यूपी पुलिस दरोगा भर्ती 2025: नियुक्ति पत्र जारी करने पर हाईकोर्ट की रोक, 44 से अधिक याचिकाएं लंबित

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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा भर्ती-2025 को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस दरोगा भर्ती-2025 में नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। इस भर्ती प्रक्रिया से संबंधित 44 से अधिक याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित बताई जा रही हैं। याचिकाओं में मुख्य रूप से लिखित परीक्षा की अंतिम उत्तर कुंजी में किए गए बदलाव और उसके आधार पर परिणाम तैयार किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

दरअसल, यूपी पुलिस दरोगा भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा के परिणाम के साथ ही 7 मई को अंतिम उत्तर कुंजी जारी की गई थी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि अंतिम उत्तर कुंजी में कई प्रश्नों के उत्तरों में बदलाव किया गया। इसके बाद परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी। अभ्यर्थियों का कहना है कि जिन प्रश्नों के उत्तर बदले गए, उनका सीधा असर उनके प्राप्त अंकों पर पड़ा और कुछ अभ्यर्थी बेहद कम अंतर से चयन से बाहर हो गए।

2.5 अंक के प्रश्नों ने बढ़ाई परेशानी

अभ्यर्थियों के अनुसार, लिखित परीक्षा में प्रत्येक प्रश्न 2.5 अंक का था। ऐसे में किसी एक प्रश्न के उत्तर में बदलाव होने से अभ्यर्थी के कुल स्कोर में महत्वपूर्ण अंतर आ सकता है। यही वजह है कि अंतिम उत्तर कुंजी में किए गए बदलाव को लेकर अभ्यर्थियों ने आपत्ति दर्ज कराई।

विशेष रूप से उन अभ्यर्थियों के लिए स्थिति महत्वपूर्ण हो गई, जो कटऑफ के आसपास थे। कुछ अभ्यर्थियों का कहना है कि उत्तर कुंजी में बदलाव के कारण वे कुछ अंकों के अंतर से लिखित परीक्षा में सफल नहीं हो सके। वहीं, कुछ अभ्यर्थी ऐसे भी रहे जिन्होंने लिखित परीक्षा के बाद भर्ती की अगली प्रक्रिया में हिस्सा लिया, लेकिन अंतिम परिणाम जारी होने के बाद उनका चयन नहीं हो सका।

14 जुलाई के अंतिम परिणाम के बाद भी उठे सवाल

भर्ती प्रक्रिया का अंतिम परिणाम 14 जुलाई को जारी किया गया। इसके बाद भी कई अभ्यर्थियों ने उत्तर कुंजी में किए गए बदलाव और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि कुछ अभ्यर्थी केवल एक या दो अंक के अंतर से अंतिम चयन से बाहर हो गए।

अभ्यर्थियों ने दावा किया कि उन्होंने बदले गए प्रश्नों और उत्तरों को लेकर भर्ती बोर्ड के समक्ष अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई थीं। हालांकि, उनका आरोप है कि इन आपत्तियों पर अपेक्षित तरीके से विचार नहीं किया गया। इसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने न्यायालय का रुख किया और अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कीं।

44 से अधिक याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित

इस मामले में 44 से अधिक याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष लंबित बताई जा रही हैं। याचिकाओं में अभ्यर्थियों ने अंतिम उत्तर कुंजी में किए गए बदलाव, उनके परिणाम पर पड़े प्रभाव और चयन प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न बिंदुओं को चुनौती दी है।

अभ्यर्थियों की ओर से न्यायालय के समक्ष यह मुद्दा रखा गया है कि यदि उत्तर कुंजी में बदलाव किया गया है, तो उसका प्रभाव सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से पड़ना चाहिए। साथ ही, जिन अभ्यर्थियों ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं, उनकी आपत्तियों पर उचित विचार किए जाने की मांग भी उठाई गई है।

नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक का क्या असर होगा?

हाईकोर्ट द्वारा नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगाए जाने से भर्ती प्रक्रिया फिलहाल न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है। इसका सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है, जो अंतिम परिणाम के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ने की प्रतीक्षा कर रहे थे।

हालांकि, नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक का अर्थ यह नहीं है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया स्वतः रद्द हो गई है। आगे की स्थिति न्यायालय में लंबित याचिकाओं पर होने वाली सुनवाई और न्यायालय के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगी। इसलिए अभ्यर्थियों के लिए अगली सुनवाई और न्यायालय के आदेश महत्वपूर्ण होंगे।

अभ्यर्थियों को आगे के आदेश का इंतजार

फिलहाल भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों की नजर हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर है। एक ओर चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थी उत्तर कुंजी में हुए बदलाव और उसके परिणाम पर पड़े प्रभाव को लेकर न्यायिक राहत की उम्मीद कर रहे हैं।

ऐसे में आने वाले दिनों में न्यायालय की कार्यवाही से यह स्पष्ट हो सकता है कि विवादित प्रश्नों और अंतिम उत्तर कुंजी को लेकर क्या दिशा तय होती है। साथ ही, नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के संबंध में भी न्यायालय के अगले आदेश का इंतजार रहेगा।

यूपी पुलिस दरोगा भर्ती-2025 में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का भविष्य इस मामले से जुड़ा हुआ है। इसलिए न्यायालय में चल रही सुनवाई और भर्ती बोर्ड की ओर से आगे उठाए जाने वाले कदम अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

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