UDISE Plus 2025-26 रिपोर्ट: 24.72 करोड़ छात्रों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार, जानें प्रमुख आंकड़े
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षक उपलब्धता, छात्र-शिक्षक अनुपात, नामांकन और लैंगिक समानता के स्तर पर लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है। UDISE Plus 2025-26 रिपोर्ट में देशभर की स्कूली शिक्षा व्यवस्था का व्यापक आकलन प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट के दायरे में 14.67 लाख स्कूल, 1.03 करोड़ शिक्षक और 24.72 करोड़ छात्र शामिल हैं।
रिपोर्ट में स्कूली शिक्षा के विभिन्न चरणों में नामांकन, सकल नामांकन अनुपात (GER), छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR), छात्रों के प्रतिधारण और संक्रमण दरों में सुधार को रेखांकित किया गया है। इसके अलावा, स्कूलों में बिजली, पेयजल, शौचालय, लाइब्रेरी और हाथ धोने जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ डिजिटल और भौतिक अवसंरचना में हुई प्रगति को भी सामने रखा गया है।
वहीं, महिला शिक्षकों की भागीदारी, लैंगिक समानता और सामाजिक समावेशन में सुधार को भी रिपोर्ट में महत्वपूर्ण उपलब्धियों के रूप में दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों का इस्तेमाल शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति को समझने और भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है।
UDISE Plus क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण?
यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE Plus) स्कूली शिक्षा से संबंधित आंकड़ों के संग्रह और प्रबंधन के लिए विकसित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसे स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने देशभर के स्कूलों से शिक्षा संबंधी विस्तृत आंकड़े जुटाने के लिए विकसित किया है।
UDISE Plus की शुरुआत 2018-19 में हुई थी। इसके बाद से यह देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था से जुड़े आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। इसके माध्यम से स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती है।
इसके अलावा, यह प्लेटफॉर्म शिक्षा क्षेत्र में साक्ष्य आधारित योजना निर्माण, नीति निर्धारण और प्रगति की निगरानी में भी मदद करता है। खास तौर पर नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों की दिशा में हो रही प्रगति को समझने में इन आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
सेकेंडरी स्तर पर GER में सुधार
UDISE Plus 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार, स्कूली शिक्षा के सेकेंडरी चरण में सकल नामांकन अनुपात (GER) बढ़कर 71.7 प्रतिशत हो गया है। वहीं, मिडिल चरण में GER 89.6 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बना हुआ है।
GER किसी शिक्षा स्तर की निर्धारित आयु सीमा की तुलना में उस स्तर पर कुल नामांकन को दर्शाने वाला महत्वपूर्ण संकेतक है। इसलिए इसमें सुधार को शिक्षा तक पहुंच बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।
रिपोर्ट में स्कूली शिक्षा के अलग-अलग चरणों में कुल नामांकन के वितरण को भी सामने रखा गया है। कुल नामांकन में सेकेंडरी चरण की हिस्सेदारी 27.16 प्रतिशत है। इसके बाद प्रिपरेटरी चरण का हिस्सा 25.60 प्रतिशत, मिडिल चरण का 25.58 प्रतिशत और फाउंडेशन चरण का 21.66 प्रतिशत है।
इस प्रकार नामांकन का वितरण विभिन्न चरणों में अपेक्षाकृत संतुलित दिखाई देता है। साथ ही, सेकेंडरी स्तर पर GER में सुधार छात्रों की स्कूली शिक्षा में आगे तक बने रहने की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
छात्र-शिक्षक अनुपात में भी सुधार
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) है। 2025-26 में स्कूली शिक्षा के सभी चरणों में PTR शिक्षकों की उपलब्धता की स्थिति को दर्शाता है।
आंकड़ों के अनुसार:
- फाउंडेशन चरण: 10:1
- प्रिपरेटरी चरण: 12:1
- मिडिल चरण: 17:1
- सेकेंडरी चरण: 21:1
PTR का अर्थ किसी खास शिक्षा स्तर पर प्रति शिक्षक छात्रों की संख्या से है। उदाहरण के लिए, 10:1 का अनुपात बताता है कि संबंधित चरण में औसतन 10 छात्रों पर एक शिक्षक उपलब्ध है।
कम PTR का अर्थ सामान्य तौर पर शिक्षक और छात्र के बीच अधिक व्यक्तिगत संवाद की संभावना से जुड़ा होता है। इससे कक्षा में छात्रों की भागीदारी, उनकी शंकाओं के समाधान और सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, केवल PTR के आधार पर शिक्षा की गुणवत्ता का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता। शिक्षकों की योग्यता, प्रशिक्षण, विषयवार उपलब्धता और स्कूल के अन्य संसाधन भी शिक्षा की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्कूलों में बिजली और पेयजल की स्थिति बेहतर
UDISE Plus 2025-26 रिपोर्ट में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट के अनुसार, देश के 95 प्रतिशत स्कूलों में बिजली की सुविधा उपलब्ध है।
वहीं, 99.5 प्रतिशत स्कूलों में पीने के साफ पानी की सुविधा दर्ज की गई है। स्कूली वातावरण में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता छात्रों के स्वास्थ्य और नियमित उपस्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
लड़कियों के लिए शौचालय की सुविधा 98.5 प्रतिशत स्कूलों में उपलब्ध है, जबकि 97.2 प्रतिशत स्कूलों में लड़कों के लिए शौचालय की सुविधा दर्ज की गई है।
इसके अलावा, 96.9 प्रतिशत स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा उपलब्ध है। ये सुविधाएं स्कूलों में स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़े बेहतर वातावरण के निर्माण में मदद कर सकती हैं।
लाइब्रेरी और वर्षा जल संचयन की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, देश के 90.5 प्रतिशत स्कूलों में लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है। पुस्तकालय छात्रों में पढ़ने की आदत विकसित करने और पाठ्यक्रम से बाहर की जानकारी हासिल करने का माध्यम बन सकते हैं।
वहीं, 29.9 प्रतिशत स्कूलों में वर्षा जल संचयन की सुविधा दर्ज की गई है। जल संरक्षण के बढ़ते महत्व को देखते हुए स्कूलों में ऐसी सुविधाओं का विस्तार पर्यावरणीय जागरूकता को भी बढ़ावा दे सकता है।
इसके अलावा, 58.2 प्रतिशत स्कूलों में हैंडरेल वाले रैंप उपलब्ध हैं। यह सुविधा विशेष आवश्यकता वाले छात्रों के लिए स्कूलों को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
डिजिटल शिक्षा और अवसंरचना पर जोर
स्कूलों में भौतिक सुविधाओं के साथ-साथ डिजिटल अवसंरचना का विस्तार भी शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव ला रहा है। UDISE Plus रिपोर्ट में डिजिटल तैयारी और भौतिक अवसंरचना में हुई प्रगति को भी रेखांकित किया गया है।
तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच डिजिटल संसाधन छात्रों और शिक्षकों को अतिरिक्त शैक्षणिक सामग्री तक पहुंच प्रदान कर सकते हैं। हालांकि, डिजिटल शिक्षा का प्रभावी उपयोग तभी संभव है जब स्कूलों में आवश्यक उपकरण, इंटरनेट कनेक्टिविटी और शिक्षकों का प्रशिक्षण भी पर्याप्त हो।
इसलिए डिजिटल सुविधाओं का विस्तार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की व्यापक प्रक्रिया का एक हिस्सा है।
महिला शिक्षकों की भागीदारी और लैंगिक समानता
रिपोर्ट में महिला शिक्षकों की भागीदारी में वृद्धि और लैंगिक समानता की दिशा में हुई प्रगति को भी दर्ज किया गया है। शिक्षा व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना छात्राओं के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने में मदद कर सकता है।
इसके साथ ही, सामाजिक समावेशन और शिक्षा की सुलभता में सुधार को भी रिपोर्ट में महत्वपूर्ण बताया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों को शिक्षा के समान अवसर मिल सकें।
NEP 2020 के लिए आंकड़ों की अहमियत
नई शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा को अधिक समावेशी, गुणवत्तापूर्ण, कौशल आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया है। ऐसे में UDISE Plus जैसे डेटाबेस नीति के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
स्कूलों, शिक्षकों और छात्रों से जुड़े विस्तृत आंकड़ों के आधार पर उन क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है, जहां अतिरिक्त संसाधनों या विशेष योजनाओं की जरूरत है। इसी प्रकार, नामांकन, प्रतिधारण और संक्रमण दरों के आंकड़े यह समझने में मदद कर सकते हैं कि विद्यार्थी किस स्तर पर शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो रहे हैं।
इस तरह आंकड़ा आधारित प्रशासन से शिक्षा योजनाओं को जरूरत के अनुसार तैयार करने और उनके परिणामों की निगरानी करने में मदद मिलती है।
शिक्षा व्यवस्था के लिए आगे की चुनौती
UDISE Plus 2025-26 के आंकड़े कई क्षेत्रों में सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं, लेकिन शिक्षा व्यवस्था के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। केवल स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, विषयवार पर्याप्त शिक्षक, बेहतर सीखने के परिणाम और छात्रों की निरंतर भागीदारी भी जरूरी है।
इसीलिए आने वाले वर्षों में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा, जहां अभी सुधार की आवश्यकता है।
डेटा आधारित शिक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ता भारत
UDISE Plus 2025-26 रिपोर्ट भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करती है। 14.67 लाख स्कूलों, 1.03 करोड़ शिक्षकों और 24.72 करोड़ छात्रों से जुड़े आंकड़े देश की शिक्षा व्यवस्था के बड़े पैमाने को दर्शाते हैं।
सेकेंडरी स्तर पर 71.7 प्रतिशत GER, मिडिल स्तर पर 89.6 प्रतिशत GER और विभिन्न चरणों में अनुकूल PTR शिक्षा तक पहुंच और शिक्षक उपलब्धता में सुधार के संकेत देते हैं। वहीं बिजली, साफ पानी, शौचालय, लाइब्रेरी और हाथ धोने जैसी सुविधाओं का विस्तार स्कूलों के बुनियादी ढांचे में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि UDISE Plus शिक्षा क्षेत्र में डेटा आधारित निर्णय लेने की संस्कृति को मजबूत कर रहा है। आने वाले समय में इन आंकड़ों का प्रभावी इस्तेमाल कर शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ, तकनीक-सक्षम और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

