स्वतंत्रता दिवस पर मत्स्य विभाग का बड़ा आयोजन, PM-MKSSY से मछुआरों और युवाओं को बढ़ावा

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: देश के मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र के योगदान को रेखांकित करते हुए मत्स्य विभाग ने 15 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। देशभर से आए मछुआरों, मछली पालकों, युवाओं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की भागीदारी ने इस आयोजन को खास बना दिया। समारोह का आयोजन “वंदे मातरम के 150 वर्ष” और “विकसित भारत 2047 के लिए युवा शक्ति” जैसे राष्ट्रीय विषयों के अनुरूप किया गया।

इस अवसर पर देश के स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरणा देने वाले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की विरासत को याद किया गया। साथ ही, राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका और मत्स्य पालन क्षेत्र में उनकी बढ़ती भागीदारी को भी प्रमुखता से सामने रखा गया।

मत्स्य पालन भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और नीली अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह क्षेत्र लगभग 3 करोड़ मछुआरों और मछली पालकों को आजीविका प्रदान करता है। इसके अलावा, मछली उत्पादन, प्रसंस्करण, परिवहन, विपणन और निर्यात से जुड़ी पूरी मूल्य श्रृंखला में भी रोजगार के बड़े अवसर पैदा होते हैं।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश

भारत आज वैश्विक मत्स्य पालन क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक है और वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत योगदान देता है। इसके साथ ही, भारत जलीय कृषि उत्पादन में भी दूसरे स्थान पर है।

झींगा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में भारत की विशेष पहचान है। इसके अलावा, समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी देश प्रमुख उत्पादकों में शामिल है।

इस क्षेत्र की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए सरकार की ओर से पिछले वर्षों में मत्स्य पालन और जलीय कृषि के विकास के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। इनका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मछुआरों और मछली पालकों की आय, बुनियादी सुविधाओं और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना है।

2015 से मत्स्य क्षेत्र में 39,272 करोड़ रुपये का निवेश

सरकार के अनुसार, वर्ष 2015 से मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत विकास के लिए कुल 39,272 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इसके तहत नीली क्रांति योजना, मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष यानी FIDF, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और इसकी उप-योजना प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) जैसी प्रमुख पहलों को आगे बढ़ाया गया है।

इन योजनाओं के जरिए मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, आधुनिक तकनीक को अपनाने और मछुआरों तथा मछली पालकों को बेहतर आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

इसके परिणामस्वरूप मत्स्य पालन को केवल पारंपरिक आजीविका के रूप में देखने के बजाय इसे आधुनिक उद्यम और रोजगार के महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

विकसित भारत 2047 में युवा शक्ति की बड़ी भूमिका

स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम “विकसित भारत@2047 के लिए युवा शक्ति” के अनुरूप मत्स्य पालन क्षेत्र में युवाओं की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया। आज के युवा पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नए कारोबारी मॉडल को अपनाकर इस क्षेत्र में बदलाव ला रहे हैं।

युवा मछुआरे और मछली पालक आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों से लेकर डिजिटल ट्रेसबिलिटी, कोल्ड-चेन प्रबंधन, मूल्यवर्धन, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात तक पूरी मूल्य श्रृंखला में नई सोच लेकर आ रहे हैं।

इसके अलावा, युवा उद्यमियों और स्टार्टअप के लिए भी मत्स्य पालन क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ रही हैं। तकनीक के इस्तेमाल से उत्पादन, भंडारण, परिवहन और बाजार तक पहुंच को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।

इसलिए आने वाले वर्षों में युवाओं की भागीदारी भारत की नीली अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

PM-MKSSY लाभार्थियों से हुआ संवाद

लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद मत्स्य विभाग ने प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना यानी PM-MKSSY के लाभार्थियों और उनके जीवनसाथियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य योजना से जुड़े लाभार्थियों के अनुभवों को सामने लाना और यह समझना था कि सरकारी सहायता से उनके जीवन और आजीविका में किस प्रकार बदलाव आया है।

संवाद के दौरान लाभार्थियों ने बताया कि सरकारी सहायता की मदद से उन्हें आधुनिक पद्धतियां अपनाने, अपनी आजीविका को मजबूत करने और आय के नए अवसर विकसित करने में मदद मिली है।

इस कार्यक्रम ने यह भी दिखाया कि यदि योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए, तो पारंपरिक क्षेत्रों में भी नए आर्थिक अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

पांच लाभार्थियों को राष्ट्रपति भवन में आमंत्रण

PM-MKSSY के पांच लाभार्थियों को राष्ट्रपति की ओर से नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित “घर पर” स्वागत समारोह में आमंत्रित किया गया।

इन लाभार्थियों में असम के नितुल चंद्र दास, ओडिशा के सुरेश चंद्र राउत, महाराष्ट्र के एकनाथ राम मुकाने, उत्तर प्रदेश के आकाश सिंह और बिहार की मीशा सिंह शामिल थीं।

इन लाभार्थियों की मौजूदगी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की भागीदारी को सामने रखा। संवाद के दौरान उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि सरकारी सहायता ने उन्हें आजीविका सुधारने, आधुनिक तकनीक अपनाने तथा आय के अवसरों का विस्तार करने में किस तरह मदद की।

PM-MKSSY को 2024 में मिली थी मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत केंद्रीय क्षेत्र की उप-योजना प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) को मंजूरी दी थी।

यह योजना वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक चार वर्षों की अवधि के लिए लागू की जा रही है। योजना को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 6,000 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय के साथ लागू करने का प्रावधान है।

इसका मुख्य उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र की संरचनात्मक कमियों को दूर करना और क्षेत्र के दीर्घकालिक परिवर्तन के लिए संस्थागत सुधारों को बढ़ावा देना है।

मछुआरों को संस्थागत वित्त तक पहुंच का प्रयास

PM-MKSSY के तहत मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए संस्थागत वित्त तक पहुंच आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है। इसके दायरे में मछली पालक, मछुआरे और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े सूक्ष्म एवं लघु उद्यम शामिल हैं।

योजना के तहत कार्यशील पूंजी समेत संस्थागत वित्त तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे छोटे स्तर के मछली पालकों और उद्यमियों को अपनी गतिविधियों का विस्तार करने में सहायता मिल सकती है।

इसके अलावा, जलीय कृषि करने वाले लाभार्थियों को एक फसल चक्र के लिए मत्स्य पालन बीमा खरीदने पर एकमुश्त प्रोत्साहन देने का भी प्रावधान है।

राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से औपचारिककरण

PM-MKSSY का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र के असंगठित हिस्से का क्रमिक औपचारिककरण करना है। इसके लिए राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) के तहत कार्य-आधारित डिजिटल पहचान तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

डिजिटल पहचान और बेहतर डेटा व्यवस्था से लाभार्थियों तक सरकारी सेवाओं और योजनाओं की पहुंच आसान बनाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इससे मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़े लोगों की पहचान और योजनाओं के लक्षित क्रियान्वयन को भी बेहतर बनाया जा सकता है।

डिजिटल व्यवस्था के विस्तार के साथ भविष्य में इस क्षेत्र में ट्रेसबिलिटी और बाजार से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

सूक्ष्म और लघु उद्यमों को प्रोत्साहन

PM-MKSSY के तहत मत्स्य पालन और जलीय कृषि से जुड़े सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए प्रदर्शन अनुदान जैसी व्यवस्थाओं का उपयोग किया जा सकता है।

इसका उद्देश्य मूल्य श्रृंखला की दक्षता बढ़ाना, मछली और मत्स्य उत्पादों की सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करना और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है।

साथ ही, मछली उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन, विपणन और निर्यात तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

योजना के दायरे में कई वर्ग

PM-MKSSY के लक्षित लाभार्थियों में मत्स्यपालक, मत्स्य श्रमिक और मत्स्य विक्रेता शामिल हैं। इसके साथ ही भारत में पंजीकृत मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि से जुड़े सूक्ष्म और लघु उद्यम भी इसके दायरे में आते हैं।

इनमें निजी फर्म, साझेदारी फर्म, कंपनियां, समितियां, सीमित देयता भागीदारी, सहकारी समितियां, संघ और ग्राम स्तर के संगठन शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह, मत्स्यपालक उत्पादक संगठन और मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़े स्टार्टअप भी योजना के लक्षित लाभार्थियों में शामिल हैं।

इस व्यापक दायरे का उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र में काम करने वाले विभिन्न वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

नीली अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

भारत की अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन क्षेत्र की भूमिका आने वाले वर्षों में और बढ़ने की संभावना है। उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और निर्यात को बढ़ावा मिलने से इस क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

विशेष रूप से युवा यदि आधुनिक तकनीक और उद्यमिता को मत्स्य पालन से जोड़ते हैं, तो इससे ग्रामीण और तटीय अर्थव्यवस्था में नई गतिशीलता आ सकती है।

सरकार की ओर से भी सतत नीतिगत समर्थन, अवसंरचना विकास, तकनीक अपनाने और समावेशी कल्याणकारी उपायों के माध्यम से इस क्षेत्र को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है।

विकसित भारत@2047 में मत्स्य क्षेत्र की भूमिका

80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित मत्स्य विभाग का कार्यक्रम केवल एक सरकारी आयोजन तक सीमित नहीं रहा। इसमें मछुआरों, मछली पालकों, युवाओं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के योगदान को सामने लाया गया।

भारत के लगभग 3 करोड़ मछुआरों और मछली पालकों की आजीविका से जुड़ा यह क्षेत्र देश की खाद्य सुरक्षा, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति इस क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं को और बढ़ाती है।

PM-MKSSY, PMMSY और अन्य योजनाओं के माध्यम से तकनीक, वित्त, बीमा, डिजिटल पहचान, बुनियादी ढांचे और बाजार तक पहुंच को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में युवाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ मत्स्य पालन क्षेत्र भारत की नीली अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन सकता है।

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