bank, Tata, ICICI और Bajaj जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों से जुड़ा कर्मचारी बताते थे। बातचीत के दौरान आरोपी संबंधित व्यक्ति को उसकी बीमा पॉलिसी के रिन्यूअल या लैप्स पॉलिसी को दोबारा चालू कराने की बात कहते थे।
इसके बाद कथित तौर पर पॉलिसी बहाल करने, प्रोसेसिंग फीस, टैक्स अथवा अन्य शुल्क के नाम पर अलग-अलग रकम जमा करने के लिए कहा जाता था। शुरुआत में छोटी रकम जमा कराने के बाद कई मामलों में पीड़ितों से अलग-अलग कारण बताकर अधिक रकम ट्रांसफर कराने का प्रयास किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, साइबर ठगों की पूरी प्रक्रिया इस तरह तैयार की गई थी कि सामने वाले व्यक्ति को बातचीत के दौरान भरोसा हो जाए। इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपियों द्वारा बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई जाती थी।
NCRP पर मिलीं करीब 53 शिकायतें
साइबर क्राइम थाना पुलिस की जांच में NCRP पोर्टल पर आरोपियों से जुड़े करीब 53 शिकायतों का विवरण सामने आने की बात कही गई है। पुलिस के अनुसार, इन शिकायतों का संबंध अलग-अलग स्थानों पर हुई साइबर ठगी से बताया गया है। इससे जांच एजेंसियों को यह संकेत मिला कि गिरोह केवल बागपत तक सीमित नहीं था, बल्कि अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में लोगों को निशाना बनाने का प्रयास कर रहा था।
हालांकि, पुलिस अभी पूरे नेटवर्क और ठगी की कुल रकम का सत्यापन कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गिरोह ने कुल कितने लोगों से कितनी रकम की ठगी की।
मेरठ और गाजियाबाद के रहने वाले हैं गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मेरठ और गाजियाबाद के रहने वाले आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में कई पढ़े-लिखे युवा भी शामिल हैं। इनमें BBA की पढ़ाई करने वाला एक आरोपी और एक PhD स्कॉलर भी शामिल बताया गया है।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने कथित तौर पर कम समय में अधिक पैसा कमाने के लालच में साइबर अपराध का रास्ता अपनाया। पूछताछ के दौरान पुलिस को गिरोह के काम करने के तरीके और आपसी संपर्कों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की उम्मीद है।
करोड़ों रुपये की ठगी का पुलिस ने जताया अनुमान
बागपत पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में इस गिरोह द्वारा करीब 50 लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने गिरोह द्वारा करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने की बात कही है। हालांकि, ठगी की सटीक रकम का आकलन जांच पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा।
एसपी बागपत सूरज कुमार राय ने पुलिस लाइन में मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई साइबर ठगी की शिकायत की जांच के आधार पर की गई। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस गिरोह से और कितने लोग जुड़े हुए हैं।
पूछताछ से सामने आएगा गिरोह का पूरा नेटवर्क
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक खातों और अन्य डिजिटल माध्यमों की जांच कर रही है। इसके अलावा ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए डाटा और संभावित पीड़ितों की जानकारी भी खंगाली जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों को संभावित ग्राहकों का डाटा कहां से मिलता था और रकम ट्रांसफर होने के बाद उसका इस्तेमाल किस तरह किया जाता था। साथ ही, दूसरे राज्यों में मौजूद संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब साइबर ठगी के मामलों में अपराधी बैंक, बीमा कंपनी, सरकारी विभाग या अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों का नाम लेकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी अनजान कॉल पर व्यक्तिगत, बैंकिंग या बीमा संबंधी जानकारी साझा करने से पहले संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना जरूरी है।

