दिल्ली HC में एक्साइज पॉलिसी केस की सुनवाई, CBI की चुनौती पर 5-6 अक्टूबर को अगली सुनवाई

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Digital UP News

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट में आबकारी नीति मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ट्रायल कोर्ट की ओर से अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने के आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि इसे अलग-अलग हिस्सों में बांटकर नहीं सुना जाएगा।

सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की ओर से मामले की याचिका की योग्यता पर सवाल उठाए गए। वहीं, CBI की ओर से ट्रायल कोर्ट के डिस्चार्ज आदेश को चुनौती देते हुए अपनी दलीलें रखी जा रही हैं। अदालत ने अब मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 और 6 अक्टूबर की तारीख तय की है।

केजरीवाल की ओर से सुनवाई के दौरान जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया था। अदालत ने CBI की ओर से दाखिल लिखित सबमिशन पर जवाब देने के लिए समय मंजूर कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा।

CBI ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को दी चुनौती

आबकारी नीति मामले में CBI ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त किया गया था। CBI का कहना है कि ट्रायल कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट में पुनर्विचार की आवश्यकता है।

इस चुनौती के बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट के सामने पहुंचा है। अब हाईकोर्ट को यह देखना है कि CBI की ओर से उठाए गए सवालों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता है या नहीं।

हालांकि, हाईकोर्ट ने अभी मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत की अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सामने आएंगी।

केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से याचिका की योग्यता पर सवाल

सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की ओर से CBI की चुनौती की योग्यता पर सवाल उठाए गए। यानी बचाव पक्ष की ओर से अदालत के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया कि CBI की ओर से दायर चुनौती को किस आधार पर और किस सीमा तक सुनवाई के लिए स्वीकार किया जा सकता है।

इस पहलू पर दोनों पक्षों की ओर से आगे भी दलीलें रखे जाने की संभावना है। अदालत अब निर्धारित तारीखों पर मामले के विभिन्न कानूनी पहलुओं को सुनेगी।

ऐसे मामलों में याचिका की प्रारंभिक स्वीकार्यता महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसके बाद ही अदालत मुख्य मुद्दों पर विस्तृत सुनवाई आगे बढ़ाती है।

मामले को टुकड़ों में नहीं सुनेगा हाईकोर्ट

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर नहीं सुना जाएगा। अदालत का यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामले में कई आरोपी और उनसे जुड़े कानूनी मुद्दे शामिल हैं।

कोर्ट एक समग्र तरीके से मामले को सुनना चाहता है, ताकि सभी संबंधित पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर एक साथ विचार किया जा सके।

इसका मतलब यह है कि सुनवाई के दौरान अलग-अलग आरोपियों या मुद्दों को अलग करके प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बजाय अदालत पूरे मामले के संदर्भ में उपलब्ध सामग्री और कानूनी सवालों पर विचार करेगी।

केजरीवाल की ओर से मांगा गया चार सप्ताह का समय

सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल की ओर से CBI के लिखित सबमिशन पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया। अदालत ने जवाब देने के लिए समय देने की अनुमति दी।

हालांकि, कोर्ट ने साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा। यानी अब संबंधित पक्षों को अदालत द्वारा दी गई समय सीमा के भीतर अपनी प्रतिक्रिया और लिखित जवाब तैयार करना होगा।

अदालत की ओर से समय सीमा स्पष्ट किए जाने के बाद मामले की अगली सुनवाई की प्रक्रिया भी तय हो गई है।

5 और 6 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 और 6 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। इन दोनों दिनों में CBI की मुख्य दलीलें शुरू होने की बात कही गई है।

CBI की ओर से ट्रायल कोर्ट के डिस्चार्ज आदेश को चुनौती देने के आधार पर विस्तृत कानूनी दलीलें पेश की जाएंगी। इसके बाद बचाव पक्ष को अपनी ओर से जवाब रखने का अवसर मिलेगा।

अदालत के सामने मुख्य सवाल यह होगा कि ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोपमुक्त किए जाने का आदेश कानूनी रूप से सही था या उसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

लिखित सबमिशन पर जवाब देने का समय

सुनवाई के दौरान CBI की ओर से लिखित सबमिशन दाखिल किए जाने की जानकारी अदालत के सामने आई। इसके जवाब में केजरीवाल की ओर से समय की मांग की गई।

अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मंजूर कर दिया है। हालांकि, इसके साथ यह भी साफ कर दिया गया कि आगे अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

इससे अब सभी संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपनी दलीलों और दस्तावेजों को व्यवस्थित करना होगा।

आबकारी नीति मामला क्यों है महत्वपूर्ण?

दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़ा यह मामला पिछले कुछ समय से देश की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया में चर्चा का विषय रहा है। मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित कई लोगों के नाम सामने आए हैं।

जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अदालतों में चल रही सुनवाई के कारण यह मामला लगातार सुर्खियों में रहा है। अब ट्रायल कोर्ट के डिस्चार्ज आदेश को CBI की ओर से चुनौती दिए जाने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई जारी है।

हालांकि, इस स्तर पर अदालत को केवल CBI की चुनौती पर सुनवाई करनी है। अंतिम कानूनी स्थिति अदालत की आगे की सुनवाई और आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

हाईकोर्ट के सामने क्या है मुख्य मुद्दा?

दिल्ली हाईकोर्ट के सामने मुख्य रूप से CBI की ओर से ट्रायल कोर्ट के डिस्चार्ज आदेश को चुनौती देने का मामला है। अदालत को दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड के आधार पर यह तय करना होगा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश की न्यायिक समीक्षा की जरूरत है या नहीं।

इसके अलावा, केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से याचिका की योग्यता को लेकर उठाए गए सवालों पर भी अदालत विचार करेगी।

इसलिए अगली सुनवाई में प्रक्रिया से जुड़े सवालों के साथ-साथ मामले के कानूनी पक्ष पर भी विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।

अब आगे क्या होगा?

अब मामले की अगली सुनवाई 5 और 6 अक्टूबर को होगी। CBI अपनी मुख्य दलीलें पेश करेगी। इसके पहले बचाव पक्ष को CBI के लिखित सबमिशन पर जवाब दाखिल करने के लिए दिया गया समय मिलेगा।

कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इसके बाद अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। इसलिए अब सभी पक्षों को निर्धारित समय के भीतर अपनी तैयारी पूरी करनी होगी।

आगे की सुनवाई में हाईकोर्ट यह देखेगा कि ट्रायल कोर्ट के डिस्चार्ज आदेश को चुनौती देने के लिए CBI की दलीलों में कितना कानूनी आधार है और बचाव पक्ष की ओर से उठाए गए प्रारंभिक सवालों का क्या प्रभाव पड़ता है।

फिलहाल, अदालत ने किसी अंतिम निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है। मामले की सुनवाई जारी है और अगली तारीख पर CBI की मुख्य दलीलें सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।

दिल्ली हाईकोर्ट में आबकारी नीति मामले की सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलू सामने आए। CBI ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। वहीं, केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से इस चुनौती की योग्यता पर सवाल उठाए गए हैं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर नहीं सुना जाएगा। केजरीवाल की ओर से चार सप्ताह का समय मांगने पर अदालत ने CBI के लिखित सबमिशन का जवाब देने के लिए समय मंजूर किया, लेकिन यह भी साफ कर दिया कि इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा।

अब 5 और 6 अक्टूबर को CBI की मुख्य दलीलें शुरू होंगी। इसके बाद अदालत मामले के विभिन्न कानूनी पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगी। इसलिए अगली सुनवाई को आबकारी नीति मामले की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।