कानपुर का शेरशाह सूरी तालाब फिर चर्चा में, सुंदरीकरण के वर्षों बाद भी बदहाल स्थिति पर उठे सवाल – जानिए क्या है पूरा मामला
रिपोर्ट – नीरज तिवारी
कानपुर: चकेरी क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक शेरशाह सूरी तालाब एक बार फिर अपनी बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है। लगभग 500 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक जलाशय का कुछ वर्ष पहले करोड़ों रुपये की लागत से सुंदरीकरण कराया गया था। तालाब का उद्घाटन मेयर प्रमिला पाण्डे और तत्कालीन विधायक एवं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना द्वारा किया गया था|
इसके साथ ही इसका नाम अटल अमृत सरोवर भी रखा गया और संरक्षण एवं रखरखाव के उद्देश्य से एक समिति का गठन किया गया। हालांकि वर्तमान स्थिति को देखकर स्थानीय लोग रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
रविवार को तालाब का निरीक्षण करने पहुंचे स्थानीय लोगों ने बताया कि जलाशय में बड़ी मात्रा में गंदगी जमा है। इसके साथ ही पानी की सतह पर बड़ी संख्या में मृत मछलियां दिखाई दीं।
क्षेत्र में दुर्गंध की भी शिकायत सामने आई है। हालांकि मछलियों की मृत्यु के वास्तविक कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इसके पीछे क्या वजह रही।
ऐतिहासिक महत्व भी रखता है शेरशाह सूरी तालाब
चकेरी क्षेत्र का यह तालाब ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और उपलब्ध ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार इसका निर्माण शेरशाह सूरी के शासनकाल में कराया गया था। वर्षों से यह जल संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय पहचान का भी हिस्सा रहा है।
इसी ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए कुछ वर्ष पहले राज्य सरकार द्वारा तालाब के सुंदरीकरण का कार्य कराया गया। परियोजना का उद्देश्य जलाशय का संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और स्थानीय लोगों को एक स्वच्छ सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराना था।
सुंदरीकरण के बाद बदली थी इसकी पहचान
सुंदरीकरण कार्य के दौरान तालाब के आसपास सौंदर्यीकरण, आधारभूत सुविधाओं के विकास और अन्य सुधार कार्य किए गए। इसी अवधि में इसका नाम बदलकर अटल अमृत सरोवर रखा गया।
इसके अलावा तालाब की नियमित देखरेख सुनिश्चित करने के लिए शेरशाह सूरी तालाब संरक्षण समिति का भी गठन किया गया था। उम्मीद की गई थी कि समिति के माध्यम से समय-समय पर सफाई, जल गुणवत्ता की निगरानी और रखरखाव के कार्य किए जाएंगे।
वर्तमान स्थिति ने बढ़ाई चिंता
हालांकि हाल के दिनों में तालाब की जो तस्वीरें और दृश्य सामने आए हैं, उन्होंने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तालाब के पानी में विभिन्न प्रकार का कचरा और गंदगी दिखाई दे रही है।
इसके साथ ही पानी की सतह पर बड़ी संख्या में मृत मछलियां भी देखी गईं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इससे आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है, जिससे लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
मछलियों की मौत के कारणों की पुष्टि अभी बाकी
तालाब में बड़ी संख्या में मछलियों के मृत मिलने के बाद विभिन्न तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि पानी में ऑक्सीजन की कमी, जल प्रदूषण अथवा अन्य पर्यावरणीय कारण इसके पीछे हो सकते हैं।
हालांकि प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट के आधार पर कारणों की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल इन संभावित कारणों को केवल स्थानीय स्तर पर व्यक्त की गई आशंकाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जल के नमूनों की वैज्ञानिक जांच और पर्यावरणीय विश्लेषण के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट किए जा सकते हैं।
स्थानीय लोगों ने रखी नियमित सफाई की मांग
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि तालाब की नियमित सफाई और जल गुणवत्ता की निगरानी पर्याप्त रूप से नहीं हो रही है। उनका मानना है कि यदि समय-समय पर सफाई अभियान चलाया जाए और जलाशय की निगरानी की जाए तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभागों से मांग की है कि तालाब की तत्काल सफाई कराई जाए तथा पानी की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराई जाए ताकि समस्या का वास्तविक कारण सामने आ सके।
करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी उठ रहे सवाल
तालाब के सुंदरीकरण पर सार्वजनिक धन खर्च किए जाने के बाद अब स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि संरक्षण और रखरखाव की व्यवस्था प्रभावी होती तो जलाशय की वर्तमान स्थिति शायद इतनी गंभीर नहीं होती।
हालांकि यह भी उल्लेखनीय है कि परियोजना के कार्यान्वयन, रखरखाव और वर्तमान स्थिति से जुड़े सभी तथ्यों का मूल्यांकन संबंधित विभागों की आधिकारिक रिपोर्ट और निरीक्षण के आधार पर ही किया जा सकता है।
संरक्षण समिति की भूमिका पर भी चर्चा
तालाब के संरक्षण के लिए गठित समिति की भूमिका को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चा हो रही है। नागरिकों का कहना है कि यदि समिति नियमित रूप से निरीक्षण और निगरानी करती तो समस्याओं की समय रहते पहचान कर उनका समाधान किया जा सकता था।
हालांकि समिति या संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों के अनुसार शहरी क्षेत्रों के तालाब केवल जल स्रोत ही नहीं होते, बल्कि स्थानीय जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यदि ऐसे जलाशयों की नियमित देखभाल नहीं की जाती तो जल गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ जलीय जीवों और आसपास के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए समय-समय पर सफाई, जल परीक्षण और संरक्षण संबंधी उपाय आवश्यक माने जाते हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल स्थानीय लोग संबंधित विभागों से अपेक्षा कर रहे हैं कि तालाब की वर्तमान स्थिति का निरीक्षण कराया जाए, जल गुणवत्ता की जांच कराई जाए और मृत मछलियों के कारणों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए।
इसके अलावा यदि रखरखाव में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो उसके लिए जिम्मेदार पक्षों की पहचान कर आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
कानपुर का ऐतिहासिक शेरशाह सूरी तालाब एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहर माना जाता है। ऐसे में इसकी वर्तमान स्थिति स्थानीय नागरिकों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
करोड़ों रुपये के सुंदरीकरण और संरक्षण समिति के गठन के बावजूद यदि रखरखाव से जुड़े सवाल उठ रहे हैं, तो संबंधित विभागों द्वारा वस्तुस्थिति का आकलन करना आवश्यक होगा।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन तालाब की सफाई, जल गुणवत्ता की जांच और संरक्षण व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर वैज्ञानिक जांच और नियमित रखरखाव से इस ऐतिहासिक जलाशय को फिर से स्वच्छ और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

